कपास पर गुलाबी इल्ली का प्रकोप, फसल नष्ट करें किसान
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ई-मॅगज़ीन/E-Magazine

3 जनवरी 2018, मध्यप्रदेश: के बुरहानपुर सहित कई इलाकों में कपास की फसल गुलाबी इल्ली के प्रकोप से तबाह हो गई है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल बीच-बीच में हुई बेमौसम बारिश के चलते कपास गुलाबी इल्ली से प्रभावित हुई है. वैज्ञानिकों ने बताया कि कपास के फसल का कीट प्रबंधन करना किसानों को काफी महंगा पड़ेगा, लिहाजा फसल नष्ट करना ही एक मात्र हल है.

कपास के भाव कम मिलने के कारण किसानों ने पहले की अपेक्षा इस बार कपास की बुआई का रकबा घटाया था, लेकिन गुलाबी इल्ली के प्रकोप के चलते इन किसानों के लिए एक बार फिर कपास की बुआई घाटे का सौदा हो गई है. कीटों से बचने के लिए किसानों ने देशी कपास छोड बीटी कॉटन अपनाया था, लेकिन इस पर भी कीटों का असर होने लगा है. किसान संगठनों ने मांग की है कि सरकार किसानों को प्रमाणिक बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें. किसानों ने पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र की तर्ज पर मप्र सरकार से कपास के किसानों को प्रति हेक्टयर 25 हजार रुपए मुआवजा राशी देने की मांग की है.

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बुरहानपुर सहित मप्र के वह सभी इलाके जहां कपास की फसल लगाई जाती है, साथ ही पडोसी राज्य महाराष्ट्र में भी कपास पर गुलाबी इल्ली का प्रकोप है. इसका कोई इलाज नहीं है यानी यह लाईलाज बीमारी कैंसर की तरह हो गई है. वैज्ञानिको के अनुसार लगातार दो-तीन बार हुई बेमौसम बारिश के चलते कपास पर कीट का प्रकोप बढ़ा है. वैज्ञानिकों के अनुसार अगर इन कीटों का प्रबंध करे, तो पूरे पौधे में जहर डालना पड़ेगा, जिससे किसी कीमत पर कपास का उत्पादन नहीं होगा.

 

वैज्ञानिकों ने बताया कि ऐसा करने पर पर्यवरण को नुकसान होगा और साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर इसका प्रतिकुल प्रभाव पडेगा. इस काम में किसानों को अनावश्यक लागत आएगी, लिहाजा हमारे द्वारा किसानों को इस फसल को नष्ठ कर नई फसल की तैयारी करने की सलाह दी जा रही है.