Author: Smgrabharat

  • वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन: लोकसभा में पेश होगा नया विधेयक

    वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन: लोकसभा में पेश होगा नया विधेयक

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली,8अगस्त। गुरुवार यानी आज लोकसभा में वक्फ बोर्ड से जुड़े कानून में संशोधन के लिए एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया जाएगा। इस विधेयक पर सदन में विस्तार से चर्चा होगी और इसके विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    विधेयक के मुख्य प्रावधान

    इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

    1. अधिकारों में कमी: वक्फ बोर्ड के अधिकारों में कुछ कमी की जाएगी ताकि पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सके।
    2. गैर-मुसलमानों का प्रवेश: विधेयक में गैर-मुसलमानों को वक्फ बोर्ड के प्रशासन में शामिल करने का प्रावधान भी है।
    3. अलग-अलग बोर्ड: शिया, सुन्नी, अहमदिया, और आगा खानी समुदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड बनाने का प्रस्ताव है ताकि सभी समुदायों की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।

    विधेयक पर प्रतिक्रिया

    विधेयक को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ संगठनों का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाएगा और भ्रष्टाचार को कम करेगा, जबकि कुछ अन्य का कहना है कि यह अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों पर हमला है।

    विधेयक की आवश्यकता

    सरकार का तर्क है कि वर्तमान वक्फ बोर्ड कानून में कई खामियां हैं जो संपत्तियों के सही प्रबंधन में बाधा बनती हैं। भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्तियों की समस्याओं को दूर करने के लिए यह संशोधन आवश्यक है। इसके अलावा, अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग बोर्ड बनाने से उनके धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान होगा।

    विधेयक की चुनौतियाँ

    विधेयक पर सदन में चर्चा के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विपक्षी दलों का कहना है कि गैर-मुसलमानों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने का प्रावधान अल्पसंख्यकों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसके अलावा, शिया, सुन्नी, अहमदिया, और आगा खानी समुदायों के लिए अलग-अलग बोर्ड बनाने से समुदायों के बीच तनाव बढ़ सकता है।

    निष्कर्ष

    वक्फ बोर्ड कानून में संशोधन का यह विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम है जिसे सदन में विस्तार से चर्चा के बाद ही पारित किया जा सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि विभिन्न राजनीतिक दल और धार्मिक संगठन इस विधेयक पर क्या रुख अपनाते हैं। उम्मीद है कि इस विधेयक के माध्यम से वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों को लाभ होगा।

  • बांग्लादेश में स्टूडेंट प्रोटेस्ट: एक राजनैतिक भूचाल

    बांग्लादेश में स्टूडेंट प्रोटेस्ट: एक राजनैतिक भूचाल

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली,8अगस्त। बांग्लादेश में हाल ही में स्टूडेंट प्रोटेस्ट ने एक ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया। छात्रों द्वारा शुरू किया गया यह आंदोलन धीरे-धीरे इतना बड़ा हो गया कि प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा और देश छोड़ना पड़ा।

    प्रोटेस्ट की शुरुआत

    यह प्रोटेस्ट शुरू हुआ था बांग्लादेश में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के खिलाफ। छात्रों ने सड़कों पर उतर कर सुरक्षित सड़कों और ट्रैफिक नियमों के सख्ती से पालन की मांग की। इनका कहना था कि सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण सड़कों की हालत खस्ता है, जिससे आम नागरिकों की जान जोखिम में है।

    प्रोटेस्ट का विस्तार

    प्रोटेस्ट धीरे-धीरे सिर्फ सड़क सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा। छात्रों ने भ्रष्टाचार, सरकारी नीतियों और न्याय की मांग को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी। यह आंदोलन सोशल मीडिया पर भी तेज़ी से फैला और लाखों छात्रों ने इसमें भाग लिया।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    शुरुआत में सरकार ने छात्रों की मांगों को नजरअंदाज किया। लेकिन जब प्रोटेस्ट बढ़ता गया, तो सरकार ने इसे दबाने की कोशिश की। पुलिस और सरकारी एजेंसियों ने आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।

    शेख हसीना का इस्तीफा

    स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा। देश में उत्पन्न अस्थिरता और विदेशी दवाब के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया और देश छोड़ दिया। खबरों के अनुसार, उन्होंने राजनीतिक शरण के लिए ब्रिटेन और अमेरिका से संपर्क किया, लेकिन उन्हें वहां से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। अब उनकी नजर रूस, फिनलैंड, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों पर है, जहां वे शरण ले सकती हैं ।

