Author: Smgrabharat

  • आशा भोसले: दर्द से संजोया संगीत, संघर्षों से गढ़ी गई पहचान

    आशा भोसले: दर्द से संजोया संगीत, संघर्षों से गढ़ी गई पहचान

    पूनम शर्मा
    भारतीय संगीत जगत में आशा भोसले का नाम ऐसा है जिसे सुनते ही सुर, लय और मधुरता की दुनिया आँखों  के सामने उतर आती है। लेकिन इस चमकदार दुनिया के पीछे एक ऐसी दर्दनाक कहानी है, जो हाल ही में प्रकाशित हुई उनकी जीवनी ‘Asha Bhosle: A Life In Music’ में सामने आई है। इस किताब को राम्या शर्मा ने लिखा है और अमरिलिस (Manjul Publishing House की एक इम्प्रिंट) ने प्रकाशित किया है।

    पति के साथ दर्दनाक रिश्ता
    इस जीवनी का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा है आशा भोसले का अपने पहले पति गणपत राव भोसले के साथ रिश्ता। गणपत राव उनसे पूरे 20 साल बड़े थे। आशा जब महज़ 16 साल की थीं, तब उन्होंने इस रिश्ते में कदम रखा। उन्होंने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर यह विवाह किया, लेकिन यह कदम उनके जीवन को लंबे समय तक दर्द में डुबोने वाला साबित हुआ।

    किताब में आशा लिखती हैं, “परिवार बहुत रूढ़िवादी था और वे एक गायिका बहू को स्वीकार नहीं कर सकते थे। मेरे पति गुस्सैल थे। शायद उन्हें दूसरों को तकलीफ देना अच्छा लगता था। शायद वे एक सैडिस्ट थे।” उन्होंने बताया कि वह हमेशा पति का आदर करती रहीं, कभी विरोध नहीं किया, क्योंकि हिंदू धर्म में पत्नी का धर्म होता है पति की सेवा करना।

    आत्महत्या की कोशिश – जीवन का सबसे अंधकारमय मोड़
    आशा भोसले के जीवन की सबसे भावुक और तकलीफदेह घटना तब घटी जब वह चार महीने की गर्भवती थीं। उन्होंने बताया कि वह बीमार थीं और जिस अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया था, वहाँ  की दशा इतनी खराब थी कि उन्हें लगा कि वे नर्क में आ गई हैं।

    इस मानसिक पीड़ा के दौर में उन्होंने आत्महत्या करने की कोशिश की। उन्होंने पूरी नींद की गोलियों की शीशी निगल ली। लेकिन उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए जो प्यार था, वही उन्हें मौत के मुंह से खींच लाया। वह लिखती हैं, “मुझे लगा मैं मर जाऊं, लेकिन मेरे होने वाले बच्चे के लिए मेरा प्रेम इतना गहरा था कि मैं बच गई। मौत मुझे नहीं ले जा सकी। जीवन की ओर खींच लाई।”

    संगीत बना जीवन का संबल
    अपने दर्द को भुलाकर, आशा भोसले ने संगीत को अपने जीवन का आधार बना लिया। उन्होंने कभी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को एक ऐसी गायिका के रूप में स्थापित किया, जिसकी आवाज़ ने हर पीढ़ी को छुआ। चाहे वह लता मंगेशकर की छाया में रहना हो, या बॉलिवुड में अपने लिए अलग मुकाम बनाना, आशा ने हर चुनौती को स्वीकार किया।

    उनका करियर करीब सात दशकों तक फैला है। उन्होंने हर तरह के गाने गाए—क्लासिकल, कैबरे, रोमांटिक, डांस नंबर्स, और ग़ज़लें। पंचम दा यानी आर.डी. बर्मन के साथ उनका संगीत और निजी रिश्ता भी खूब चर्चा में रहा, जिसने उनके जीवन में नये रंग भरे।

    दर्द को सुरों में ढाला
    जीवनी के ज़रिये आशा भोसले ने एक साहसी कदम उठाया है। एक महिला के रूप में उन्होंने जिस मानसिक और शारीरिक पीड़ा को सहा, उस पर आजतक कोई बात नहीं करता था। लेकिन अब, उनके शब्दों ने उन तमाम स्त्रियों को आवाज़ दी है जो घर की चारदीवारी में चुपचाप जुल्म सहती हैं।

    उनका यह बयान, “मैंने कभी सवाल नहीं किया, बस अपने धर्म का पालन किया,” भारतीय समाज में विवाह, स्त्री धर्म और आत्मसम्मान जैसे विषयों पर गहरी बहस छेड़ता है।

    प्रेरणा की जीवित मूर्ति
    आज आशा भोसले सिर्फ एक गायिका नहीं, बल्कि संघर्ष और सफलता की प्रतीक हैं। उनके जीवन की यह कहानी न सिर्फ उनके प्रशंसकों के लिए, बल्कि हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो कठिन हालातों से जूझ रहा है। यह जीवनी साबित करती है कि कला का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन अगर हौसले मजबूत हों, तो दर्द भी सुर बन जाता है।

    आशा भोसले की आत्मकथा एक ऐसी दस्तावेज़ बनकर सामने आई है जो यह बताती है कि संगीत के पीछे कितने घाव छुपे हो सकते हैं। यह न केवल उनके करियर का दस्तावेज़ है, बल्कि एक महिला के अस्तित्व, आत्मबल और पुनर्जन्म की कहानी भी है। आशा भोसले की आवाज़ की तरह ही उनकी जीवनी भी हमारे दिलों में देर तक गूंजती रहेगी।

  • 28 जून दैनिक राशिफल एवं आज का पंचांग

    28 जून दैनिक राशिफल एवं आज का पंचांग

    मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
    आज आपको किसी ना किसी कारण मानसिक क्लेश बना रहेगा। प्रत्येक कार्य को देख-भाल कर ही करेंगे फिर भी सफलता निश्चित नहीं रहेगी। सरकारी दखल बढ़ने से कार्य क्षेत्र पर दवाब रहेगा। हाथ लिए अनुबंध समय पर पूर्ण करने के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ेगा। आज आप किसी को भी खुश करने में असफल रहेंगे। काम का बोझ अधिक रहने के कारण स्वभाव में चिड़चिड़ाहट रहेगी जिससे प्रियजनों से दूरी बढ़ना संभव है। आज आप पुराने कार्यो को पूर्ण करने पर अधिक ध्यान दे इसके बाद ही नए कार्य हाथ लें। परिजनों की बात मानने में ही भलाई है।

    वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
    आज के दिन कार्य क्षेत्र के साथ साथ घरेलु कार्य अधिक रहने से व्यस्तता बढ़ेगी। मध्यान का समय धन लाभ के अवसर भी मिलेंगे परन्तु आशा के अनुसार सफलता नहीं मिल पाएगी। घर में सजावट एवं बदलाव लाने के लिए समय एवं धन खर्च होगा। सन्तानो की जिद के चलते थोड़े असहज रहेंगे। कार्य क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धा कम रहने का पूरा लाभ मिल सकेगा। प्रतिष्ठा को लेकर आज आप अधिक संवेदनशील रहेंगे। अविवाहितो को विवाह के प्रस्ताव मिलेंगे। नौकरी पेशा जातको को थोड़ी परेशानी रहेगी। संध्या का समय एकांत वास में बिताना पसंद करेंगे।

    मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
    आपका आज का दिन भी थोड़ा उतार चढ़ाव वाला रहेगा। संबंधो में चाह कर भी मधुरता नहीं रख पाएंगे। परिजनों से बात-बात पर मतभेद बनेंगे। गलतफहमियां भी आज अधिक परेशान करेंगी। कार्य क्षेत्र पर प्रतिस्पर्धा अधिक रहने से अधिक ध्यान देना पड़ेगा। आज आपके हिस्से का लाभ कोई अन्य व्यक्ति ले सकता है। संभावित अनुबंध निरस्त होने से मन भारी रहेगा। धन लाभ के लिए किसी की मान गुहार करनी पड़ेगी। लंबी यात्रा की योजना स्थगित करनी पड़ सकती है। पारिवारिक खर्च अधिक बढ़ने से परेशानी होगी।

    कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
    आज आपके मन के विचार थोड़ी-थोड़ी देर में बदलते रहेंगे जिससे कोई भी ठोस निर्णय लेने में दिक्कत आएगी। परन्तु फिर भी आज आपका ध्यान सुख के साधनों की हर हाल में वृद्धि करने में रहेगा। अनैतिक साधनो से लाभ पाने के प्रलोभन भी मिल सकते है परन्तु इनसे बच कर रहे भविष्य की हानि से भी बचेंगे। लाभ के कई अवसर मिलेंगे परन्तु अनिर्णय की स्थिति के कारण इनका पूर्ण लाभ नहीं ले पाएंगे। अधिकांश कार्य आगे के लिए टलेंगे। सामाजिक क्षेत्र पर आपकी छवि धनवानों जैसी रहेगी फिर भी आडंबर से दूर रहें।

    सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
    आज के दिन आपके अपने ही बनते कार्यो में अड़चन डाल सकते है जिससे नया विवाद खड़ा होगा। धन को लेकर किसी से मामूली विवाद गंभीर रूप धारण कर सकता है इसलिए धन सम्बंधित मामलो को प्राथमिकता से निपटाएं। कार्य व्यवसाय में धन लाभ होते होते आगे के लिए टलेगा। खर्च यथावत बने रहने से आर्थिक समस्या बनेगी। अनावश्यक विषयो की चर्चा से दूरी बना कर रखे अन्यथा हास्य के पात्र बन सकते है। सामाजिक क्षेत्र पर स्वयं को बड़ा दिखाना भविष्य में मुसीबत खड़ी करेगा। परिजनों के लिए समय निकालें।

    कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
    आज घर एवं सामाजिक क्षेत्र पर आपके विचारों को पसंद किया जाएगा। अनजान लोग भी आपकी बातों से प्रभावित होंगे नए मित्र एवं जनसंपर्क बनेंगे। सेहत भी आज अच्छी रहेगी परन्तु मध्यान के बाद दर्द की शिकायत रह सकती है। कार्य क्षेत्र पर अपने बल पर कार्य करेंगे। आज किसी से मदद अथवा शिफारिश नहीं लेंगे। पुराने रुके हुए कार्यो में आश्चर्यजनक रूप से गति आएगी। धन लाभ भी आकस्मिक ही होगा। बीच-बीच में मनोरंजन के अवसर मिलने से मन हल्का रहेगा। परिजन सहयोग करेंगे।

    तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
    आज का दिन आपकी अपेक्षाओं के अनुसार रहेगा। सामाजिक एवं पारिवारिक क्षेत्र पर आज आप भाग्यशाली माने जाएंगे। आपके अधिकांश कार्य सरलता से बनते चले जाएंगे। जायदाद सम्बंधित कार्यो को आज करना शुभ रहेगा। सरकार की तरफ से लाभदायक समाचार मिल सकता है। विदेश सम्बंधित कार्यो में भी सफलता सुनिश्चित रहेगी। धार्मिक क्षेत्र पर योगदान के लिए सम्मानित किए जाएंगे। परिवार में भी आज आपको विशेष स्नेह एव सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य भी उत्तम रहेगा। धन लाभ में थोड़ा विलम्ब हो सकता है।

    वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
    आज का दिन आपको मिश्रित फलदायी रहेगा। दिन के पूर्वार्ध में शारीरिक रूप से असमर्थ रहेंगे आलस्य अधिक रहने से उत्साह की कमी रहेगी। परिवार में भी गर्मागर्मी का वातावरण रहने से असहजता होगी। परन्तु मध्यान तक स्थिति सुधरने लगेगी अपना उत्तरदायित्व समझेंगे किसी विशिष्ट व्यक्ति के मार्गदर्शन से कार्य क्षेत्र पर लाभ के अनुबंध मिलेंगे। सेहत भी धीरे-धीरे सामान्य हो जायेगी। सहकर्मियों का साथ मिलने से कार्य निश्चित अवधि में पूर्ण कर लेंगे। संध्या के समय धन लाभ होगा मनोरंजन पर खर्च भी रहेगा।

    धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
    आज के दिन आप अपने ही गैरजिम्मेदार व्यवहार के कारण कष्ट उठाएंगे। कार्यो में लापरवाही भी अधिक रहेगी। हर कार्य में शक करने के कारण परिवार अथवा कार्य क्षेत्र पर तनातनी हो सकती है। व्यवसाय आशा के विपरीत रहेगा। धन लाभ आज मुश्किल से ही हो पायेगा। किसी दूर रहने वाले रिश्तेदार से दुःखद समाचार मिलेगा। परिवार में किसी की बीमारी पर खर्च होगा। सरकारी कार्यो के पीछे व्यर्थ की भाग दौड़ करनी पड़ेगी। सेहत का विशेष ध्यान रखें।

    मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
    आज का दिन आनंददायक रहेगा। आज आप लगभग प्रत्येक क्षेत्र पर सफल रहेंगे। सफलता के पीछे परिजनों का भी विशेष योगदान रहेगा फिर भी आज स्वार्थ की मनोवृत्ति अधिक रहने से किसी का अहसान नहीं मानेंगे। महिला मित्रो से ज्यादा नजदीकी के कारण समाज में निंदा हो सकती है। आर्थिक दृष्टिकोण से दिन बेहतर सिद्ध होगा। व्यापारियों के लिए आज का दिन कुछ ख़ास करेगा। मनोरंजन के साथ-साथ तामसी वृतियो में वृद्धि होगी। घर का वातावरण सामान्यतः शांत ही रहेगा फिर भी रंग में भंग ना पड़े इसका ध्यान रखे।

    कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
    आज के दिन आपको संयमित व्यवहार करने की सलाह है। स्वाभाव में उग्रता रहने से स्वयं जनों से मन दुःख के प्रसंग बन सकते है। आपके कार्य करने का तरीका किसी अन्य के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। बिना बात बोलने अथवा सलाह देने के कारण सम्मान में कमी आएगी। कार्य परिश्रम के बाद भी अधरे रहेंगे। धन आवश्यकता के समय नहीं मिलने पर निराशा होगी। भाग-दौड़ करने के बाद किसी से अल्प मात्रा में मदद मिल जायेगी। परिजनों के विपरीत व्यवहार की अनदेखी करना ही बेहतर रहेगा। आध्यात्म से जुड़े शांति मिलेगी।

    मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
    आज आप शारीरिक एवं मानसिक रूप से बेहतर अनुभव करेंगे। दिन के आरम्भ में किसी इच्छित कार्य के बनने से मन में उत्साह बढेगा। व्यवहार में भी मधुरता रहने से आसानी से अपने कार्य निकाल सकेंगे। थोड़ी बहुत स्वार्थ सिद्धि की भावना भी रहेगी। घर में अथवा कार्य क्षेत्र पर बड़बोलापन व्यर्थ की समस्या खड़ी ना करे इसलिए सोच समझ कर ही अपनी बात रखे अथवा मौन ही रहें। दोपहर के बाद कार्यो में बाधा आने लगेगी। सरकारी अथवा पुरानी योजनाओं में धन फंस सकता है। लेन देन करते समय सावधानी रखें। परिवार में आपसी मतभेद उभर सकते है।

    🌺श्री राम जानकी पञ्चाङ्ग🌺

    🌺शनिवार, २८ जून २०२५🌺

    सूर्योदय: 🌄 ०५:३९
    सूर्यास्त: 🌅 ०७:२०
    चन्द्रोदय: 🌝 ०८:०२
    चन्द्रास्त: 🌜२२:०२
    अयन 🌘 दक्षिणायणे (उत्तरगोलीय)
    ऋतु: ⛈️ वर्षा
    शक सम्वत: 👉 १९४७ (विश्वावसु)
    विक्रम सम्वत: 👉 २०८२ (कालयुक्त)
    मास 👉 आषाढ
    पक्ष 👉 शुक्ल
    तिथि 👉 तृतीया (०९:५३ से चतुर्थी)
    नक्षत्र 👉 पुष्य (०६:३५ से आश्लेशा)
    योग 👉 हर्षण (१९:१५ से वज्र)
    प्रथम करण 👉 गर (०९:५३ तक)
    द्वितीय करण 👉 वणिज (२१:२८ तक)
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    ॥ गोचर ग्रहा: ॥
    🌖🌗🌖🌗
    सूर्य 🌟 मिथुन
    चंद्र 🌟 कर्क
    मंगल 🌟 सिंह (उदित, पूर्व, मार्गी)
    बुध 🌟 कर्क (उदय, पश्चिम, मार्गी)
    गुरु 🌟 मिथुन (अस्त, पश्चिम, मार्गी)
    शुक्र 🌟 मेष (अस्त, पश्चिम, मार्गी)
    शनि 🌟 मीन (उदय, पूर्व, मार्गी)
    राहु 🌟 कुम्भ
    केतु 🌟 सिंह
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    शुभाशुभ मुहूर्त विचार
    ⏳⏲⏳⏲⏳⏲⏳
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    अभिजित मुहूर्त 👉 ११:५२ से १२:४८
    अमृत काल 👉 २८:५८ से ०६:३४
    रवि योग 👉 ०६:३५ से २९:१८
    विजय मुहूर्त 👉 १४:४१ से १५:३७
    गोधूलि मुहूर्त 👉 १९:२१ से १९:४१
    सायाह्न सन्ध्या 👉 १९:२२ से २०:२२
    निशिता मुहूर्त 👉 २४:०० से २४:४०
    राहुकाल 👉 ०८:४९ से १०:३५
    राहुवास 👉 पूर्व
    यमगण्ड 👉 १४:०६ से १५:५१
    दुर्मुहूर्त 👉 ०५:१८ से ०६:१४
    होमाहुति 👉 सूर्य (०६:३५ से बुध)
    दिशाशूल 👉 पूर्व
    अग्निवास 👉 पृथ्वी
    भद्रावास 👉 मृत्यु (२१:२८ से)
    चन्द्र वास 👉 उत्तर
    शिववास 👉 सभा में (०९:५३ से क्रीड़ा में)
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    ☄चौघड़िया विचार☄
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    ॥ दिन का चौघड़िया ॥
    १ – काल २ – शुभ
    ३ – रोग ४ – उद्वेग
    ५ – चर ६ – लाभ
    ७ – अमृत ८ – काल
    ॥रात्रि का चौघड़िया॥
    १ – लाभ २ – उद्वेग
    ३ – शुभ ४ – अमृत
    ५ – चर ६ – रोग
    ७ – काल ८ – लाभ
    नोट👉 दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
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    शुभ यात्रा दिशा
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    उत्तर-पश्चिम (वायविंडिंग अथवा तिल मिश्रित चावल का सेवन कर यात्रा करें)
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    तिथि विशेष
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    विनायक चतुर्थी, अनन्त श्री विभूषित नित्य वन्दनीय ब्र. श्रीमत्स्वामी हरिहर तीर्थ जी महाराज का चतुस्त्रिंशत् (३४ वाँ) निवार्ण महोत्सव, एवं श्री हरिहर कैलास ज्ञानपीठ का द्वात्रिंशत् (३२ वाँ) वार्षिकोत्सव आदि।
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    आज जन्मे शिशुओं का नामकरण
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    आज ०६:३५ तक जन्मे शिशुओ का नाम पुष्य नक्षत्र के चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (डा) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम आश्लेषा नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (डी, डू, डे, डो) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।
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    उदय-लग्न मुहूर्त
    मिथुन – २८:२८ से ०६:४३
    कर्क – ०६:४३ से ०९:०४
    सिंह – ०९:०४ से ११:२३
    कन्या – ११:२३ से १३:४१
    तुला – १३:४१ से १६:०२
    वृश्चिक – १६:०२ से १८:२१
    धनु – १८:२१ से २०:२५
    मकर – २०:२५ से २२:०६
    कुम्भ – २२:०६ से २३:३२
    मीन – २३:३२ से २४:५५+
    मेष – २४:५५+ से २६:२९+
    वृषभ – २६:२९+ से २८:२४+
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    पञ्चक रहित मुहूर्त
    शुभ मुहूर्त – ०५:१८ से ०६:३५
    रज पञ्चक – ०६:३५ से ०६:४३
    शुभ मुहूर्त – ०६:४३ से ०९:०४
    चोर पञ्चक – ०९:०४ से ०९:५३
    शुभ मुहूर्त – ०९:५३ से ११:२३
    रोग पञ्चक – ११:२३ से १३:४१
    शुभ मुहूर्त – १३:४१ से १६:०२
    मृत्यु पञ्चक – १६:०२ से १८:२१
    अग्नि पञ्चक – १८:२१ से २०:२५
    शुभ मुहूर्त – २०:२५ से २२:०६
    रज पञ्चक – २२:०६ से २३:३२
    शुभ मुहूर्त – २३:३२ से २४:५५+
    शुभ मुहूर्त – २४:५५+ से २६:२९+
    रज पञ्चक – २६:२९+ से २८:२४+
    शुभ मुहूर्त – २८:२४+ से २९:१८+
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    आचार्य पं. अशोक मिश्रा मुम्बई
    मो.9870190475

