समग्र समाचार सेवा
अहमदाबाद,1 अप्रैल। कभी जिन गांवों में कच्चे मकान और संकरी गलियां हुआ करती थीं, आज वहां पक्के और आलीशान मकान खड़े हैं। खेतों में काम करने वाले किसान अब लग्जरी कारों में घूमते नजर आ रहे हैं। यह बदलाव किसी चमत्कार से कम नहीं, बल्कि भारत के पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की देन है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के तहत भूमि अधिग्रहण से कई गांवों की तस्वीर बदल गई है। परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले किसानों को अच्छी खासी रकम मिली, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई।
गुजरात और महाराष्ट्र के जिन गांवों से यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर गुजर रहा है, वहां के किसानों ने मुआवजे में मिली राशि का भरपूर उपयोग किया। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा के कई गांवों में किसानों ने पुराने कच्चे मकानों को तोड़कर भव्य बंगले बना लिए हैं।
अधिग्रहण से पहले जिन परिवारों की गिनती मध्यमवर्गीय या निम्न आय वर्ग में होती थी, वे अब संपन्न लोगों की सूची में शामिल हो गए हैं।
अहमदाबाद के निकट एक गांव के किसान रमेश पटेल को बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत उनकी जमीन के बदले करोड़ों रुपये मिले। पहले वह एक छोटे से घर में रहते थे और पुरानी बाइक से सफर करते थे, लेकिन अब उनके पास एक शानदार बंगला, एसयूवी और ट्रैक्टर है। उन्होंने अपने बच्चों को बड़े निजी स्कूलों में दाखिला दिलाया और खेती के बजाय बिजनेस में हाथ आजमाने लगे।
गांवों में अचानक आए इस आर्थिक उछाल का असर स्थानीय बाजारों पर भी दिख रहा है। कई डीलरों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में महंगी गाड़ियों की बिक्री तेजी से बढ़ी है। सूरत और वडोदरा के आसपास कई ऐसे गांव हैं जहां बीएमडब्ल्यू, ऑडी और मर्सिडीज जैसी गाड़ियां दिखाई देने लगी हैं।
बुलेट ट्रेन परियोजना से सिर्फ किसानों को ही फायदा नहीं हुआ, बल्कि इसने रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। कई छोटे व्यवसायी होटल, ढाबे और अन्य सर्विस सेक्टर से जुड़े व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। निर्माण कार्यों में भी स्थानीय लोगों को नौकरियां मिल रही हैं।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अचानक मिली संपत्ति का सही प्रबंधन नहीं किया गया तो यह समृद्धि स्थायी नहीं रह पाएगी। कुछ मामलों में देखा गया कि लोग बिना सोचे-समझे पैसे खर्च कर रहे हैं, जिससे भविष्य में आर्थिक दिक्कतें आ सकती हैं।
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने गांवों की किस्मत बदल दी है और किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव लाया है। जहां एक ओर यह प्रगति और आधुनिकता का प्रतीक है, वहीं यह भी जरूरी है कि किसान और स्थानीय लोग इस अवसर का सही उपयोग करें, ताकि उनकी खुशहाली लंबे समय तक बनी रहे।