    भविष्य की ओर

    बांग्लादेश अब एक नए राजनीतिक दौर में प्रवेश कर रहा है। यह देखना होगा कि नई सरकार कैसे इन मुद्दों को सुलझाती है और छात्रों की मांगों को किस हद तक पूरा करती है। इस प्रोटेस्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता अब जागरूक है और अपने अधिकारों के लिए लड़ने को तैयार है।

    यह घटना सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। लोकतंत्र में जनता की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता।

  • असम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने किया मंत्रिमंडल में फेरबदल

    असम मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने किया मंत्रिमंडल में फेरबदल

    पूनम शर्मा 

    समग्र समाचार सेवा

    गुवाहाटी,18 जून.असम के मुख्यमंत्री हिमंत विस्वा शर्मा ने अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल किया.फेरबदल की वजह उनके एक मंत्री शुक्ल वैद्य का लोक सभा के लिए निर्वाचित होना हैं.मुख्यमंत्री सरमा अब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का कार्य खुद देखेंगे। स्वास्थ्य विभाग पहले केशव महंत के पास था. महंत को पूर्व मंत्री परिमल शुक्ल वैद्य के विभाग भी सौंपे गये हैं। शुक्ल वैद्य सिलचर सीट से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं।

    शुक्ल वैद्य पहले स्वास्थ्य विभाग के मंत्री थे

    एक सरकारी अधिसूचना के अनुसार,  भाजपा की सहयोगी दल असम गण परिषद के केशव महंत के पास 2021 से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग था। महंत को परिवहन, आबकारी एवं मात्स्यिकी विभाग सौंपे गये हैं जिनका कामकाज पहले शुक्लवैद्य संभालते थे। ये विभाग महंत के पास पहले से मौजूद विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अतिरिक्त हैं।

    शुक्ल वैद्य ने मंत्री पद से दिया इ्स्तीफा

    अनुसूचित जाति के परिमल शुक्ल वैद्य ने सिलचर संसदीय सीट से निर्वाचित होने के बाद राज्य के मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है,जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अलावा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के पास गृह, कार्मिक, लोक निर्माण, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, मूलनिवासी एवं आदिवासी आस्था एवं सांस्कृतिक विभाग (पुस्तकालय एवं संग्रहालय निदेशालय एवं पुरातत्व निदेशालय को छोड़कर) बने रहेंगे। उनके पास वे विभाग भी रहेंगे जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किये गये हैं।

    असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के  कार्यकाल में हिमंत सरमा स्वास्थ्य मंत्री थे.तब उन्होंने जन हित के कई ऐसे कार्य किये थे,जिसे असम की जनता आज भी याद करती हैं.स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर हिमंत ने जांच सुविधाएं समेत स्वास्थ्य की कई सुविधाओं को आधुनिक बनाना, मरीजों के सामने आ रही परेशानियां दूर करना, कोरोना संकट काल के मद्देनजर लॉकडाउन में राज्य के बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों की मदद करने एवं कोविड-19 संकट से निपटने के लिए भी कई  बेहतर कदम उठाए थे।

     

     

  • मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल से दिल्ली में मुलाकात

    मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल से दिल्ली में मुलाकात

     समग्र समाचार  सेवा 

    नई दिल्ली,18 जून,राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने  नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल से शिष्टाचार मुलाकात की। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री श्री  पाटील को राजस्थान में जल जीवन मिशन व ‘पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना’ (ERCP) की प्रगति व क्रियान्वयन को लेकर जानकारी दी व प्रदेश से जुड़े अन्य विकासोन्मुख विषयों पर सकारात्मक चर्चा की।

  • रेल दुर्घटनाओ पर राजनीति:विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने

    रेल दुर्घटनाओ पर राजनीति:विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने

    कुमार राकेश

    नई दिल्ली .18 जून.पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन के पास हुई रेल दुर्घटना के बाद से विपक्षी दल और सत्ता पक्ष आमने सामने हैं.हलांकि विपक्षी दलों पर ऐसे अतिसंवेदनशील मसलो पर राजनीति नहीं करनी चाहिए.क्योकि कोई भी सरकार जानबूझकर किसी भी दुर्घटनाओ को अंजाम नहीं देती.ये एक ऐसी गलती है जिसपर लोकहित में सभी दलों को एकजुट होकर एक ठोस समाधान पर चिन्तन-मनन करना चाहिए.

     

    जहाँ तक रेल दुर्घटनाओ की बात हैं उसे व्यवस्था को अभी बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण की आवश्यकता हैं.मौजूदा प्रधनामंत्री मोदी की एनडीए सरकार उस नीति पर काम भी कर रही हैं .

