मनु श्रीवास्तव बने IAS एसोसिएशन के अध्यक्ष, लवानिया सचिव, कुमार पुरुषोत्तम कोषाध्यक्ष चुने गए

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,13 फरवरी।
मध्य प्रदेश IAS एसोसिएशन के नए पदाधिकारियों की घोषणा कर दी गई है। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनु श्रीवास्तव को अध्यक्ष, संदीप लवानिया को सचिव और कुमार पुरुषोत्तम को कोषाध्यक्ष चुना गया है। इस नए नेतृत्व से प्रशासनिक कार्यों में और अधिक कुशलता तथा पारदर्शिता की उम्मीद की जा रही है।

मनु श्रीवास्तव: एक अनुभवी प्रशासक

मनु श्रीवास्तव मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और प्रशासनिक क्षेत्र में उनकी पहचान एक कुशल और कर्मठ अधिकारी के रूप में होती है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं दी हैं और विभिन्न योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में एसोसिएशन से जुड़े अधिकारियों को अधिक सशक्त और संगठित करने पर जोर दिया जाएगा।

संदीप लवानिया: सचिव पद की जिम्मेदारी

संदीप लवानिया को आईएएस एसोसिएशन का सचिव चुना गया है। वे प्रशासनिक सेवा में अपने कुशल निर्णय और प्रभावी कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। सचिव के रूप में उनकी जिम्मेदारी होगी कि एसोसिएशन के कामकाज को सुचारू रूप से संचालित करें और सदस्यों के हितों की रक्षा करें

कोषाध्यक्ष बने कुमार पुरुषोत्तम

कोषाध्यक्ष पद के लिए कुमार पुरुषोत्तम का चयन हुआ है। वे वित्तीय मामलों में दक्ष माने जाते हैं और उनके नेतृत्व में एसोसिएशन के कोषीय संसाधनों का सही ढंग से प्रबंधन किया जाएगा। कोषाध्यक्ष का दायित्व एसोसिएशन की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाए रखना होता है, जिसमें कुमार पुरुषोत्तम की भूमिका अहम होगी।

आईएएस एसोसिएशन की भूमिका

मध्य प्रदेश आईएएस एसोसिएशन प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों का एक संगठन है, जिसका उद्देश्य आईएएस अधिकारियों के हितों की रक्षा करना, उनके कार्यों को सुगम बनाना और प्रशासनिक सुधारों को लागू करने में सहयोग देना है।

नए नेतृत्व के आने के बाद एसोसिएशन से यह उम्मीद की जा रही है कि वह अधिकारियों की समस्याओं का समाधान करने के साथ-साथ शासन-प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

निष्कर्ष

मनु श्रीवास्तव, संदीप लवानिया और कुमार पुरुषोत्तम के नेतृत्व में आईएएस एसोसिएशन को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इन अधिकारियों की कार्यशैली और अनुभव से न केवल प्रशासनिक मजबूती बढ़ेगी, बल्कि आईएएस अधिकारियों के हितों की रक्षा भी बेहतर तरीके से हो सकेगी।

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