ऑपरेशन मनिष भंगाले १- मनिष भंगाले के खिलाफ धोखाधडी की धाराएँ ...
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शीतल करदेकर

21 जून: वडोदरा स्थित मनिष भंगाले ने सालभर पहले महाराष्ट्र के भूतपूर्वी मंत्री एकनाथराव खडसे पे लांच्छन लगाया था केपाकिस्तान स्थित कुख्यात गुंडा दाऊद इब्राहिम मोबाईल द्वारा खडसे से संपर्क बनाए है. पिछले साल अप्रैल और मई २०१६ दरम्यान मनिष भंगाले और अन्य महिला नेताओं ने खडसे को इस विषय पर टार्गेट किया था. किंतु, भंगाले द्वारा रचित खडसे की बदनामी का कारस्थान फर्जी सबुतों के आधार पर निर्माण किया गया यह सत्य अब पुलिस की तयकिकात पश्चात उजागर हो चुका है. भंगाले के विरोध में मुंबई सायबर क्राईम ब्रान्च में फरयाद दाखल होने पश्चात वो न्यायिक हिरासत में है. न्यायालयने दो बार भंगाले की जमानत यचिका खारिज कर दी है.

भंगाले के विरोध में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता कलम ४१९ (गैर हेतू से धोखाधडी)४६५ (फर्जी दस्तावेज बनाना)४६९ (गलत हेतू सेलांच्छन लगाना)५०० (मानहानी करना) आदी कलम लागए है. इसके पश्चात भंगाले ने फर्जी सबुतों के आधार पर खडसे के खिलाफ किस प्रकार बदनामी का षडयंत्र रचा इसका लेखा-जोखा स्पष्ट करनेवाला ७८८ पेज का चार्जशीट मुंबई सायबर क्राईम ब्रान्च ने मुंबई महानगर न्यायालयात (३७) के सामने रखा है. इसिके साथ इस कारस्थान से जुडे  प्रत्यक्षदर्शी २० गवाहों की जुबानी साथ में लगा रखी है.

खडसे की बदनामी हेतू रचा हुआ षडयंत्र अब एक साल बाद सामने आ रहा है तो बहुत सारी बाते स्पष्ट होने लगी है. इस अवकाश में राजकारण व समाजकारण के क्षेत्र में उथल पुथल हुई है. खडसे पर लगाए सभी लांच्छन की जांच किसी ना किसी कमिटी या आयोग द्वारा चल रही है. मात्र, अंतिम परिणाम किसी भी समिती या आयोग द्वारा सामने आया नही है. पिछले साल विविध आरोपोंसे घिरे खडसे ने आखिरकार खुद ही मंत्रिपद से इस्तिफा दिया था. खडसे के मंत्रिपद से उतरने के बाद खान्देश प्रांत ती विकास योजनाओं पर भारी असर पडा है. खडसे विभिन्न १० मंत्रालयों के अधिकारी थे. उनके नेतृत्व में जनहित के कई निर्णय लिए गए थे. मात्र निर्णय की प्रत्यक्ष उपयोगिता सिद्ध होने से पहले खडसे मंत्रिमंडल से बाहर हो हए. इसका परिणाम यही हुआ के विकास निर्णय प्रलंबित हो गए. जलगाव, धुले, नंदुरबार इस खान्देश प्रांतसे जुडे २१ विकास योजनाओं पर खडसे के मंत्री ना होने का असर हुआ है.

खडसे जैसे ही विभिन्न आरोपों के घेरे मे आए, उनके अन्य विरोधी नेताओंने खडसे के बदनामी का अभियान प्रारंभ किया. पक्ष श्रेष्ठी से चर्चा पश्चात खडसे ने मंत्रिपद का त्यागपत्र दिया. मात्र, जैसे ही खडसे मंत्रीपद से उतारे गए उनपर लगे आरोंपों की सत्य और असत्यता को जानने का प्रयास ना भाजपांतर्गत हुआ और ना ही किसी माध्यमने इसपर खोज पत्रकारिकाता की. इसिके साथ खडसे पर लगे आरोंपों की जांच का अहवाल अब तक सामने नही आया है.

भंगाले ने लगाए सभी आरोप कथित और फर्जी सबुतों के आधार पर थे. इस विषयपर सायबर क्राईम ब्रान्चएटीएस (मुंबई) और राष्ट्रीय सुरक्षा सल्लागार तथा केंद्रीय गृह राज्यमंत्री ने प्रारंभ में खडसे को क्लिनचीट भी डी थी. अब ऐसा निष्कर्ष सामने आ रहा है की, कथित आरोपों की बौछार केवल खडसे के मंत्रिपद के इस्तिफे के लिए की गयी थी. किसी भी आरोप की सत्यता तक पहुँचने की गंभीरता ना सरकारी स्तर पर थी और ना ही माध्यमस्तर पर थी.

यहाँ पर एक बात मात्र निश्चित है, खडसे के उपर कथित आरोंपों की बौछार होने के पश्चात भी उनके समर्थक, हितचिंतक तथा कार्यकर्तांओं का खडसे प्रती रत्तीभर भी विश्वास कम नही हुआ. खडसे के सभी समर्थक, हितचिंतक आज भी मानते ही की, खडसे निर्दोष है और उन पर लगे सभी लांछन बे बुनियाद है. आनेवाला समय खडसे के लिए उज्ज्वल और उनके सन्मान की पुनर्स्थापना जरुर करेगा.

 

खडसे के खिलाफ रचे षडयंत्र को हम ऑपरेशन मनिष भंगाले इस शोध वृत्तमालिका में क्रमशः पढ सकते है.