    अभी हाल में पश्चिम बंगाल में  कंचनजंगा एक्सप्रेस को एक मालगाड़ी ने पीछे से टक्कर मार दी थी जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए थे।विपक्षी दल अपनी संवेदनाओ के बजाय उलटे मोदी सरकार को दोषी बता रहे हैं.

    विपक्षी दलों का दावा हैं कि मौजूदा सरकार में रेल दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। हालांकि, रेल मंत्रालय के सूत्रों ने विपक्ष के दावों को गलत बताया है।

    रेल दुर्घटनाये -एनडीए बनाम यूपीए(अब इंडी गठबंधन) सरकार

    रेल मंत्रालय के  सूत्रों का दावा है कि मोदी सरकार में रेल दुर्घटनाएं कांग्रेस गठबंधन की सरकार के मुकाबले कम हो रही है। आंकड़ो के अनुसार- कांग्रेस गठबंधन की सरकार में 2004-14 के दौरान परिणामी ट्रेन दुर्घटनाओं की औसत संख्या 171 प्रति वर्ष थी। वहीं, दूसरी ओर मोदी सरकार में 2014-23 के दौरान परिणामी ट्रेन दुर्घटनाओं की औसत संख्या घटकर 71 प्रति वर्ष हो गई है।ये भी एक रिकॉर्ड हैं .मौजूदा सरकार रेल दुर्घटनाओ के रोकथाम के लिए कई नए उपायों पर बल दिया हैं.

    कम हो रही रेल दुर्घटनाएं की वजह

    रेल मंत्रालय का दावा है इसके पीछे रेलवे का कुशल प्रबंधन और कई प्रकार के अत्याधुनिक उपाय हैं  जिससे ऐसे  हादसों में कमी आयी है। मंत्रालय का दावा है कि करीब 45,000 करोड़ की राशि मानवीय विफलता के कारण होने वाली दुर्घटना को खत्म करने के लिए अब तक खर्च किए जा चुके हैं।

    आंकड़ों के अनुसार-अक्टूबर 2023 तक 6498 स्टेशनों पर पॉइंट और सिग्नल के केंद्रीकृत संचालन के साथ इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम प्रदान किए गए हैं। इसके साथ एलसी गेटों पर सुरक्षा बढाया गया है,उसके तहत  31 अक्टूबर 2023 तक 11 हजार 137 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेटों की इंटरलॉकिंग प्रदान की गई है।

     

     

  • बिहार सरकार की नौकरशाही में बड़ा फेरबदल

    बिहार सरकार की नौकरशाही में बड़ा फेरबदल

    कुमार राकेश

    समग्र समाचार सेवा

    पटना.18 जून .बिहार सरकार ने गुरुवार को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक समेत 9 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में फेरबदल किया गया। पाठक का कार्यकाल विवादों में रहा था। 1990 बैच के आईएएस अधिकारी पाठक फिलहाल छुट्टी पर हैं.वापस लौटने पर वह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कार्यभार संभालेंगे। वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चहेते अधिकारी माने जाते रहे हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पाठक दीपक कुमार सिंह (1992 बैच के आईएएस अधिकारी) की जगह लेंगे, जिन्हें ग्रामीण कार्य विभाग में भेजा गया है।

     

    पाठक बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बीआईपीएआरडी) के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे। उनके  अलावा एस सिद्धार्थ (अपर मुख्य सचिव, कैबिनेट सचिवालय) शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। सिद्धार्थ 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। 1995 बैच के आईएएस अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी को गृह विभाग का नया प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है।

     

    2002 बैच के आईएएस अधिकारी पंकज कुमार पाल को ग्रामीण विकास विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया है। समाज कल्याण विभाग के निदेशक राज कुमार,2010 बैच के आईएएस अधिकारी, को भोजपुर जिले का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा 2015 बैच के आईएएस अधिकारी प्रशांत कुमार सीएच को समाज कल्याण विभाग का नया निदेशक नियुक्त किया गया है।

  • झारखंड सरकार में कई बड़े पुलिस अधिकारी किये गए इधर-उधर

    झारखंड सरकार में कई बड़े पुलिस अधिकारी किये गए इधर-उधर

     कुमार राकेश

    समग्र समाचार सेवा

    रांची.18 जून.झारखंड नौकरशाही में कई फेरबदल किये गए हैं. चार आईपीएस का तबादला किया गया है। 18 जून को को प्रदेश सरकार के  अधिसूचना के अनुसार, 2005 बैच के आईपीएस क्रांति कुमार गड़देशी को दुमका का जोनल आईजी बनाया गया है, जबकि 2006 बैच की आईपीएस और दुमका में जोनल आईजी के तौर पर पदस्थापित रहीं ए. विजयलक्ष्मी अब रांची में आईजी (ट्रेनिंग) होगी.

