अम्बिका की खुंदक से कांग्रेस में त्राहिमाम!!!
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ई-मॅगज़ीन/E-Magazine

*कुमार राकेश*

कहते है कांग्रेस का दुश्मन कांग्रेस है.ऐसा सत्य भी है और अभिप्रमाणित भी.इसके कई सत्य हैं तो कथ्य भी .उसी क्रम में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अम्बिका सोनी आजकल गहरे खुंदक में है,उसकी खास वजह उनकी कई अतृप्त इच्छाएं है,जो मौजूदा स्थिति में भी पूरी होती नहीं दिख रही हैं.कभी इंदिरा और राजीव गाँधी की कोपभाजन की शिकार अम्बिका आजकल सोनिया-राहुल युग में पार्टी के अंदर बैठकर समय समय पर पार्टी का कबाड़ा करने से नहीं चूकती.

गौरतलब है इंदिरा गाँधी ने उन्हें कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाया था,जबकि राजीव गाँधी ने उन्हें लोक सभा की उम्मीदवार के लायक भी नहीं समझा था.शायद इन सब कारणों की वजह से ही पार्टी के नए नेता नवजोत सिंह सिध्हू ने कैकयी और कौशल्या वाला बयान दिया है.जो इस प्रकरण में काबिले गौर है.

अपनी खुंदक के तहत अम्बिका एक बार फिर पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनावों में कांग्रेस का कबाड़ा करने की फिराक में है.उनकी कोशिश है कि कभी पार्टी के दिग्गज रहे अर्जुन सिंह शैली में पार्टी का फिर से कबाड़ा किया जाये.पांचो राज्यों में उत्तराखंड,उत्तरप्रदेश,गोवा और मणिपुर में कांग्रेस की स्थिति संतोषजनक नहीं है पर श्रीमती सोनी अपने प्रिय राज्य पंजाब को लेकर खास तौर पर कई प्रकार के दाँव पेंच में जुट गयी है.हालाँकि आज की तारीख में कांग्रेस पंजाब में सबसे ज्यादा आशान्वित हैं,जबकि अम्बिका सोनी की वजह से पार्टी की प्रदेश में लुटिया डूब सकती है.उसका मुख्य कारण प्रदेश में पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओ की घोर उपेक्षा और बाहरी लोगो की वकालत है.गौरतलब है पंजाब में कई मज़बूत उम्मीदवारों की उन्होंने अपनी शैली में खिलाफत की .उत्तराखंड में तो श्रीमती सोनी की वजह से पार्टी की बैंड बजने वाली है.

श्रीमती सोनी के करीबियों की माने तो अम्बिका जी की अंतिम इच्छा पंजाब का मुख्यमंत्री बनना है.जिसके लिए वह पिछले कई वर्षों से ऐन-केन प्रकारेण जोड़ तोड़ में लगी हुयी हैं.शायद उन्ही दबी हुयी आकांक्षाओं को पूरा करने की नीयत से वह इस बार अपनी पूरी ताक़त झोक दी हैं.हालांकि वह परदे के पीछे से सक्रिय है.इसलिए पंजाब कांग्रेस में सबसे ज्यादा बवाल मचा हुआ है.अब तक वितरित किये सीटों का विश्लेषण किया जाये तो ऐसा लगता है कि हर सीट पर बवाल है.जिसकी जड़ में अम्बिका सोनी का विशेष रूचि होना बताया जा रहा है.जबकि कांग्रेस आलाकमान ने अभी तक किसी भी नेता को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है.

सूत्रों की माने तो नवजोत सिंह सिध्हू की कांग्रेस में काफी देरी से आने के पीछे भी अम्बिका सोनी हैं .श्रीमती सोनी इस बार अपने मुख्यमंत्री बनने के किसी भी प्रकार का कोई समीकरण नहीं छोड़ना चाहती,लेकिन शायद इसकी भनक पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह को लग चुकी है,इसलिए दोनों में शह और मात का भी खेल भी अंदर खाने शुरू हो चूका है.

अम्बिका सोनी की पहुँच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और उपाध्यक्ष राहुल गाँधी के यहाँ सीधी है.उनकी बात ये दोनों नेता मानते भी रहे हैं.उनकी तथाकथित सलाहों की वजह से ही पंजाब कांग्रेस में अभी तक कई समस्याएं सामने खड़ी हो गयी हैं,श्रीमती सोनी के कुछ करीबियों की माने तो लगता हैं वह अपने लोगों से पहले समस्याओं का अम्बार लगवाती है,फिर अपनी शैली में उसका समाधान कर आलाकमान की नज़रों में स्वयं की उपयोगिता साबित करती है.इस बाबत पार्टी में कई प्रकार के उदाहरणों की लम्बी सूची है.जिस जिस प्रदेश की वह प्रभारी रही,वहां वहां पार्टी का बंटाधार हुआ,

उत्तराखंड में यशपाल आर्य जैसे वरिष्ठ नेता का ऐन मौके पर भाजपा में शामिल होने के पीछे श्रीमती सोनी की अकर्मण्यता ही बताई जा रही है.उसके पहले 9 विधायको का कांग्रेस से जाने का महाखेल को भी श्रीमती सोनी नहीं सम्भाल सकी थी जबकि प्रदेश के कई नेताओं ने कई बार मिलकर समय समय पर उनसे मनुहार की थी,पर श्रीमती सोनी के कान पर जू नहीं रेंगी.हिमाचल प्रदेश में भी कमो बेश वही होने वाला है.

