प्राइवेट छोड़ सरकारी स्कूलों की ओर बढ़े कदम: तेलंगाना के बाबापुर गांव ने पेश की अनूठी मिसाल

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समग्र समाचार सेवा
हैदराबाद, ९ जून: शिक्षा के व्यवसायीकरण और प्राइवेट स्कूलों की भारी-भरकम फीस के दौर में तेलंगाना के एक छोटे से गांव ने पूरे देश के सामने एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। राज्य के निर्मल जिले के लक्ष्मणाचंदा मंडल में स्थित ‘बाबापुर’ गांव के निवासियों ने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि वे अब अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों में भेजने के बजाय स्थानीय सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे।

यह ऐतिहासिक निर्णय किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे गांव का सामूहिक संकल्प है। हाल ही में बाबापुर ग्राम पंचायत में ग्रामीणों, जिनमें मुख्य रूप से किसान वर्ग शामिल हैं, के बीच शिक्षा के भविष्य को लेकर गहन चर्चा हुई। इस बैठक के बाद एक औपचारिक प्रस्ताव (Resolution) पारित किया गया। प्रस्ताव के तहत गांव के सभी बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में कराना अनिवार्य माना गया है। ग्रामीणों का दृढ़ विश्वास है कि सरकारी स्कूल बच्चों को बेहतरीन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में पूरी तरह सक्षम हैं।

गांव की सरपंच पडिगेला लक्ष्मी ने इस मुहिम की सराहना करते हुए कहा, “बच्चों और हमारे गांव दोनों के सर्वांगीण विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबसे जरूरी है। जब सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ेगी, तो वहां की व्यवस्थाएं और मजबूत होंगी। इसके साथ ही स्कूलों का विकास भी तेजी से होगा।” सरपंच ने सरकारी स्कूल के शिक्षकों के लंबे अनुभव और उनकी योग्यता पर भी भरोसा जताया। उन्होंने रेखांकित किया कि दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने में सरकारी स्कूलों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

बाबापुर गांव के इस साहसिक और जागरूक कदम की शिक्षाविदों, समाजसेवियों और स्थानीय प्रशासन द्वारा जमकर सराहना की जा रही है। जानकारों का कहना है कि यह पहल न केवल तेलंगाना के अन्य गांवों के लिए एक आदर्श मॉडल बनेगी, बल्कि देश भर में सरकारी शिक्षा प्रणाली पर जनता का भरोसा बहाल करने में मदद करेगी। ग्रामीणों का यह फैसला साफ संदेश देता है कि यदि समुदाय मिलकर प्रयास करे, तो सार्वजनिक और सरकारी संस्थाओं को फिर से जीवंत और मजबूत बनाया जा सकता है।

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