     

    झारखंड आर्म्ड फोर्स-वन के कमांडेंट के रूप में कार्यरत 2011 बैच के आईपीएस अजीत पीटर डुंगडुंग को देवघर का एसपी बनाया गया है। इसके अलावा वह झारखंड आर्म्ड फोर्स-5 के कमांडेंट के भी अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे। देवघर एसपी के रूप में पोस्टेड 2017 बैच के आईपीएस राकेश रंजन को स्थानांतरित करते हुए झारखंड आर्म्ड पुलिस-वन के कमांडेंट के रूप में पदस्थापित किया गया है।

  • दिल्ली में पेय जल संकट से अब वीआईपी आवासीय क्षेत्र भी  बुरी तरह प्रभावित

    दिल्ली में पेय जल संकट से अब वीआईपी आवासीय क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित

    समग्र समाचार सेवा 

    नई दिल्ली,18 जून .चिलचिलाती गर्मी और ऊपर से पानी का संकट ने देश की राजधानी दिल्ली में रहने वालों का जीना मुहाल कर दिया है। दिल्ली में लगातार जल संकट गहराता जा रहा है। जल संकट की वजह से दिल्ली सरकार ने पानी की आपूर्ति में भी भारी कटौती कर दी है, जिसकी वजह से लोगों की समस्याएं और भी अधिक बढ़ती चली जा रही है। दिल्ली सरकार दोषारोपण की राजनीति में व्यस्त हैं,वैसे नई दिल्ली नगरपालिका परिषद्  ने कुछ वीआईपी इलाकों के लिए एक एडवाइजरी जारी कर लोगो को पेय जल संकट को लेकर सचेत किया हैं .

    नई दिल्ली नगरपालिका परिषद्  ने जारी किया एडवाइजरी 

    राजधानी के कई इलाकों में जितने टैंकरों से पानी की आपूर्ति किया जा  रहा था उसको भी अब आधा कर दिया गया है। इसका कारण टैंकर की कमी बताई जा रही है, जिसके कारण पेय जल आपूर्ति में  परेशानी आ रही है। इसी बीच अब, केन्द्रीय दिल्ली के  इलाके में भी पानी की कमी को लेकर अलर्ट जारी हुआ है। परिषद्  ने वाटर सप्लाई को लेकर अब एक एडवाइजरी जारी की है, जिसके मुताबिक दिल्ली के वीआईपी इलाकों में भी अब एक टाइम ही पानी आएगा। परिषद्  इलाके में 40% पानी की कमी हो गई है। जानकारी के मुताबिक,दिल्ली  जलबोर्ड से पूरा पानी नहीं मिल रहा है। दिल्ली में प्रति दिन 916 MGD पानी का उत्पादन हो रहा है। दिल्ली को हरदिन तकरीबन 1000 MGD पानी की जरूरत है। साथ ही वीवीआईपी इलाकों में भी पानी की किल्लत है, यहां भी सिर्फ एक बार पानी आता है।

    वो इलाके जहां एक वक़्त  आएगा पानी

    अशोका रोड,पुराना किला रोड,फिरोजशाह मार्ग,बाबर रोड,बंगाली मार्केट,बाराखंबा रोड,हरिचंद माथुर लेन,कस्तूरबा गाँधी मार्ग,कोपरनिकस मार्ग,विंडसर प्लेस,कैनिंग लेन,तिलक रोड

    चाणक्यपुरी इलाके में ये है हाल

    वहीं, चाणक्यपुरी इलाके के संजय कैंप में सुबह 6:00 बजे से लोग अपना सारा काम धाम छोड़कर पानी के लिए लाइन में लगते हैं और 8:00 बजे एक पानी का टैंकर आता है जिसके बाद पानी के लिए लोग टूट पड़ते हैं। ये लोग पानी के लिए एक-दूसरे से मारामारी करते हुए अपना-अपना पाइप टैंकर के अंदर डालने के लिए जूझते हैं और वह 5 मिनट में टैंकर खाली हो जाता है। इस दौरान किसी को पानी मिल पाता है तो किसी को निराशा हाथ लगती है। वहीं, दूसरा टैंकर शाम को 4:00 बजे आएगा, तब तक जिन्हें पानी नहीं मिला उनकी जिंदगी कैसे कटेगी यह महसूस किया जा सकता है।

