महानायक का राष्ट्र प्रेम या नालायकी...
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*कुमार राकेश* :  जी हाँ ,हम चर्चा कर रहे हैं ,भारत के महानायक कहे जाने वाले फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन की.जबकि यदि उनके वास्तविक जीवन को न्यायोचित ढंग से खंगाला जाये तो वह महानायक नैतिक और नीतिगत जीवन में किसी खलनायक और नालायक से भी कमतर नजर आएगा. वैसे अमिताभ को दी गयी महानायक की उपाधि की भी कई विवादस्पद कहानियां हैं.

अमिताभ बच्चन एक बार फिर विश्व चर्चा में है-इसकी वजह एक नया आर्थिक घपला है,जिसे पनामा लिक्स के नाम से जाना जा रहा है.प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने उस मामले की फौरी तौर पर जांच के आदेश भी दे दिए हैं.लेकिन अमिताभ बच्चन की महानता देखिये ,वह कहते है –उनके नाम का दुरूपयोग किया गया है.उनके साथ भारत के 500 लोगो के नाम उस सूची में है ,जिनमे उनकी पुत्रवधू और अदाकारा ऐश्वर्या राय बच्चन भी है.

मामला शुद्ध रूप से देश के टैक्स चोरी का है.उनकी पुत्रवधू ने भी उस खबर का बड़ी सहजता से खंडन किया है ,जबकि इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के साथ कई देशों के रिपोर्टर्स टीम अपने अपने दावे पर अटल है कि वह शोधपरक रपट सोलह आने सच है.

इन दोनों एक्टर्स का जवाब नहीं.बेचारी भारत की जनता.उन लोगो ने जो बोला ,सबने मान लिया.बाकी नरेन्द्र मोदी की दोस्ती किस दिन काम आएगी.यदि आई तो..यदि मोदी जी ने अपनी शुद्ध प्रशासन शैली पर अमल किया तो अमिताभ क्या ,कोई भी जांच से नहीं बच पायेगा.इसलिए विश्व के बहुचर्चित प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी स्वच्छ सरकार के लिए भी पनामा लिक्स जांच और उसका परिणाम एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है.वैसे अपने देश की रीत रही है-कुछ को छोड़कर,भ्रष्टाचार के मसले में आजतक कोई बड़ा राजनेता या रसूखदार नहीं पकड़ा गया.यदि उनमे से कुछ पकडे भी गए तो शान से छूट भी जाते हैं. वैसे अपने रामचरितमानस के रचयिता संत तुलसीदास तो कई सौ साल पहले लिख गए थे –समरथ को नहीं दोष गोसाई.

वैसे तो मेरे पास अमिताभ बच्चन से जुडी कई कहानियां है,कुछ कही-सुनी तो खुद स्वयं के द्वारा झेली गयी भी .स्वयं के द्वारा झेली गयी कई बड़ी घटनाओ में दो घटनाओ का जिक्र शायद आपको अमिताभ बच्चन के एक नए रूप का दर्शन करा सकता है.

बात 1999 की है .स्थान 3 कृष्ण मेनन मार्ग ,नई दिल्ली .समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद मुलायम सिंह यादव का सरकारी बंगला.अवसर -मुलायम सिंह जी के पुत्र और आज के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की शादी की पार्टी. देश-विदेश और सभी क्षेत्रों से मेहमान वहां पर आमंत्रित थे.मै भी वह पर एक पत्रकार के नाते निमंत्रित था.अति विशिष्ट वाले जोन में सभी वीआईपी भोजन का आनंद ले रहे थे.असली में भारत के महानायक,अपने ज़माने के और आज भी, हर दिल अज़ीज़ मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार भी वहां मौजूद थे.पूरा फिल्म जगत,क्रिकेट जगत के साथ समाज के हर क्षेत्र के कई गणमान्य सितारे भी थे.उस माहौल में मै अपने कुछ मित्रों के साथ दिलीप साहेब से बात कर रहे थे.अमिताभ भी अपने हाथ में प्लेट लिए उनको नमस्कार किया और बातचीत में शरीक हो गए.उस वक़्त मै और अमिताभ एक ही कम्पनी के मुलाजिम थे.इसलिए मैंने उन्हें एक विशेष शैली में नमस्कार किया.वे थोडा सकपकाए.फिर जवाब दिया.बात बात में दिलीप साहेब ने अमिताभ की चुटकी ली.दिलीप साहेब ने कहा- अमित,ये क्या छोटी सी दाढ़ी इतने सुन्दर चेहरे पर लगा रखी है.मुझे तो पसंद नहीं.मेरे को देखो,तुमसे ज्यादा जवान दिखता हूँ.इस पर अमिताभ ने कुछ नहीं बोले.बस मुस्कुरा कर रह गए.इसी बीच पता नहीं क्या,दिलीप साहेब को एक चुहल सूझी.उन्होंने कहा ,भाई आप लोग पत्रकार हो,ये कौम तो बड़ी जालिम होती है.आपमे से कोई इस लम्बे हीरो को झुका दे,तो मेरी तरफ से कॉफ़ी पक्की.देख लो यहाँ पर कॉफ़ी नहीं मिल रही.सब हंस पड़े.वहां पर झुकाने और झुकने का मकसद बड़ा ही साफ़ था.पर मैंने दिलीप साहेब की वह चुनौती स्वीकार की और अमिताभ बच्चन को झुकना पड़ा,अपनी बातो से.जिसे दिलीप साहेब ने बखूबी देखा,सुना.बाद में उन्होंने मुझे विशेष तौर पर कॉफ़ी मंगवा कर पिलवायी और शाबाशी दी.लेकिन साथ ही अपने वादे को तोड़ते हुए उन्होंने ने अमिताभ बच्चन से कहा -अमित बाबु ,ये दिल्ली के पत्रकार बड़े खतरनाक होते है.आज मै मान गया.राकेश ने तुम्हे हराया ही नहीं बल्कि मेरे से लगायी शर्त भी जीत गया. कहानी लम्बी है.इसलिए यहाँ भाव पक्ष को रखा.कुल मिलाकर इस घटना ने मेरे मन में अमिताभ बच्चन के प्रति सम्मान को कम कर दिया.

