" माँ गंगे!"
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ई-मॅगज़ीन/E-Magazine

*कनक लता राय*      

गंगा! तुम शक्ति हमारी।

गंगा! तुम भक्ति हमारी।।

उज्ज्वला,निर्भया , शक्तिस्वरूपा,

तुम हमारी प्रतिरुपा।।

तुम बिन जीवन क्षीण।

सृजनहार, सृष्टि की आधार।

शिव के माथे की श्रृंगार,

अतुलनीय, महिमा अपरम्पार।

माँ! भक्तिस्वरूपा।।

धार धार में जीवन सार,

भागीरथ के तपस का तार।

रोम रोम करता आभार,

माँ! जननीरुपा ।।

पापनाशिनी, दुःखनिवारिणी, जीवनतारिणी, मोक्षस्वरूपा।

संस्कृति - संरक्षिका, भाव-पोषिका।

अध्यात्म के बीजों का प्रथम सोपान,

 

माँ गंगे! तुझे प्रणाम।।