    आम लोग  ज्यादा  हो  रहे परेशान

    यहां ज्यादातर मजदूर रहते हैं लेकिन पानी की समस्या के कारण लोग परेशान है कि मजदूरी करने जाएं या पानी के लिए लाइन में लगे। यहां हर परिवार का एक व्यक्ति की ड्यूटी बनी हुई है कि सुबह 6 बजे पानी का डिब्बा और पाइप लेकर लाइन में लगना है। यह हालत इसलिए बन गए है कि दिल्ली सरकार ने पानी की सप्लाई में कटौती कर दी है। यहां पहले सुबह 2 टैंकर भेजे जा रहे थे, लेकिन अब मात्र एक ही टैंकर भेजा जा रहा है, जिसकी वजह से सभी लोगों को पानी नही मिल पा रहा है।दिल्ली सरकार पूरी व्यवस्था नहीं करके हरियाणा सरकार पर दोष मढा जा रहा हैं .

  • भाजपा में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा में हार के कारणों पर मंथन

    भाजपा में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा में हार के कारणों पर मंथन

    *रजत शर्मा

    उत्तर प्रदेश में खराब प्रदर्शन की वजह तलाशने के लिए भाजपा  में मंथन हो रहा है। इस मंथन में क्या सामने आया? लखनऊ भाजपा ऑफिस में गुरुवार से अलग-अलग अंचलों के उम्मीदवारों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठकें चल रही हैं। पिछले गुरुवार को अवध  के नेताओं की बैठक थी। शुक्रवार को  कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के उम्मीदवारों और पदाधिकारियों से पार्टी ने रिपोर्ट ली। कानपुर-बुंदेलखंड रीजन की 10 सीटों में बीजेपी सिर्फ 4 सीट ही जीत पाई है, जबकि अवध क्षेत्र की 16 सीटों में बीजेपी को सिर्फ 7 सीटों पर ही जीत मिली है। यूपी भाजपा के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और यूपी बीजेपी संगठन के दूसरे नेता इस मीटिंग में शामिल रहे। पहले उन पदाधिकारियों से बात की गई जिन्हें लोकसभा सीट की जिम्मेदारी संगठन ने दी थी। उसके बाद हारे हुए उम्मीदवारों से अकेले में बात की गई। हारे हुए उम्मीदवारों ने पार्टी के सामने खुलकर अपनी बात कही। बांदा से चुनाव हारे बीजेपी उम्मीदवार आरके सिंह पटेल ने कहा कि विपक्ष ने संविधान, आरक्षण वाला जो नैरेटिव खड़ा किया, जनता ने उस पर भरोसा कर लिया। पटेल ने इसकी वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि केवल विपक्ष अगर ये बातें कहता तो जनता शायद इस पर विश्वास न भी करती लेकिन बीजेपी के कई स्थानीय नेताओं ने विपक्ष के लिए खुलकर कैंपेन किया,उनके एजेंडे पर मुहर लगाई, पार्टी के साथ विश्वासघात किया।

    अपनों से ही धोखे का आरोप मोहनलालगंज के भाजपा उम्मीदवार कौशल किशोर भी लगा रहे हैं। कौशल किशोर 2014 और 2019 में मोहनलालगंज से चुनाव जीतते रहे। केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे लेकिन इस बार वह भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। कौशल किशोर ने कहा कि विपक्ष के संविधान और आरक्षण खत्म करने वाला नैरेटिव जनता पर चिपक गया। बीजेपी लीडरशिप अपनी बात समझाने में कामयाब नहीं हो पाई। उस पर पार्टी के अंदर के ही लोगों ने उन्हें चुनाव हरवाने का काम किया। यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष विजय पाठक ने कहा कि पार्टी इस हार से हताश नहीं है। इसी संगठन ने बीजेपी को यूपी में 10 से 73 तक पहुंचाया था। हार की वजह जानकर, उन्हें दूर करके पार्टी फिर से उत्तर प्रदेश में मजबूत होगी। बीजेपी ने 80 नेताओं की टास्क फोर्स बनाई गई है। दो सदस्यों वाली एक टीम 2 लोकसभा सीटों पर जाकर रिपोर्ट तैयार करेगी। हार की वजह तलाशने के लिए यूपी बीजेपी का संगठन तीन तरह की रिपोर्ट तैयार कर रहा है। पहली रिपोर्ट उम्मीदवार के फीडबैक के आधार पर, दूसरी लोकसभा सीटों पर गई टीम की रिपोर्ट और तीसरी मंडल स्तर पर तैयार करवाई गई रिपोर्ट। इन तीनों रिपोर्ट के आधार पर एक फाइनल रिपोर्ट तैयार होगी जिसे केंद्रीय नेतृत्व  को भेजा जाएगा। पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि चुनाव में भितरघात करने वालों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा। मीटिंग के बाद यूपी बीजेपी के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि यूपी की जनता ने जो फैसला दिया है उसे पार्टी स्वीकार करती है, गलतियों को सुधारा जाएगा।

