आपदा में अवसर… इन दो सेक्टर्स की तो निकल पड़ी, अब भारत को दिखाना होगा दम!

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समग्र समाचार सेवा
वॉशिंगटन/नई दिल्ली,3 अप्रैल।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और 2024 के संभावित रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाने की योजना बनाई है। अगर वह दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं, तो चीन समेत कई देशों से आयातित वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव ला सकते हैं। हालांकि, इस फैसले से कुछ देशों को झटका लगेगा, लेकिन भारत के लिए यह ‘आपदा में अवसर’ साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दो सेक्टर्स – टेक्सटाइल और फार्मा इससे सबसे ज्यादा फायदा उठा सकते हैं। इन सेक्टर्स के लिए अमेरिका की बढ़ती टैरिफ नीतियां भारतीय उत्पादों के लिए बाजार के नए रास्ते खोल सकती हैं।

ट्रंप प्रशासन की संभावित नीति चीन के टेक्सटाइल सेक्टर को झटका दे सकती है। अमेरिका में चीन से कपड़ा आयात महंगा हो जाएगा, जिससे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश शुरू होगी।

भारत, बांग्लादेश और वियतनाम इस मौके का फायदा उठा सकते हैं।
 भारतीय हथकरघा और ऑर्गेनिक कपड़ों की अमेरिका में पहले से ही अच्छी मांग है।
 भारत सरकार की पीएलआई (Production Linked Incentive) स्कीम इस अवसर को और मजबूत कर सकती है।

भारत के टेक्सटाइल निर्यातकों के लिए यह सुनहरा अवसर है, बशर्ते वे तेजी से अमेरिकी बाजार पर फोकस करें।

अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च को देखते हुए, वहां सस्ती दवाओं की मांग बढ़ रही है। अभी तक अमेरिका अपनी दवाओं के लिए चीन पर निर्भर था, लेकिन अगर टैरिफ बढ़ा तो भारत के फार्मा सेक्टर के लिए रास्ते खुल सकते हैं।

भारत पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा जेनेरिक दवा निर्माता है।
 भारतीय कंपनियां कम लागत वाली हाई-क्वालिटी मेडिसिन्स बनाती हैं, जो अमेरिकी बाजार के लिए फायदेमंद हैं।
 अगर चीन पर टैरिफ बढ़ता है, तो अमेरिका भारत की ओर तेजी से रुख कर सकता है।

अगर भारतीय कंपनियां अमेरिका में एफडीए अप्रूवल वाली दवाओं की आपूर्ति बढ़ाती हैं, तो वे इस मौके का पूरा फायदा उठा सकती हैं।

अगर ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी लागू होती है, तो भारत को इसे भुनाने के लिए पहले से तैयार रहना होगा। इसके लिए:

निर्यात नीति में तेजी से सुधार करना होगा।
अमेरिकी कंपनियों के साथ लॉन्ग-टर्म डील्स करनी होंगी।
मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा।

ट्रंप की संभावित टैरिफ नीति चीन के लिए चुनौती बन सकती है, लेकिन भारत के लिए यह ‘गोल्डन चांस’ साबित हो सकती है। अगर भारत की टेक्सटाइल और फार्मा इंडस्ट्री इस मौके का सही इस्तेमाल करती हैं, तो यह निर्यात बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने का बेहतरीन अवसर बन सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या भारत इस मौके का पूरा फायदा उठा पाएगा?

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