समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,22 मार्च। नागपुर बेंच की जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला द्वारा दिया गया हालिया फैसला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। यह विवादास्पद निर्णय एक 12 वर्षीय बच्ची के यौन शोषण के मामले में आया, जिसमें आरोपी को यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत बरी कर दिया गया। अदालत ने माना कि कपड़ों के ऊपर से बच्ची के स्तनों को छूना “यौन उत्पीड़न” की श्रेणी में नहीं आता, क्योंकि इसमें “त्वचा से त्वचा” संपर्क नहीं था। हालांकि, आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत दोषी ठहराया गया, जो अपेक्षाकृत हल्का अपराध है।