पुरे पूर्वी भारत में बाढ़ का कहर जारी, बारिस ने तोड़ा 100 का रिकॉर्ड
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ई-मॅगज़ीन/E-Magazine

पटना/रांची:  इस साल के मानसून में आसमान से बारिश बाढ़ के रूप में कहर बनकर बरस रही है. इस वजह से बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओड़िसा समेत पूरे देश में तबाही मची हुर्इ है. आलम यह है कि इस साल के अगस्त महीने में बारिश ने 100 साल का रिकॉर्ड  तोड़ दिया है. मंगलवार सुबह बेंगलुरू में शुरुआती तीन घंटों में रिकॉर्ड 180 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि अगस्त में पिछले 100 वर्षों में सर्वाधिक बारिश दर्ज की गयी है. बारिश ने पूरे शहर में कहर बरपा दिया और सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. सड़कें और घर बाढ़ के पानी में डूब गये हैं, जिससे 71वें स्वतंत्रता दिवस समारोहों पर पानी फिर गया.

पड़ोसी देश नेपाल और बिहार में लगातार हुई भारी बारिश के कारण अचानक आयी बाढ़ (फ्लैश फ्लड) से प्रदेश में अब तक 56 लोगों की मौत हो जाने के साथ बाढ़ से 13 जिलों की 69.41 लाख आबादी प्रभावित हुई है. आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित प्रदेश के 13 जिलों किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल एवं मधेपुरा में से सबसे अधिक 20 लोग अररिया में, पश्चिमी चंपारण में 9, किशनगंज में 8, सीतामढी से 5, मधेपुरा में 4, पूर्वी चंपारण, दरभंगा एवं मधुबनी में 33 और शिवहर में एक व्यक्ति की मौत हुई है. उन्होंने बताया कि बाढ़ के कारण इन 13 जिलों के 98 प्रखंड और 1070 पंचायत प्रभावित हुए हैं और कुल 69.41 लाख आबादी प्रभावित हुई है.

राज्य सरकार की ओर से बाढ़ग्रस्त इलाके में घिरे लोगों को सुरक्षित निकाले जाने के लिए युद्ध स्तर पर काम किये जाने का दावा किया जा रहा है. अब तक 2,48,140 लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है और 343 राहत शिविरों में 93149 लोग शरण लिए हुए हैं. उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में युद्ध स्तर पर राहत बचाव के लिए एनडीआरएफ की 22 टीम जिसमें 949 जवान एवं 100 नौका, एसडीआरएफ की 15 टीम जिसमें 421 जवान और 82 नौका, सेना की चार टुकड़ियों के कुल 300 जवान को 40 नौकाओं के साथ है. सेना की तीन अतिरिक्त टुकड़ियां जो सोमवार की देर रात से सीतामढ़ी,मधुबनी, पश्चिम चंपारण एवं पूर्वी चंपारण जिले में बाढ़ राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों के दल द्वारा भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया जा रहा है. इस दल में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव, पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग के प्रधान सचिव सहित पूर्णिया, अररिया, किशनगंज एवं कटिहार जिला के जिला पदाधिकारी एवं प्रभारी प्रधान सचिव शामिल हैं.

इनके द्वारा हवाई सर्वेक्षण के आधार पर स्थिति का आकलन करके आगे की रणनीति तैयार की जायेगी. वायुसेना के दो हेलिकॉप्टरों के माध्यम से पूणर्यिाँ हवाई अड्डे से प्रभावित क्षेत्र में खाद्य सामग्री वितरित की जा रही है. पश्चिम चंपारण क्षेत्र के अत्यधिक प्रभावित क्षेत्र में खाद्य सामग्री वितरित करने के लिए एक अतिरिक्त हेलिकॉप्टर का अधिग्रहण किया गया है. यह हेलिकॉप्टर से राहत कार्य शुरू करेगा.

पूर्वी मध्य रेलवे (ईसीआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि बाढ़ के पानी के रेल पटरी के ऊपर से गुजरने के कारण कोई भी ट्रेन कटिहार से आगे उत्तर-पूर्व की तरफ नहीं जा पा रही है. उन्होंने कहा कि कटिहार से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-फ्रंटियर रेलवे के कटिहार मंडल के बारसोई-किशनगंज रेल खंड के बीच रेलवे पुल संख्या 133 बाढ़ के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. पुल के ट्रैक के नीचे की मिट्टी धंस गयी है.

