समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 25जुलाई। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बुधवार को नई दिल्ली में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) भवन का दौरा किया। इस दौरान उन्हें डीआरडीओ की हाल की उपलब्धियों, प्रमुख परियोजनाओं, अत्याधुनिक तकनीकों, और भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने श्री सेठ को सशस्त्र बलों द्वारा इस्तेमाल की जा रही और डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही अत्याधुनिक तकनीकों और प्रणालियों के बारे में जानकारी प्रदान की।
रक्षा राज्य मंत्री को बताया गया कि कैसे डीआरडीओ निजी क्षेत्र, एमएसएमई और शिक्षाविदों के साथ सहयोग कर रहा है। इस सहयोग का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, मानव रहित प्रणाली और दोहरे उपयोग वाली तकनीकों जैसे उन्नत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है, जो रक्षा क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकते हैं।
सेठ को बताया गया कि प्रौद्योगिकी विकास निधि योजना निजी उद्योगों, विशेषकर स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई की भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है। यह योजना अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी में क्षमताओं को बढ़ाने और रक्षा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए एक इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य रखती है।
सेठ को डीआरडीओ के उद्योग के प्रारंभिक चरणों से शामिल करने, डीआरडीओ पेटेंट की उपलब्धता, और उद्योग अकादमी उत्कृष्टता केंद्रों के माध्यम से शिक्षाविदों को समर्थन देने की पहलों के बारे में भी जानकारी दी गई।
संजय सेठ ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों की आत्मनिर्भरता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ को देश को भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने रक्षा प्रौद्योगिकियों में शिक्षाविदों और उद्योग की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए डीआरडीओ की पहल की भी सराहना की।
यह दौरा डीआरडीओ की भविष्य की योजनाओं और उनके साथ चल रहे प्रयासों पर एक सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो भारत की रक्षा क्षमताओं को और सशक्त बनाने में योगदान करेगा।