समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,5 अप्रैल। अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी की संभावनाओं के बीच बाजारों में एक बार फिर बेचैनी महसूस की जा रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में दिए गए एक बयान—“अभी मेरा काम पूरा नहीं हुआ है”—ने वैश्विक निवेशकों और आर्थिक विश्लेषकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। यह कथन न केवल उनकी संभावित चुनावी रणनीति की ओर इशारा करता है, बल्कि बाजारों में अस्थिरता की आशंका को भी हवा दे रहा है।
2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों की सरगर्मियों के बीच ट्रंप का यह बयान उनके समर्थकों में जोश भरने वाला है, लेकिन वैश्विक निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के लिए यह एक सतर्कता संकेत है। ट्रंप के पहले कार्यकाल में देखा गया था कि कैसे उनकी नीतियों, खासकर व्यापार युद्धों, अप्रत्याशित फैसलों और विदेश नीति में आक्रामक रुख ने शेयर बाजारों, कच्चे तेल, मुद्रा विनिमय और निवेश प्रवाह को हिला कर रख दिया था।
अब जब वे दोबारा सत्ता में लौटने की तैयारी कर रहे हैं, निवेशकों को डर सता रहा है कि कहीं फिर से वही अस्थिरता न लौट आए।
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व्यापार युद्ध की वापसी का डर:
ट्रंप चीन, यूरोप और अन्य देशों के साथ व्यापार संतुलन को लेकर आक्रामक रुख अपनाते रहे हैं। यदि वे लौटते हैं, तो फिर से टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों का दौर शुरू हो सकता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। -
डॉलर की अनिश्चितता:
ट्रंप अक्सर फेडरल रिजर्व पर दबाव बनाते रहे हैं। उनके बयानों से डॉलर की अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं जैसे भारत पर भी असर पड़ सकता है। -
भूराजनैतिक तनाव:
ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका की विदेश नीति अधिक “अमेरिका फर्स्ट” पर आधारित रही है। नाटो, संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक गठबंधनों के प्रति उनका दृष्टिकोण निवेशकों को असहज कर सकता है।
हाल ही में अमेरिकी शेयर बाजारों में हल्की गिरावट देखी गई, जबकि एशियाई बाजारों में भी अनिश्चितता बनी हुई है। निवेशकों ने गोल्ड और बॉन्ड्स जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। वॉल स्ट्रीट पर ट्रंप की वापसी की संभावना को लेकर लगातार विश्लेषण जारी है।
भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए अमेरिकी राजनीतिक स्थिरता बेहद जरूरी है। ट्रंप की नीतियों ने पहले भी H1B वीजा से लेकर ट्रेड डील तक भारत को प्रभावित किया था। यदि वे दोबारा राष्ट्रपति बने, तो निवेशकों को भारत में एफडीआई और आईटी निर्यात को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का “मिशन अधूरा” वाला बयान जितना राजनीतिक है, उतना ही आर्थिक संकेत भी देता है। निवेशकों की चिंता स्वाभाविक है—क्योंकि जब सत्ता में अनिश्चितता होती है, बाजार अपनी सांसें थाम लेता है। अब यह देखना होगा कि आने वाले महीनों में अमेरिकी राजनीति किस दिशा में जाती है और निवेशक उस पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।