  • दत्तात्रेय होसबले :संविधान के शब्द ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवाद’

    दत्तात्रेय होसबले :संविधान के शब्द ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवाद’

    पूनम शर्मा
    कुछ दिन पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. गवई ने कहा था कि “मेरे लिए संसद नहीं, संविधान सर्वोच्च है।” यह बयान संवैधानिक मूल्यों की प्राथमिकता को दर्शाता है। लेकिन अब एक बुनियादी सवाल खड़ा होता है—कौन-सा संविधान? 1950 में लागू हुआ वह मूल संविधान जिसमें ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्द नहीं थे, या 1976 में आपातकाल के दौरान संशोधित वह संविधान जिसमें ये दोनों शब्द जोड़े गए?
    इसी विषय पर आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी जोर देकर कहा कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ जैसे शब्दों को संविधान की प्रस्तावना से हटाया जाना चाहिए क्योंकि ये भारत की आत्मा को परिभाषित नहीं करते। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिना इन शब्दों के भी भारत एक पूर्णत: धर्मनिरपेक्ष और विविधतापूर्ण समाज था, है और रहेगा।
    यह बहस केवल शब्दों की नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और उसकी संवैधानिक दिशा की भी है।
    मूल संविधान और उसका दृष्टिकोण
    जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ, तो उसकी प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ जैसे शब्द नहीं थे। इसके बावजूद, संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 25-28 जैसे प्रावधान नागरिकों को धर्म, जाति, लिंग, भाषा आदि के आधार पर भेदभाव से सुरक्षा प्रदान करते थे। इसका तात्पर्य था कि राज्य किसी एक धर्म का पक्ष नहीं लेगा, और सभी को समान अवसर व स्वतंत्रता मिलेगी। यही तो धर्मनिरपेक्षता है।
    संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी इस बात पर ज़ोर दिया था कि भारत का संविधान धर्म से निरपेक्ष रहेगा, लेकिन उन्होंने जानबूझकर ‘सेक्युलर’ शब्द को प्रस्तावना में नहीं जोड़ा। क्यों? क्योंकि उन्होंने माना कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक ताना-बाना पहले से ही इस भावना में निहित है।और इतना ही नहीं रामायण के चित्रों का संविधान के भीतर होने का कोई विरोध उस समय नहीं था ।
    इंदिरा गांधी और 42वां संशोधन: राजनीतिक मजबूरी या विचारधारा?
    1975 में देश में आपातकाल लगाया गया। लोकतंत्र कुचला गया, विपक्ष को जेलों में डाला गया, मीडिया पर सेंसरशिप लगाई गई। इसी दौरान 1976 में 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से प्रस्तावना में दो शब्द जोड़े गए — ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’। यह जोड़ भारत की आत्मा में कोई नया मूल्य नहीं था, बल्कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार की वैचारिक राजनीति का हिस्सा था।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इंदिरा गांधी उस समय अपनी छवि सुधारने और अपने शासन को वैचारिक जामा पहनाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन इस संशोधन को लेकर कभी जनमत संग्रह नहीं कराया गया। न ही इसकी कोई सार्वभौमिक मांग थी। यह एकतरफा थोपे गए शब्द थे, जिनकी संवैधानिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता पर अब सवाल उठ रहे हैं।

    क्या ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द के बिना भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं था?
    इस प्रश्न का उत्तर स्पष्ट है—भारत में ‘धर्मनिरपेक्षता’ की भावना संविधान में पहले दिन से ही निहित थी, बिना इस शब्द के। भारत वह देश है जहाँ “सर्व धर्म समभाव” की भावना हजारों वर्षों से चली आ रही है। जहाँ गुरु नानक, कबीर, रहीम, तुलसी, चैतन्य महाप्रभु और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने धर्मों के बीच समरसता का मार्ग दिखाया।