दूसरी घटना उसके बाद 1999-2000 में भारत सरकार के तत्कालीन केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री वी धनञ्जय कुमार से जुडी है.मैंने और धनञ्जय जी मिलकर इस अभिनेता अमिताभ बच्चन को 36 घंटे तक नाको चने चबवाए.मंत्री उनसे नहीं मिले.मसला सरकारी धन की देनदारी,जुर्माना के साथ टैक्स की चोरी का बताया गया था.ऐश्वर्य राय का भी टैक्स को लेकर कई मसले आयकर और उत्पाद शुल्क विभाग से जुड़े थे ,विवादित भी रहे थे.जो कि बाद में समाजवादी नेता अमर सिंह,रंजन भट्टाचार्य के अलावा कई अन्य संकट मोचको की वजह से समाप्त होते गए.कालांतर में धनञ्जय कुमार का मंत्रालय ही बदल दिया गया था.

जैसे जैसे मैंने इस महानायक की कारगुजारिया देखी,सुनी,जानी ,वैसे-वैसे ये मेरी नजर में ये शायद नायक भी नहीं रह पाए,जबकि शत्रुघ्न सिन्हा.हेमा मालिनी ,धर्मेन्द्र,राजेश खन्ना,विनोद खन्ना के व्यक्तित्व इस महानायक से कही ज्यादा ऊँचा है .इन सबों से भी मेरा कई प्रकरणों में सीधा जुडाव रहा है.इसलिए जब पनामा लिक्स में अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्या राय का नाम चर्चा में आया तो मेरे को कोई आश्चर्य नहीं हुआ,मेरे को लगा कि वे लोग कुछ भी कर सकते है.बाकी देश के कानूनी और राजनीतिक दाव-पेंच के अपने अपने मायने हैं.

अमिताभ बच्चन भारत की सत्ता की गलियारे के पुराने मजे हुए खिलाडी है.जरा गौर फरमाए .वर्ष 1984 में कोंग्रेस के राजीव गाँधी की जयजयकार थी.अमिताभ का वहा पर बोलबाला था. 2013 में नरेन्द्र मोदी का जलवा तेजी से बढ़ा.अमिताभ वहा सबसे पहले अपने कुछ दिन गुजरात में गुजारने लगे थे.1992 के बाद वह राजीव् गाँधी परिवार से कई कारणों से दूर किये गए.जबकि उन्होंने स्वयं को महान बताते हुए खुद को अलग करने की बात कही थी.फिर वाया अमर सिंह समाजवादी पार्टी में घुसे और पार्टी का हर तरह से शोषण किया और खुद को महान बताते रहे.बाद में अमर सिंह से भी अलग हो गए.आज भी तल्खिया बरकरार है.एक तरह से कहा जाए तो अमिताभ बच्चन एहसानमंद कम एहसानफरामोश ज्यादा बताये जाते हैं.उन्होंने सबका अपने हित में उपयोग किया,पर वफादार किसी के नहीं हुए.उनके घर से लेकर बाहर तक की ऐसी कई कहानियां है,जो उनके चेहरा,चरित्र और चाल के बारे में बताती है.जो निंदनीय ज्यादा है.अनुकरणीय कतई नहीं.

इसलिए आज मुद्दा ये है कि अमिताभ के नए मित्र नरेद्र मोदी का व्यव्हार उनके साथ कैसा होगा.क्योकि मोदी के लिए अमिताभ नामक प्राणी की स्थिति गले में मछली के कांटे अटकने जैसे हो गयी है.

मेरा मानना है कि नरेन्द्र मोदी को अब अमिताभ बच्चन जैसो से परहेज करना चाहिए.नहीं तो उनका ईमानदार सुशासन का नारा महत्वहीन हो सकता है. इस क्रम में राष्ट्रीय चिंता की एक बात और है कि अब उन तमाम सरकारी और गैर सरकारी विज्ञापनों का क्या होगा,जिसने इस महानायक के नाम पर करोड़ो रूपये की राशि दाव पर लगायी गयी थी.अब वो विज्ञापन चलेगे या फिर बंद करवाए जायेगे.ये मोदी सरकार को सोचना है.

ऐसे कई सवाल देश के राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में तैरने लगी हैं. सवाल ये भी है एक्सप्रेस एवं अन्य मशीनरी के उस 8 महीने की ताबड़तोड़ अनुसन्धान के बाद सिर्फ अमिताभ बच्चन ,ऐश्वर्य जैसों का नाम ही क्यों आया.ये मसला भी एक नयी जांच की ओर इशारा कर रहा है.

देखना है नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार के लिए देश सर्वोपरि है या किसी ऐसे इंसान की दोस्ती,जिसने एक राष्ट्र द्रोह जैसा कार्य किया है.राष्ट्र के साथ विश्वासघात किया है.

गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन का एक हास्यास्पद बयाँ आया है कि उनके नाम का दुरूपयोग भारत से बहुत दूर पनामा जैसे देश में हुआ ,जहा के लोग हिन्दी फिल्म कम राष्ट्र हितों पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं. काश,अपने देश में भी राष्ट्रहित सभी प्रकार की हितों से बढ़कर होता !!!!

 

 

 

 

 

 

 

*कुमार राकेश