सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल हुई खासी और गारो भाषाएं
२०२६-२७ शैक्षणिक सत्र से वैकल्पिक तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाई का अवसर
- सीबीएसई भाषा पाठ्यक्रम में जोड़ी गईं खासी और गारो भाषाएं।
- २०२६-२७ शैक्षणिक सत्र से स्कूल इन्हें वैकल्पिक तीसरी भाषा के रूप में पढ़ा सकेंगे।
- उत्तर-पूर्व की क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में बड़ा कदम।
समग्र समाचार सेवा
असम, २४ मई: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने खासी और गारो भाषाओं को अपने भाषा पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत, २०२६-२७ शैक्षणिक सत्र से सीबीएसई से संबद्ध स्कूल इन दोनों भाषाओं को छात्रों के लिए वैकल्पिक तीसरी भाषा (Optional Third Language) के रूप में पेश कर सकेंगे।
इस कदम को उत्तर-पूर्व की क्षेत्रीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से मेघालय के खासी और गारो समुदायों की मातृभाषा को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली के भीतर अधिक मान्यता देने में यह सकारात्मक भूमिका निभाएगा।
शिक्षाविदों के अनुसार, सीबीएसई के इस फैसले से स्थानीय भाषाओं के प्रति छात्रों की रुचि बढ़ेगी और भाषाई विविधता को भी मजबूती मिलेगी। नई शिक्षा व्यवस्था में क्षेत्रीय भाषाओं का स्थान मजबूत करने की दिशा में इसे एक उल्लेखनीय निर्णय माना जा रहा है।