ईसीआर सीपीआरओ ने बताया कि 33 ट्रेनों को रद्द किये जाने के साथ समस्तीपुर और रक्सौल के बीच 75225 ट्रेन को रद्द कर दिया गया. उन्होंने बताया कि बाढ़ के कारण पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे में ट्रेन संख्या 15619 गया कामख्या एक्सप्रेस ट्रेन को रद्द कर दिया गया. केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के मुताबिक कमला बलान नदी में अप्रत्याशित जल प्रवाह आने के कारण कल कमला बलान दायॉं तटबंध के किमी 57.10 पर बांध क्षतिग्रस्त हुआ.

महानंदा नदी में अप्रत्याशित जल प्रवाह आने के कारण बागडोब झौआ महानुंदा बायां तटबंध के कदवा प्रखंड भररी गांव के पास किमी 16.00 पर एवं झैआ दिल्ली दिवानगंज महानंदा बायां तटबंध के आजमनगर प्रखंड के मररी गांव के पास किमी 14.25 पर तथा झिल्लीपारा बलवाटोली गांव के पास किमी 18.57 पर तटबंध क्षतिग्रस्त हुआ. गंडक नदी में पश्चिमी चम्पारण जिलांतर्गत भितहा प्रखंड में गंडक दायॉं तटबंध के किमी 00.68 से किमी 0.78 के बीच तटबंध लगभग 15 मीटर की लंबाई में क्षतिग्रस्त हुआ. खिरोई नदी में अप्रत्याशित जल प्रवाह के कारण बीती रात्रि दरभंगा जिले के जाले प्रखंड अंतर्गत बघौल गांव के नजदीक खिरोई दाया तटबंध के किलोमीटर 7.0 पर तटबंध करीब पांच मीटर की लंबाई में क्षतिग्रस्त हो गया. बिहार के शेष अन्य सभी बाढ़ सुरक्षात्मक तटबंध सुरक्षित हैं.

केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गंगा नदी का जलस्तर गांधीघाट में खतरे के निशान से 65 सेंटीमीटर नीचे था. इसके जलस्तर में आज सुबह आठ बजे तक 17 सेमी वृद्धि होने की संभावना है. गंगा नदी का जलस्तर मंगलवार की सुबह छह बजे हाथीदह में खतरे के निशान से 86 सेमी नीचे था. इसके जलस्तर में बुधवार की सुबह 8 बजे तक 8 सेमी वृद्धि होने की संभावना है. इस नदी का जलस्तर मंगलवार की सुबह छह बजे कहलगांव में खतरे के निशान से 50 सेमी नीचे था. इसके जलस्तर में सोमवार की रात 10 बजे तक 01 सेमी वृद्धि होने की संभावना है. गंगा नदी का जलस्तर मंगलवार की सुबह छह बजे साहेबगंज में खतरे के निशान से 35 सेमी उपर था. इसके जलस्तर में बुधवार की सुबह छह बजे तक कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने संभावना है. घाघरा नदी का जलस्तर मंगलवार की सुबह 6 बजे दरौली में खतरे के निशान से 31 सेमी नीचे था. इसके जलस्तर में बुधवार की सुबह 8 बजे तक 7 सेमी वृद्धि होने की संभावना है.

 

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से अब तक 28 हजार बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. माॅनसूनी बारिश और बाढ़ को देखते हुए बल ने असम, गुजरात, बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में राहत एवं बचाव कार्य के लिए कई टीमें तैनात की हैं. बल ने एक बयान में कहा कि अब तक राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमों ने 28,950 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और 3,529 लोगों को चिकित्सकीय सहायता मुहैया करायी. बल ने बिहार में 7,296, असम में 5,184, उत्तर प्रदेश में 2,510 और पश्चिम बंगाल में 2,484 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. इसमें कहा गया है कि बल के मुख्यालय में 24 घंटे काम करने वाले नियंत्रण कक्ष से स्थिति की निगरानी की जा रही है.