    संविधान में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द जोड़े जाने के बाद से, कई बार इसका दुरुपयोग हुआ है। कई राजनीतिक दलों ने इस शब्द को ‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ का औजार बना लिया, जिससे बहुसंख्यकों में असंतोष पनपा। यही कारण है कि अब यह मांग तेज़ हो रही है कि धर्मनिरपेक्षता का व्यवहारिक स्वरूप संविधान के अनुच्छेदों में ही निहित है, अलग से इसे प्रस्तावना में जोड़ने की आवश्यकता नहीं।

    ‘समाजवाद’ शब्द: भारतीय संदर्भ में विदेशी विचार?
    ‘समाजवाद’ एक पश्चिमी राजनीतिक विचार है, जिसका उद्भव रूस और यूरोप की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से हुआ था। भारत में समाजवादी आंदोलन जरूर रहा है, लेकिन भारत की मूल संस्कृति में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, परिवार व्यवस्था और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्य ज्यादा गहरे रहे हैं।

    समाजवाद के नाम पर देश में लाइसेंस राज और सरकारी नियंत्रण को बढ़ावा मिला, जिसने आर्थिक प्रगति को वर्षों तक बाधित किया। 1991 में आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत ने समाजवादी नियंत्रण से बाहर निकलकर उद्यमशीलता और निजी क्षेत्र की भूमिका को मान्यता दी।

    ऐसे में सवाल उठता है: क्या ‘समाजवादी’ शब्द आज भी भारत के आर्थिक व सामाजिक दर्शन से मेल खाता है?

    होसबाले जी का बयान और नया विमर्श
    आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने स्पष्ट कहा कि प्रस्तावना में इन शब्दों को जोड़े जाने से देश की आत्मा को ठेस पहुँची है। उन्होंने कहा, “धर्मनिरपेक्षता का मतलब यह नहीं कि हम अपने मूल धर्म को छोड़ दें, बल्कि इसका मतलब है कि हर धर्म को समान दृष्टि से देखें। लेकिन अब इसका अर्थ उलट कर दिया गया है। इसे वोट बैंक का औजार बना दिया गया है।”

    उनकी इस बात को लेकर एक वैचारिक विमर्श छिड़ चुका है। कई संवैधानिक विशेषज्ञ, न्यायविद और सामाजिक चिंतक अब इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या संविधान की मूल आत्मा में लौटने का समय आ गया है?भारतीय संविधान की महानता इसकी व्यापकता और समावेशी दृष्टिकोण में है। ‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘समाजवाद’ जैसे मूल्य भारतीय जीवन में पहले से ही रचे-बसे हैं। इन्हें प्रस्तावना में जोड़ना अधिकतर राजनीतिक कदम था, जो आज के समय में विवाद और भ्रम का कारण बन रहा है।

    संविधान सर्वोच्च है, यह निर्विवाद है। लेकिन अगर संविधान को राजनीतिक उद्देश्यों से संशोधित किया गया हो, तो उसे पुनः आत्मचिंतन की ज़रूरत है। आज जब मुख्य न्यायाधीश संविधान को सर्वोपरि बताते हैं, तो यह भी आवश्यक है कि हम यह पूछें—क्या हम उस मूल संविधान की ओर लौट सकते हैं, जो बिना शब्दजाल के भी भारत की आत्मा को परिभाषित करता था?

  • बांग्लादेश में मंदिर तोड़-फोड़ के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे हिंदू संगठन

    बांग्लादेश में मंदिर तोड़-फोड़ के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे हिंदू संगठन

    समग्र समाचार सेवा
    ढाका, बांग्लादेश, 27 जून: धर्म के नाम पर बढ़ते अत्याचार और मंदिरों पर हो रहे हमलों के विरोध में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय एकजुट हो गया है। आज, शुक्रवार 27 जून को, बांग्लादेश नेशनल हिंदू महाजोत ने ढाका के नेशनल प्रेस क्लब के सामने एक मानव श्रृंखला और विरोध रैली का आयोजन किया। यह प्रदर्शन ढाका के खुल्खेत में श्री श्री दुर्गा मंदिर को बुलडोजर से तोड़ने और मूर्तियों की तोड़-फोड़ के साथ-साथ लालमोनिरहाट में कथित धार्मिक अपमान के बहाने परेश चंद्र शील और विष्णुपाद शील पर हुए हमले के विरोध में किया गया।

    मंदिर ध्वस्त, मूर्तियों का अपमान

    प्रदर्शनकारियों ने बताया कि खुल्खेत में बुनियादी सिद्धांतों की मांग पर पुलिस और सेना की मौजूदगी में श्री श्री दुर्गा मंदिर और मूर्तियों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। मंदिर में पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान और मूर्तियों का अपमान किया गया और उन्हें ट्रकों में भरकर लूट लिया गया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मंदिर के बगल में रेलवे की ज़मीन पर मस्जिद, मदरसा और कई राजनीतिक पार्टियों के दफ्तर भी हैं, लेकिन उन्हें नहीं तोड़ा गया, जिससे सरकार का सांप्रदायिक रवैया साफ ज़ाहिर होता है।

    हिंदू-द्वेष चरम पर, प्रशासन पर आरोप

    वक्ताओं ने कहा कि देश में हिंदू-द्वेष चरम पर पहुँच गया है और हिंदुओं का जीवन दयनीय हो गया है। उन्होंने जेस्सोर में 18 हिंदू घरों और दुकानों को जलाए जाने जैसी हाल की घटनाओं का भी ज़िक्र किया। उनका आरोप है कि सरकार और प्रशासन पूरी तरह से कट्टरपंथियों के इशारे पर चल रहे हैं। लालमोनिरहाट में भीड़ बनाने वाले अपराधियों को गिरफ्तार करने के बजाय, हमले में घायल हुए पीड़ितों को ही झूठे मुकदमों में गिरफ्तार कर लिया गया है। वक्ताओं ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि तानाशाही खत्म होने के बाद देश में कोई भेदभाव नहीं होगा, लेकिन हिंदू समुदाय को सलाहकार परिषद या किसी भी सुधार समिति में कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।

