पोलिटिकल फंडिंग का भी अब रखा जा सकेगा लेखा-जोखा
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ई-मॅगज़ीन/E-Magazine

Jan 3rd, 2018 

नयी दिल्ली: सरकार ने चुनावी मैदान में ताल ठोकने की खातिर लिये जाने वाले चुनावी चंदे का लेखा-जोखा रखने की तैयारी पूरी कर ली है. अब चुनावी चंदा नकदी के तौर पर नहीं लिया जा सकेगा, बल्कि इसके लिए सरकार की आेर बाॅन्ड जारी किया जायेगा. दरअसल, सरकार की आेर से यह कवायद चुनावी चंदे में होने वाले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने आैर राजनीति में कालेधन को खपाने पर रोक लगाने के लिए की जा रही है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को राजनीतिक दलों को चंदे के लिए चुनावी बांड की रूपरेखा की घोषणा की है, जो 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, एक लाख रुपये, 10 लाख रुपये और एक करोड़ रुपये के मूल्य में उपलब्ध होंगे. इसे राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है. लोकसभा में इसका उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि चुनावी बाॅन्ड को अंतिम रूप दे दिया गया है और इस व्यवस्था के आरंभ होने से देश में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की पूरी प्रक्रिया में काफी हद तक पारदर्शिता आयेगी.

जेटली ने कहा कि राजनीतिक दलों को चंदे के लिए ब्याज मुक्त बांड भारतीय स्टेट बैंक से जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर महीने में खरीदे जा सकते हैं. चुनावी बाॅन्ड 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, एक लाख रुपये, 10 लाख रुपये और एक करोड़ रुपये के मूल्य में उपलब्ध होंगे. उन्होंने राजनीति दलों को चंदे के लिए चुनावी बाॅन्ड की व्यवस्था को अंतिम रूप दिये जाने की जानकारी दी. वित्त वर्ष 2017-18 के बजट के दौरान जेटली ने चुनावी बाॅन्ड शुरू करने की घोषणा की थी.

जेटली ने सदन में कहा कि हमने आम बजट के दौरान चुनावी बाॅन्ड शुरू करने का ऐलान किया था. सरकार ने इसे अंतिम रूप दे दिया है. उन्होंने कहा कि राजनीति दलों को चंदा देने वाले लोग भारतीय स्टेट बैंक की कुछ तय शाखाओं से चुनावी बाॅन्ड खरीद सकेंगे और इन चुनावी बाॅन्ड की मियाद 15 दिनों की होगी. इस मियाद के भीतर पंजीकृत राजनीतिक दलों को चंदे के तौर पर बाॅन्ड देने होंगे. चुनावी बाॅन्ड पर देने वाले का नाम नहीं होगा, इसे केवल अधिकृत बैंक खाते के जरिये 15 दिन के भीतर भुनाया जा सकेगा.

 

वित्त मंत्री ने कहा कि ये चुनावी बाॅन्ड उन्हीं पंजीकृत राजनीतिक दलों को दिये जा सकेंगे, जिनको पिछले चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट मिला हो. राजनीतिक दल इन चुनावी बाॅन्ड को भुना सकेंगे. जेटली ने कहा कि वर्तमान समय में राजनीतिक दलों में ज्यादातर चंदा नकदी में मिलता है और इसमें पारदर्शिता नहीं के बराबर होती है. चुनावी बाॅन्ड की व्यवस्था से काफी हद तक पारदर्शिता आयेगी.