    बीजेपी की सहयोगी पार्टी के नेताओं को भी इस बात की शिकायत है कि बीजेपी की स्थानीय इकाइयों  ने ठीक से काम नहीं किया, गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया। बलिया में दो दिन पहले ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि भाजपा के नेता-कार्यकर्ताओं ने उनके उम्मीदवार को हराने का काम किया। भाजपा के नेता दिखावा करते रहे। उन्होंने मोदी-योगी के निर्देश को भी नकार दिया। वे सामने से तो समर्थन का दावा करते रहे लेकिन पीछे से विपक्ष के उम्मीदवार का सपोर्ट किया। हालांकि आज ओम प्रकाश राजभर अपने बयान से पलट गए। उन्होंने कहा कि जो भी खबर चलाई जा रही है वो फेक न्यूज़ है। उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा, वो एनडीए के साथ हैं। उन्हें मोदी-योगी पर पूरा भरोसा है। ये सारी अफवाह विपक्ष ने फैलाई है। उत्तर प्रदेश मे भाजपा की सीटें कम क्यों हुईं, इसका विश्लेषण चुनाव विशेषज्ञ कई बार कर चुके हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि भाजपा  ने टिकट बांटते समय जातिगत समीकरणों का ध्यान नहीं रखा। अखिलेश यादव ने सिर्फ परिवार के 5 यादव लड़ाए, सिर्फ 4 मुसलमानों को टिकट दिया, और बाकी सीटों पर जाति के आधार पर वोट लेने वाले उम्मीदवारों को टिकट दिए। ये रणनीति काम कर गई। लेकिन आज जो विश्लेषण सामने आया, वह भाजपा के अपने हारने वाले उम्मीदवारों का विश्लेषण है, इसीलिए महत्वपूर्ण है। मोटे तौर पर तीन बातें सामने आईं। एक तो यूपी में भाजपा  ने भाजपा को हराया। पार्टी के अपने नेताओं ने अपने उम्मीदवारों को हरवाया। सबने सोचा 400 पार तो जाने वाले हैं, मोदी के नाम पर जीतने ही वाले हैं, एक दो सीटों पर हार गए तो क्या फर्क पड़ेगा। सबने अपने-अपने प्रतिद्वंदियों का हिसाब चुकता किया। नतीजा ये हुआ कि पार्टी की सीटें घटकर 33 पर आ गईं।

    400 पार के नारे का एक और नुकसान ये हुआ कि इसे राहुल और अखिलेश ने आरक्षण हटाने की मंशा से जोड़ दिया। बीजेपी के खिलाफ ये नैरेटिव चलाया। ये फेक था, गलत था, लेकिन बीजेपी इसे काउंटर करने में नाकाम रही। बीजेपी के अंदर के विश्लेषण का एक और पहलू ये है कि योगी आदित्यनाथ ने कम से कम 35 उम्मीदवारों के टिकट बदलने की सिफारिश की थी, लेकिन उसे किसी ने नहीं माना। बीजेपी ने 34 से ज्यादा ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिया जो लगातार तीसरी बार या उससे भी ज्यादा बार चुनाव मैदान में उतरे थे। इनमे से 20 चुनाव हार गए। बीजेपी को सबसे बड़ा सेटबैक लगा अयोध्या की सीट हारने का, और पार्टी के इंटरनल डिस्कशन में ये बात बार-बार आई कि जहां भव्य राम मंदिर बना, वह सीट बीजेपी कैसे हार गई? इसका विश्लेषण कोई सीक्रेट नहीं है। ये इन तीनों बातों पर आधारित है जो मैंने अभी-अभी आपको बताई। लल्लू सिंह को बदलने की बात की गई थी। अयोध्या के सारे नेता लल्लू सिंह के खिलाफ थे, आपसी झगड़े थे। जातिगत समीकरण बीजेपी के कैंडिडेट के, पूरी तरह खिलाफ थे। और इन सबके ऊपर, आरक्षण को हटाने का नैरेटिव। सबने मिलकर अयोध्या की सीट भी हरवा दी। तो ये कह सकते हैं कि बीजेपी का जो ओवरऑल एनालिसिस है। अयोध्या की सीट उसका एक बड़ा उदाहरण है। अब बीजेपी के लिए बड़ा चैलेंज तीन साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव हैं। अखिलेश यादव और उनकी पार्टी उत्साहित है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश है, बीजेपी इसे कैसे काउंटर करेगी? इस पर योगी आदित्यनाथ को मंथन करना रहेगा>