    रेलवे सलाहकार के इस्तीफे की मांग

    इस प्रदर्शन में रेलवे सलाहकार पर गंभीर आरोप लगाए गए। वक्ताओं ने कहा कि मंदिर की ज़मीन भावल राजा राजेंद्र नारायण रॉय चौधरी की संपत्ति थी, जिस पर रेलवे ने बिना मुआवज़े के कब्जा कर लिया। इसलिए यह मंदिर अवैध नहीं था। उन्होंने कहा कि मूर्तियों को तोड़ना, रस्सियों से बांधकर ट्रकों में भरना और अज्ञात स्थानों पर फेंकना घोर धार्मिक अपमान है। वक्ताओं ने इस झूठ के लिए रेलवे सलाहकार से इस्तीफे की मांग की और 24 घंटे के भीतर उनके ख़िलाफ़ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मुकदमा दर्ज करने की माँग की। उन्होंने भीड़ बनाने वाले अपराधियों को गिरफ्तार कर उन्हें मानवता के ख़िलाफ़ अपराध न्यायाधिकरण में मुकदमा चलाने की भी माँग की।

    मंदिरों की भूमि खाली करने का अल्टीमेटम

    हिंदू महाजोत ने सरकार को एक बड़ा अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने राजधानी के टीकटुली में मदनेश्वर महादेव मंदिर की जगह पर बने राजधानी मार्केट और मस्जिद, शंकरनिधि मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर जैसे अवैध रूप से कब्ज़ा किए गए सभी मंदिर स्थलों को 7 दिनों के भीतर खाली कराकर हिंदुओं को वापस सौंपने की मांग की। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर 7 दिनों के भीतर यह मांग पूरी नहीं हुई, तो वे देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे और इस सांप्रदायिक सरकार के अधीन किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे और सभी प्रकार के चुनावों का बहिष्कार करेंगे।

  • म्मू-कश्मीर की युवा कबड्डी टीमें हरिद्वार के लिए रवाना, पदक जीतने पर मिलेगा 1 लाख का नकद इनाम

    म्मू-कश्मीर की युवा कबड्डी टीमें हरिद्वार के लिए रवाना, पदक जीतने पर मिलेगा 1 लाख का नकद इनाम

    समग्र समाचार सेवा
    जम्मू, 27 जून: जम्मू-कश्मीर की युवा कबड्डी टीमें, जिनमें लड़के और लड़कियों दोनों के खिलाड़ी शामिल हैं, हरिद्वार में होने वाली पहली यूथ नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए रवाना हो गई हैं। यह चैंपियनशिप 28 जून से 1 जुलाई, 2025 तक आयोजित होगी। जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल और जम्मू-कश्मीर कबड्डी को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, जम्मू के सहयोग से ये टीमें इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगी।

    टीमों को दिया गया गर्मजोशी से विदाई

    जम्मू में श्री बालकृष्णन, जेकेएएस, अतिरिक्त रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोसाइटी, जम्मू-कश्मीर ने टीमों को गर्मजोशी से विदाई दी। इस दौरान खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स किट भी वितरित की गईं। टीम का चयन जम्मू-कश्मीर स्पोर्ट्स काउंसिल के सदस्यों द्वारा किया गया था। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर एमेच्योर कबड्डी एसोसिएशन के महासचिव कुलदीप कुमार गुप्ता, कोषाध्यक्ष अनिल मोदी, तकनीकी निदेशक एस. एस. गिल और अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे।

    जीतने पर मिलेगा 1 लाख रुपये का नकद पुरस्कार

    एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री अनिल गुप्ता ने दोनों टीमों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अगर लड़के या लड़कियों की टीम पदक जीतकर आती है, तो उन्हें ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पदक जीतने वाली टीम का जम्मू में भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया जाएगा।

    टीम के खिलाड़ियों के नाम

    लड़कों की टीम में: अंकुश छिब, आदित्य थापा, आदर्श शर्मा, वंश कुमार, यासिर बशीर, दानिश अलीवाज़ा, काशिफ अल्ताफ, कुणाल बनोत्रा, भूपिंदर सिंह, आर्यन शर्मा, हामिद जाविद, शान करामत एजाज, विशाल कुमार और मनिक अत्री शामिल हैं।

    लड़कियों की टीम में: सोनाक्षी खजुरिया, ज्योति देवी, ईवा, समीक्षा आनंद, सुकृति शर्मा, सेहरिश राशिद, नायसा सिंह, सुनैना गुलजार, परी, सानिया जान, साइका तबस्सुम, अब्रीना जान, सुबराना कय्यूम और जानवी सेयाल शामिल हैं।

    कोच और मैनेजर:

    लड़कों की टीम: कोच अजित सिंह और मैनेजर मोहम्मद याकूब।
    लड़कियों की टीम: कोच निशा रानी और मैनेजर अर्चना कौशल।

     

  • आपातकाल के 50 साल: लोकतंत्र सेनानियों ने पेंशन और JP संग्रहालय की माँग उठाई

    आपातकाल के 50 साल: लोकतंत्र सेनानियों ने पेंशन और JP संग्रहालय की माँग उठाई

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 27 जून:  25 जून, 2025 को भारत के इतिहास के एक काले अध्याय के 50 साल पूरे होने पर, नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक विशेष सम्मेलन और संवाद गोष्ठी का आयोजन किया गया। संपूर्ण क्रांति राष्ट्रीय मंच और लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश भर से आए जेपी सेनानियों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने संघर्ष, त्याग और बलिदान को याद किया।

    जेपी सेनानियों ने रखी अपनी माँगें

    कार्यक्रम की शुरुआत में, लोकनायक जयप्रकाश अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विकास केंद्र के राष्ट्रीय महासचिव अभय सिन्हा ने जेपी सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर सम्मान देने की माँग रखी। उन्होंने सरकार से इन सेनानियों को पेंशन, चिकित्सा सुविधा और अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएँ प्रदान करने का आग्रह किया। इसके साथ ही, उन्होंने दिल्ली में लोकनायक जयप्रकाश नारायण का अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय एवं शोध संस्थान स्थापित करने की भी मांग की, जिसका सभागार में मौजूद सभी लोगों ने तालियों से स्वागत किया।