सूत्रों की माने तो अम्बिका सोनी के लिए निहित स्वार्थ पार्टी हितों की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है.इसको लेकर कई उदाहरण पार्टी खातों में मौजूद हैं.आज की तारीख में श्रीमती सोनी उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की राष्ट्रीय प्रभारी है.दोनों प्रदेश में पार्टी का बंटाधार होना तय माना जा रहा है.

अम्बिका सोनी के प्रिय राज्य पंजाब के  कुल 117 सीटों में करीब 14-15 सीटों पर कांग्रेस की स्थिति डांवाडोल है.जिसकी  मुख्य वजह श्रीमती सोनी की विशेष किस्म की राजनीति है.सबको पता है 2014 में अम्बिका सोनी लोक सभा चुनाव में अपनी हार से बहुत दुखी है और पुरानी ख़ुदक अलग से है.कहा जा रहा है अम्बिका की कूटनीति की वजह से  रोपड़,जालंधर ,अमृतसर,पठानकोट,लुधियाना,सानेवल से जुडी सीटें पर घमासान है.रोपड़ और पठानकोट पर भी काफी मारा मारी है.प्रदेश के कई पदाधिकारियों ने इस बारे में आलाकमान से अम्बिका की शिकायते भी की हैं.पर केंद्रीय स्तर के पार्टी के वरिष्ठ नेता अभी कई कारणों से चुप बैठे हैं.अम्बिका सोनी की कथित अंदरूनी राजनीति को लेकर कई नेता बैचेन है तो कई तनावग्रस्त.लुधियाना से पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी को एक विधान सभा का उम्मीदवार नहीं बनाये जाने की मुख्य कारण अम्बिका सोनी बताई जा रही है.इसे बेचारे मनीष तिवारी खासे परेशान है.

पंजाब में श्रीमती सोनी की विशेष रूचि को लेकर केन्द्रीय स्तर पर कई नेताओं  ने दबी जुबां से सवाल उठाने की असफल कोशिश की  हैं.बात सोनिया गाँधी और राहुल तक पहुंची है.पर श्रीमती सोनी ने उन्हें उल्टा समझा कर शांत कर दिया हैं.इस प्रदेश में कैप्टेन अमरिंदर सिंह से आन्तरिक तौर पर अम्बिका सोनी की पटरी नहीं बैठती,जबकि उनकी पत्नी और पूर्व केन्द्रीय मंत्री परनीत कौर से उनकी अच्छी छनती है.पाला बदलने में माहिर कई नेता अभी भी अपने अपने दाव के इंतज़ार में है.क्योकि कांग्रेस ने अभी तक किसी को अपना मुख्यमंत्री और नेता घोषित नहीं किया है.सूत्रों की माने तो केद्रीय आलाकमान उसके लिए तैयार था,पर श्रीमती सोनी की कथित सलाह की वजह से उसकी घोषणा नहीं की जा सकी है.जिसके पीछे भी श्रीमती सोनी की अपनी महत्वाकांक्षा बताई जा रही है.

पिछले दिनों कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओ की राहुल गाँधी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी से मुलाकात हुयी.वो आईडिया भी श्रीमती सोनी का बताया जा रहा है.उस मुलाकात से कांग्रेस को फायदा कम नुकसान ज्यादा हुआ है.श्रीमती सोनी आजकल राहुल गाँधी की खास सिपहसलार बताई जा रही है.आईडिया दिया अम्बिका सोनी ने,जबकि वो खुद प्रधान मंत्री से मुलाकात वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं थी .कारण स्पष्ट है.श्रीमती सोनी नहीं चाहती है कांग्रेस देश में मज़बूत हो.वैसे भी इतिहास गवाह है अम्बिका सोनी कई बार कांग्रेस को छोड़कर वापस आ चुकी है. पिछले दिनों संसद से सड़क तक कई भाजपा और अन्य दलों के सांसदों ने अम्बिका सोनी की तारीफ़ की हैं.ये सोचने वाली बात है कि श्रीमती सोनी के समर्थक भाजपा और उनके सहयोगी दलों में भी हैं.क्योकि ये स्पष्ट हैं कि कोई किसी की यूँ ही तारीफ़ नहीं करता.

कहते है भारतीय राजनीति में अम्बिका सोनी का दिमाग दो धारी तलवार की तरह काम करता है.अम्बिका सोनी अपनी उपयोगिता बनाना खूब जानती है.जो भी हो,लगता है कांग्रेस के अब अच्छे दिन नहीं आने वाले.कांग्रेस के ऐसे ही कई वरिष्ठ नेताओ की कारगुजारियों की वजह से ही देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक पार्टी कांग्रेस दिनों दिन सियासती चाल में पिछड़ती जा रही है.

 

नई दिल्ली से कुमार राकेश