    महाराष्ट्र

    महाराष्ट्र में भी बीजेपी को इस बार लोकसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा है। 2019 में महाराष्ट्र में 23 सीटें जीतने वाली बीजेपी को इस बार चुनाव में सिर्फ 9 सीटें मिली हैं। इसलिए बीजेपी वहां पर भी हार की वजह तलाशने में जुट गई है। आज मुंबई में बीजेपी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के नेता देवेंद्र फडणवीस, प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अन्य नेता शामिल हुए। बावनकुले ने कहा कि महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा वोट शेयर बीजेपी को मिला है। कई जगह जीत-हार का अंतर बहुत कम वोटों का था लेकिन ये सच है कि महाराष्ट्र में बीजेपी को काफी कम सीटें मिली हैं और उसकी वजह सिर्फ एक ही है, कांग्रेस और महाविकास अघाड़ी के दूसरे दलों ने लोगों में झूठ फैलाया। कहा कि बीजेपी संविधान बदल देगी, दलितों-आदिवासियों का हक छीन लेगी, ये झूठ लोगों के दिमाग में बैठ गया और बीजेपी को इसी का नुकसान हुआ। महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में तो बस 4 महीने का समय बचा है। बीजेपी के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि क्या विधानसभा चुनाव शिंदे गुट और एनसीपी के साथ मिलकर लड़े या अलग लड़े? सवाल ये भी है कि अगर बीजेपी महायुति बनाकर चुनाव लड़ेगी तो सीटों का बंटवारा क्या होगा?क्योंकि खबर है कि बीजेपी ने उन 106 सीटों पर सर्वे कराना शुरु कर दिया है जहां उसे पिछले चुनावों में जीत मिली थी। अलायंस पार्टनर एकनाथ शिंदे बीजेपी के 400 पार वाले नारे पर सवाल उठा चुके हैं। एनसीपी भी केन्द्र की सरकार में शामिल नहीं हुई है। ये सब इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि आने वाले दो-तीन महीने महाराष्ट्र की सियासत में काफी एक्शन पैक्ड होंगे और कई नए चुनावी समीकरण देखने को मिल सकते हैं।

    हरियाणा

    महाराष्ट्र के साथ-साथ इस साल हरियाणा में भी विधानसभा चुनाव होना है। हरियाणा में भी बीजेपी को 2019 के मुकाबले इस बार आधी सीटें मिलीं। हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों में से 5 कांग्रेस ने जीतीं। इनमें अंबाला और सिरसा की सीटें भी शामिल हैं, जो दलितों के लिए आरक्षित हैं। सिरसा की सीट 2019 में बीजेपी की सुनीता दुग्गल ने जीती थीं। सुनीता IRS ऑफ़िसर थीं। 2014 में वो नौकरी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुईं और 2019 में चुनाव लड़कर संसद पहुंच गई थीं। हालांकि, इस बार बीजेपी ने उनको टिकट नहीं दिया। सिरसा में इस बार बीजेपी ने सुनीता दुग्गल की जगह कांग्रेस छोड़कर आए अशोक तंवर को टिकट दिया था। अशोक तंवर, कांग्रेस की कुमारी शैलजा से चुनाव हार गए। आज बीजेपी के नेताओं ने रोहतक में चुनाव के नतीजों का एनालिसिस किया। सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर अंबाला और सिरसा की रिज़र्व सीटें बीजेपी के हाथ से कैसे निकल गईं। रिव्यू मीटिंग में शामिल हरियाणा सरकार के मंत्री विश्वम्भर वाल्मीकि ने माना कि BJP से  उम्मीदवारों के चयन में गड़बड़ी हुई थी।  इस लोकसभा चुनाव में हरियाणा की दस सीटों पर बीजेपी का वोट परसेंट करीब 10 परसेंट तक घट गया है। ये बीजेपी के लिए अच्छे संकेत नहीं है, क्योंकि चुनाव में सिर्फ चार-पांच महीने का वक्त रह गया है। 9 साल तक मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले मनोहर लाल खट्टर केंद्र में मंत्री बन चुके हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को कुर्सी संभाले 4 ही महीने हुए हैं। बीजेपी का गठबंधन भी जेजेपी से टूट चुका है। हरियाणा के जाट वोटर का झुकाव भी कांग्रेस की तरफ दिख रहा है। एक साथ इतने मोर्चं पर लड़ना बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती है।