    सत्ता के दुरुपयोग के ख़िलाफ़ आवाज़

    इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि और वक्ताओं ने एकमत से अपनी राय रखी। भारत रक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री सूर्यकांत केलकर, पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री विजय गोयल, डॉ. सत्य नारायण जटिया और अन्य वक्ताओं ने कहा कि 50 साल पहले आपातकाल थोपकर भारत की अस्मिता और लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश की गई थी। लाखों लोगों ने इस तानाशाही शासन से मुक्ति दिलाने, संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।

    नई पीढ़ी को इतिहास से अवगत कराना ज़रूरी

    वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नई पीढ़ियों को आपातकाल के इतिहास और उस दौरान किए गए बलिदानों के बारे में अवगत कराना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि आज के राजनेताओं को वोट बैंक की राजनीति में सांप्रदायिकता और जातीयता को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। जेपी के अनुयायियों ने व्यवस्था परिवर्तन के लिए जो लड़ाई लड़ी और जो शहादत दी, उसे इतिहास के पन्नों से मिटाने की साज़िश नहीं होनी चाहिए।

    लोकतंत्र सेनानियों को मिले स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा

    सम्मेलन में एक प्रमुख मांग यह भी रही कि जेपी सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों को आज़ादी की दूसरी लड़ाई लड़ने वालों के रूप में स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से समान पेंशन, चिकित्सा सुविधा और अन्य लाभ प्रदान करने का भी आग्रह किया। यह सम्मेलन दिल्ली के गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में पूरी तरह से खचाखच भरा था, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है।

  • भूस्खलन से काँपा  केदारनाथ हाईवे! मुनकटिया में तबाही का मंजर

    भूस्खलन से काँपा केदारनाथ हाईवे! मुनकटिया में तबाही का मंजर

    समग्र समाचार सेवा
    रुद्रप्रयाग, 27 जून:उत्तराखंड में केदारनाथ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के लिए शुक्रवार की सुबह काल बनकर आई। मुनकटिया के पास अचानक भयंकर भूस्खलन हुआ, जिससे पूरा केदारनाथ हाईवे थम गया। पहाड़ से गिरे विशाल बोल्डर और भारी मलबा देखकर यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। गनीमत रही कि इस तबाही में कोई जान-माल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन दहशत का आलम अब भी कायम है।

    लगातार हो रही बारिश से पहाड़ मानो मौत बरसाने पर उतारू है। पिछले एक सप्ताह से मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है, जिससे मुनकटिया और सोनप्रयाग के पास स्लाइडिंग ज़ोन एक्टिव हो गए हैं। शुक्रवार सुबह मुनकटिया में अचानक पहाड़ी दरक गई और विशाल चट्टानें तेज आवाज के साथ हाईवे पर आ गिरीं। कई वाहन वहीं फंस गए, जबकि सैकड़ों यात्री खतरनाक हालात में फंस गए।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल केदारनाथ यात्रा को रोक दिया है। सोनप्रयाग से आगे किसी को नहीं भेजा जा रहा। जो श्रद्धालु केदारनाथ से लौट रहे थे, उन्हें मुनकटिया से रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। दूसरी तरफ फंसे यात्रियों को जंगल के रास्तों से निकालकर सुरक्षित ठिकानों तक लाया जा रहा है।

    बचाव कार्य जारी, प्रशासन हाईवे खोलने में जुटा
    जिलाप्रशासन ने मौके पर जेसीबी मशीनें और विशेष कर्मचारी भेजे हैं ताकि मलबा हटाकर हाईवे को दोबारा खोलने की कोशिश की जा सके। SHO सोनप्रयाग राकेन्द्र कठैत खुद मौके पर मौजूद हैं और आने-जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा और आवाजाही सुनिश्चित कर रहे हैं। हाईवे की हर पल निगरानी की जा रही है ताकि कोई और हादसा न हो।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के चलते हर दिन कहीं न कहीं पहाड़ खिसक रहा है, जिससे श्रद्धालु डरे हुए हैं। “ऐसा लगा जैसे पूरा पहाड़ टूटकर हमारे ऊपर आ गया हो। भगवान ने बचा लिया,” एक महिला यात्री ने कहा, जो भूस्खलन के दौरान बाल-बाल बची।

    क्या यात्रा फिर से शुरू हो पाएगी?
    फिलहाल केदारनाथ यात्रा को रोक दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक मौसम अनुकूल नहीं होता और रास्ता पूरी तरह से सुरक्षित नहीं होता, तब तक श्रद्धालुओं को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    उत्तराखंड में मानसून की पहली ही बारिश ने आपदा के खतरे को साफ तौर पर सामने ला दिया है। प्रशासन अलर्ट मोड पर है, लेकिन पहाड़ की अनिश्चित प्रकृति ने यात्रा को खतरे की घंटी बजा दी है।

  • पुरी में श्रद्धा और सुरक्षा का संगम, दीघा में पहली बार निकली जगन्नाथ यात्रा

    पुरी में श्रद्धा और सुरक्षा का संगम, दीघा में पहली बार निकली जगन्नाथ यात्रा

    समग्र समाचार सेवा
    पुरी/दीघा, 27 जून 2025: ओडिशा के पवित्र तीर्थ नगर पुरी में आज भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा पूरे श्रद्धा और भव्यता के साथ आरंभ हुई। लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से पुरी पहुँचे  हैं ताकि वे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की पवित्र यात्रा के दर्शन कर सकें। तीनों देवताओं को पारंपरिक लकड़ी के विशाल रथों में बैठाकर श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जा रहा है, जहाँ  वे एक सप्ताह तक विराजमान रहेंगे।

    पुरी में आज सुबह ‘पहांडी’ अनुष्ठान के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। ‘पहांडी’ शब्द संस्कृत के ‘पदमुंडनम’ से आया है, जिसका अर्थ है – पैर फैलाकर धीरे-धीरे चलना। सबसे पहले चक्रराज सुदर्शन को मंदिर से रथ तक लाया गया, उसके बाद भगवान बलभद्र, फिर देवी सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ का पहांडी में भव्य प्रवेश हुआ। तीनों रथ श्रीमंदिर के सिंह द्वार के सामने तैयार खड़े हैं, जहाँ  से 2.6 किलोमीटर दूर स्थित श्री गुंडिचा मंदिर की ओर यात्रा प्रारंभ होगी।

