समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 9फरवरी। लोकसभा चुनाव 2024 से पहले संसद का आखिरी सत्र यानि बजट सत्र चल रहा है. वहीं केंद्र सरकार की ओर से सत्र की बजट सत्र की अवधि को बढ़ा दिया गया है. माना जा रहा है कि इसके पीछे का कारण सरकार की तरफ से लाया जाने वाला श्वेत पत्र है. सरकार की ओर से ये श्वेत पत्र गुरुवार को देश की अर्थव्यवस्था पर पेश किया गया होगा. इस श्वेत पत्र के जरिए केंद्र सरकार साल 2014 ने पहले और उसके बाद की भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति की तुलना की . अब सवाल उठता है कि आखिर ये श्वेत पत्र होता क्या है. चलिए जानते हैं इसके बारे में.
आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले ही सरकार और विपक्ष एक दूसरे के प्रति आक्रामक हो गई है. मोदी सरकार श्वेत पत्र के जरिए यूपीए सरकार के काले चिट्ठे खोलने की तैयारी में है. वहीं कांग्रेस ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. मोदी सरकार के श्वेत पत्र से पहले ही कांग्रेस ने ब्लैक पेपर जारी कर दिया है. गुरुवार को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेताओं के साथ मिलकर पिछले 10 साल अन्याय काल के नाम से ब्लैक पेपर के पोस्टर जारी किए.
खरगे ने कहा कि पीएम मोदी हमेशा अपनी सफलता को बताते हैं वहीं असफलताओं को छिपा लेते हैं. उन्होंने कहा कि हम मोदी सरकार के खिलाफ हम ब्लैक पेपर निकालकर लोगों को जानकारी देंगे.
क्या होता है श्वेत पेपर ?
श्वेत पत्र की सबसे पहले शुरुआत ब्रिटेन में 1992 में की गई थी. श्वेत पत्र के जरिए सर्वेक्षण जारी किया जाता है, जिसका मकसद चीजों को बेहतर बनाना होता है. श्वेत पत्र वो दस्तावेज है, जो सरकार, कोई कंपनी या गैर-लाभकारी संगठन द्वारा जारी किया जाता है. इसमें कई समाधान, निष्कर्ष, किसी उत्पाद की सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है. मुख्य तौर पर इसका इस्तेमाल सरकार अपनी नीतियों को जारी करने, कानून पेश करने और जनता की राय जानने के लिए करती है.
इस पत्र को कोई सरकार ही नहीं, संस्था, कंपनी और संगठन भी जारी कर सकती है. इस श्वेत पत्र में कई जानकारियां होती हैं. इसका मकसद आम लोगों तक पहुंचना होता है.
कांग्रेस के ‘ब्लैक पेपर’ पर PM मोदी ने साधा निशाना
कांग्रेस के ब्लैक पेपर PM मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि मैं ब्लैक पेपर का स्वागत करता हूं क्योंकि जब कोई अच्छी बात होती हो काला टीका लगता है. नजर न लगे इसलिए यह जरूरी होता है.