    *रजत शर्मा,भारत के वरिष्ठ पत्रकार हैं.सम्प्रति इंडिया टीवी के प्रधान संपादक और अध्यक्ष हैं-: www.indiatv.in

     

     

     

     

  • कही आप  डिप्रेशन के चपेट में तो नहीं है,इन लक्षणों से करे पहचान, एकमात्र दवा योगासन व ध्यान  

    कही आप  डिप्रेशन के चपेट में तो नहीं है,इन लक्षणों से करे पहचान, एकमात्र दवा योगासन व ध्यान  

    कुमार राकेश

    आजकल बड़ी संख्या में लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। जिंदगी की भागदौड़ में न खुद के लिए समय बचा है न दिमाग में शांति। ऐसे में तनाव और उससे जुड़ी बीमारियां परेशान करने लगती हैं। हालांकि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से डिप्रेशन का पता लगाया जा सकता है। जानिए कैसे?

    दिमाग को शांत करने और पॉजिटिव एटीट्यूड रखने वाले लोग तेजी से कम हो रहे हैं। एक स्टडी में देश के 35% लोगों ने ये माना कि वो निगेटिव इमोशंस की गिरफ्त में हैं। मतलब ये कि तरीका जो भी हो खुश रहना और खुश रखना सीखिए। काम के चक्कर में जो लोग दूसरों से कट जाते हैं वो लोग जल्दी डिप्रेशन की गिरफ्त में आ जाते हैं। हालांकि डिप्रेशन में पहुंचने का कोई फिक्स फॉर्मूला नहीं है। इसकी वजह कुछ भी हो सकती है। डिप्रेशन का पता लगाने के लिए तरह-तरह के साइंटिफिक तरीके भी ढूंढ़े जा रहे हैं। अब AI यानि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है।

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    AI बताएगा कहीं आप डिप्रेशन के शिकार तो नहीं?

    एक ऐसी ही कोशिश PGI लखनऊ ने AIIMS और IIT कानपुर की मदद से की है। इस एप में पहले कुछ सवाल पूछे जाते हैं और फिर वॉइस सैंपल और जवाबों के जरिए ये एसेस किया जाता है कि इंसान डिप्रेशन में है या नहीं? वैसे ये पता चलना और एक्सेप्ट कर लेना कि आप डिप्रेशन में हैं, आधी जीत है क्योंकि ज्यादातर मामलों में लोगों को पता ही नहीं होता है कि वो डिप्रेशन के शिकार हैं।

    डिप्रेशन से कैसे निकालें?

    अगर पता चल जाए तो डिप्रेशन का आसानी से इलाज किया जा सकता है। कई बार दवा की जरूरत होती है तो कई बार परिवार और दोस्तों की मदद से ही निकला जा सकता है। जिंदगी के प्रति नजरिया पॉजिटिव रखने से, नेचर के करीब जाने से, लोगों से बात करने से, वर्कआउट करने से और सुबह जल्दी उठने से डिप्रेशन को कम किया जा सकता है। योग भी और व्यायाम से हैप्पी हार्मोन्स डोपामाइन, सेरोटोनिन और एंडोर्फिन रिलीज होते हैं जानिए कैसे योगासन व ध्यान  से तनाव और डिप्रेशन को कम किया जा सकता है?

    WHO का अलर्ट

    जीवन से नाखुश हैं  35% भारतीय

    निगेटिव इमोशंस का सेहत पर खतरा

    गिरफ्त में 20 करोड़ से ज्यादा लोग

    हर 7 में से 1 को मेंटल डिसऑर्डर

    क्यों होता है डिप्रेशन?

    जीवन में कोई हादसा

    आर्थिक तंगी

    हार्मोनल चेंजेज

    मौसम में बदलाव

    डिप्रेशन के लक्षण

    रेटिना में बदलाव

    नींद नहीं आना

    बात-बात पर गुस्सा

    नज़र कमज़ोर होना

    पाचन खराब होना

    सिर और पेट में दर्द

    पर्सनैलिटी में करें ये बदलाव

    रोज वर्कआउट

    प्रॉपर रुटीन

    स्ट्रॉन्ग विल पावर

    प्रेशर में भी काम

    लक्ष्य तय होना

    आलस से दूर

    सेल्फ मोटिवेशन

    भरपूर एनर्जी

    खुलकर बात करना

    बदलाव के लिए तैयार रहना

    डिप्रेशन दूर करने के लिए योगासन

    सुखासन

    बालासन

    भुजंगासन

    सेतु बंधासन

    अनुलोम विलोम

    प्राणायाम करें

    साभार –indiatv.in