भारत की सुरक्षा पर संकट: आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ अमित शाह की लड़ाई

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,24 मार्च।
आतंकियों की बंदूकें दागने की कतार अब नजर नहीं आती। हमारे सैनिकों की शहादत और बलिदान अब राजनीतिक बहस का विषय बन चुके हैं, जिस पर विपक्षी नेता सवाल उठा रहे हैं। 80 दिनों में 113 नक्सली कैसे मारे गए? सुहिला को क्यों बख्शा गया? ये और ऐसे ही कई सवाल राज्यसभा में उठाए गए, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया और सबको चौंका दिया। इस बीच, हम देखेंगे कि मात्र 80 दिनों में 113 नक्सली कैसे मारे गए।

आइए शुरू करते हैं भारत के गृह मंत्री अमित शाह से, जो हमेशा देश की सुरक्षा से जुड़े ऐसे फैसले लेते हैं जो सभी को हैरान कर देते हैं। लेकिन कुछ लोग बेवजह की बयानबाजी करने और सरकार के काम में बाधा डालने की आदत से बाज नहीं आते। इस बार, जब अमित शाह ने राज्यसभा में भाषण दिया, तो विपक्ष भी स्तब्ध रह गया। उन्होंने देश की सुरक्षा पर बोलते हुए बताया कि पिछले 10 वर्षों में भारत ने आतंकवाद से निपटने की अपनी नीति में बदलाव किया है। उन्होंने पाकिस्तान में की गई सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र किया और बताया कि कश्मीर में आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में हो रही हिंसा जैसे कई मुद्दों को प्रभावी तरीके से काबू किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है, जो पहले की सरकारों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि वे वोट बैंक की राजनीति के चलते ठोस कदम उठाने से बचती थीं। अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया, “एक देश में दो कानून” की अवधारणा को समाप्त किया और यह भी बताया कि पिछली सरकारें आतंकवादी हमलों को लेकर गंभीर नहीं थीं। उन्होंने कहा, “अब लाल चौक पर तिरंगा शान से लहराता है, जहां पहले आतंकवादी रैलियां करते थे। आज आतंकियों को उन्हीं जगहों पर ढेर किया जा रहा है, जहां वे कभी सभा किया करते थे।” अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार के 7025 दिनों के शासनकाल में कश्मीर में एक भी बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ और अब वहां निवेश-अनुकूल माहौल बना हुआ है। आज वहां सामान्य स्थिति है, चुनाव बिना किसी हमले के शांति से संपन्न हो रहे हैं।

अमित शाह ने यह भी जोर देकर कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पहले की सरकारें राजनीतिक कारणों से ठोस कार्रवाई नहीं करती थीं, लेकिन अब न केवल आतंकवादियों का सफाया किया जा रहा है, बल्कि उनके समर्थकों को भी खत्म किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले आतंकियों के रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियां और अन्य सुविधाएं मिलती थीं, लेकिन अब उन्हें इनसे हटा दिया गया है।

नक्सलवाद के मुद्दे पर भी अमित शाह का स्पष्ट रुख था। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की समय सीमा तय कर दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर केवल 12 रह गई है। सरकार की कोशिशों ने नक्सलवाद की कमर तोड़ दी है और उनके समर्थकों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। सुरक्षा बलों ने नक्सली इलाकों में सड़कें बनाई हैं, वहां मोबाइल नेटवर्क पहुंचाया है और आदिवासी युवाओं को सुरक्षा बलों में भर्ती कराया है, जिससे विकास को बढ़ावा मिला है।

अमित शाह ने यह भी कहा कि विपक्ष नक्सलवाद को राजनीतिक चश्मे से देखता रहा, जबकि सरकार इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने छत्तीसगढ़ में हाल ही में हुई घटनाओं का जिक्र किया, जहां 80 दिनों में 113 नक्सलियों को मार गिराया गया, कई गिरफ्तार किए गए और कई ने आत्मसमर्पण किया। उन्होंने विशेष रूप से बीजापुर और कांकेर में सुरक्षा बलों के शानदार प्रदर्शन की सराहना की।

बस्तर में बड़ी सफलता मिली, जहां सुरक्षा बलों ने स्वतंत्र ऑपरेशनों में कम से कम 30 माओवादियों को मार गिराया। हालांकि, इस अभियान में एक जवान शहीद हो गया। यह एक बड़ी कार्रवाई थी, जिसमें कई सुरक्षा एजेंसियां शामिल थीं। डिस्ट्रीक्ट रिजर्व गार्ड (DRG), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और विशेष कमांडो टीमों ने खुफिया जानकारी के आधार पर इन ऑपरेशनों को अंजाम दिया।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी कहा कि शहीद जवान का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन एक योजनाबद्ध तरीके से किया गया और सुरक्षा बलों को स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर सफलता मिली। यह अमित शाह के नेतृत्व में बनाई गई रणनीति का प्रमाण है, जो नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की दिशा में गंभीर प्रगति कर रही है।

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