राजनीतिक भूचाल: पंजाब के किसान आंदोलन के बीच केजरीवाल के फैसले

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,21 मार्च।
आज प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की गई। दरअसल, कई दौर की बातचीत के बावजूद, किसान प्रतिनिधियों की बैठक के बाद कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया। बार-बार किसानों से धरना समाप्त कर घर लौटने की अपील की गई, लेकिन कोई भी किसान मानने को तैयार नहीं था। इसके बाद पंजाब पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए शंभू और खनौरी बॉर्डर से धरना स्थल को जबरन खाली करवा दिया।

पंजाब में हुई इस पुलिस कार्रवाई ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। बीते दिन से ही राज्य की राजनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है। जो नेता अब तक किसानों का समर्थन कर रहे थे और विभिन्न सुविधाएं मुहैया करा रहे थे, अब उनकी भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। खासकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उनके राजनीतिक दांवपेचों को लेकर घेरा जा रहा है। कुछ राजनीतिक विरोधियों ने तो उन्हें “नटवरलाल” करार देते हुए आरोप लगाया कि वह चुनावी फायदे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

एक समय किसानों के पक्ष में खड़े दिखने वाले केजरीवाल अब कथित रूप से अपनी चुनावी रणनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं, खासतौर पर लुधियाना सीट पर जीत हासिल करने के लिए। लुधियाना, जो कि एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र है, वहां किसान आंदोलन के दौरान सड़क जाम की वजह से व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान झेलना पड़ा, जिससे व्यापारी वर्ग में असंतोष बढ़ गया। ऐसे में, व्यापारियों का समर्थन हासिल किए बिना केजरीवाल के लिए आगामी चुनाव जीतना मुश्किल होगा।

पंजाब की बदलती राजनीतिक परिस्थिति में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) दोनों समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। केजरीवाल, जो अब तक किसानों के पक्षधर माने जाते थे, अब व्यापारियों के करीब नजर आ रहे हैं। यह अचानक आया बदलाव संदेह पैदा कर रहा है। पहले किसानों के समर्थन में खड़े होने वाले केजरीवाल अब चुनावी समीकरण साधने में व्यस्त दिख रहे हैं, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि पंजाब में उनकी प्राथमिकताएं बदल रही हैं।

पंजाब पुलिस की कार्रवाई से राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस पार्टी ने AAP सरकार पर किसानों के साथ विश्वासघात करने और व्यापारियों को खुश करने के लिए यह कदम उठाने का आरोप लगाया है। यह भी कहा जा रहा है कि केजरीवाल अपने राजनीतिक भविष्य के लिए व्यापारियों का समर्थन हासिल करना चाहते हैं, खासकर राज्यसभा की सीट पक्की करने के लिए।

स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब पिछले सप्ताह किसानों ने चंडीगढ़ को घेरने की योजना बनाई थी, लेकिन प्रशासन ने तत्काल कदम उठाकर इसे विफल कर दिया। हालांकि, किसानों के प्रति राजनीतिक समर्थन का लंबा इतिहास रहा है, फिर भी केजरीवाल सरकार ने इस बार कड़ा रुख अपनाया, जिससे यह संकेत मिलता है कि अब उनका झुकाव व्यापारिक समुदाय की ओर हो गया है।

किसान और उनके समर्थक अब इस बदलाव पर सवाल उठा रहे हैं, कुछ लोग तो केजरीवाल पर किसानों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए मोहरे की तरह इस्तेमाल करने का भी आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि केजरीवाल सिर्फ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं में रुचि रखते हैं। हाल ही में व्यापारियों के साथ हुई उनकी बैठकें और धरनास्थलों को खाली कराने का फैसला इस धारणा को और मजबूत कर रहा है कि उनका मुख्य लक्ष्य आगामी चुनाव, विशेष रूप से लुधियाना सीट जीतना है।

यह राजनीतिक बदलाव पंजाब में एक नई घटनाओं की श्रृंखला को जन्म दे चुका है, जहां केजरीवाल और उनकी सरकार किसानों के विरोध से लेकर व्यापारियों के समर्थन तक के सफर में कठघरे में खड़ी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाओं का असर सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति में भी गहरा प्रभाव डाल सकता है। यह पूरा घटनाक्रम विपक्ष के जटिल गठबंधन की असलियत को भी उजागर करता है।

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