    ओडिशा पुलिस के एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) संजय कुमार ने बताया कि पुरी में आज लगभग 10 से 12 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है। सुरक्षा के लिए 10,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है, जिनमें केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 8 कंपनियां भी शामिल हैं। “ऑपरेशन सिंदूर के बाद हमें कुछ असामाजिक और राष्ट्रविरोधी तत्वों की संभावित गतिविधियों को लेकर इनपुट मिले थे। हमने कई दिनों की योजना के तहत पूरी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है,” उन्होंने बताया।

    इस बार पश्चिम बंगाल के दीघा में भगवान जगन्नाथ के नव-निर्मित मंदिर में पहली बार रथ यात्रा का आयोजन हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंदिर के साधुओं और श्रद्धालुओं के साथ रथ खींचने की रस्म में भाग लिया। दोपहर 2:30 बजे रथ यात्रा प्रारंभ हुई और शाम 4 बजे तक समाप्त हो गई। बंगाल सरकार ने अप्रैल में दीघा में बने इस मंदिर का उद्घाटन कर इसे ‘जगन्नाथ धाम’ नाम दिया था, जिससे राजनीतिक विवाद भी उत्पन्न हुआ था।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी रथ यात्रा के शुभ अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ  दी हैं। पीएम मोदी ने X पर लिखा, “भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के पावन अवसर पर देशवासियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ  यह पवित्र पर्व सबके जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए। जय जगन्नाथ!” वहीं राष्ट्रपति मुर्मू ने रथ यात्रा को “मानव सरीखे दिव्य लीला का अनोखा प्रतीक” बताते हुए विश्व में शांति और सौहार्द की कामना की।

    गुजरात के अहमदाबाद में भी आज 148वीं जगन्नाथ रथ यात्रा भव्य रूप से निकली। गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और पारंपरिक ‘पहिंड विधि’ निभाई। यह यात्रा 16 किलोमीटर तक निकाली जाएगी जिसमें 18 हाथी, 100 से अधिक ट्रक, भजन मंडलियां  और अखाड़े शामिल हैं।

    पुरी की रथ यात्रा न केवल आस्था का महापर्व है, बल्कि यह सांस्कृतिक एकता, परंपरा और सुरक्षा व्यवस्था का अद्वितीय संगम भी बन चुकी है।

  • कोलकाता : छात्रा से गैंगरेप पूर्व TMC छात्र नेता समेत तीन गिरफ्तार

    कोलकाता : छात्रा से गैंगरेप पूर्व TMC छात्र नेता समेत तीन गिरफ्तार

    समग्र समाचार सेवा 
    कोलकाता 27 जून : कोलकाता के एक प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज में 25 जून की शाम एक छात्रा के साथ गैंगरेप की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पुलिस ने गुरुवार को इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और कॉलेज परिसर स्थित गार्डरूम को सील कर दिया है, जहां यह जघन्य अपराध हुआ।

    मुख्य आरोपी की पहचान मोनोजीत मिश्रा के रूप में हुई है, जो कॉलेज का पूर्व छात्र रह चुका है और कभी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) की छात्र इकाई का अध्यक्ष भी था। फिलहाल वह अलीपुर कोर्ट में आपराधिक वकील के रूप में कार्यरत है। पीड़िता के अनुसार, मोनोजीत ने उसे जबरन कॉलेज के गार्डरूम में खींचकर बलात्कार किया, जबकि उसके दो साथी बाहर पहरा देते रहे।

    यह वारदात शाम 7:30 बजे से 8:50 बजे के बीच की बताई जा रही है। पुलिस ने तीनों आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और फॉरेंसिक टीम ने गार्डरूम से साक्ष्य इकट्ठा किए हैं। शुक्रवार को सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।

    इस घटना ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “यह राज्य अब महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है। पिछले साल आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज में भी एक जूनियर डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की गई थी। मुख्यमंत्री इसे भी एक ‘छोटी घटना’ बताकर पीड़िता को पैसे देकर चुप कराने की कोशिश करेंगी। उन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।”

    वहीं, टीएमसी प्रवक्ता जय प्रकाश मजूमदार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष एक सामाजिक बुराई पर राजनीति कर रहा है। इस तरह की घटनाओं के खिलाफ हमें मिलकर लड़ना चाहिए।”

    गौरतलब है कि पिछले साल आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज में एक पीजी मेडिकल छात्रा के साथ भीषण बलात्कार और हत्या की गई थी। उस मामले में आरोपी संजय रॉय, जो कोलकाता पुलिस का सिविक वॉलंटियर था, को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

    यह घटना न केवल राज्य के शैक्षणिक परिसरों में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि राजनीतिक जुड़ाव और पेशेवर पदवी के बावजूद लोग कैसे अपराध में लिप्त हो रहे हैं। अब देखना होगा कि इस केस में पुलिस कितनी तेजी और निष्पक्षता से न्याय सुनिश्चित कर पाती है।

  • राहुल के ‘आभामंडल’ से बाहर निकले बिना, कांग्रेस का संकट समाप्त नहीं होगा

    राहुल के ‘आभामंडल’ से बाहर निकले बिना, कांग्रेस का संकट समाप्त नहीं होगा

    बलबीर पुंज
    ‘नाच न जाने, आंगन टेढ़ा’— यह कहावत शीर्ष कांग्रेसी नेता और लोकसभा में नेता-प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बयानों पर सटीक बैठती है। उन्होंने अपने एक वक्तव्य में कहा, “बिहार में महाराष्ट्र जैसी मैच फिक्सिंग होगी।” इस संदर्भ में उनके कई समाचारपत्रों में लेख भी प्रकाशित हुए। उनके अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार पूर्वनिश्चित है। यह बात सही हो सकती है, परंतु इस संभावित पराजय के जो कारण राहुल गिनाते हैं, वे उनके राजनीतिक अपरिपक्वता और वंशवादी दर्प को ही उजागर करते हैं।

    बिहार में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति तीन दशकों से दयनीय है। 1990 के विधानसभा चुनाव में जहां पार्टी का मतप्रतिशत 24.78% था, वहीं 1995 में यह घटकर 16.27% रह गया। इसके बाद यह और घटते हुए वर्ष 2000 में 11% और 2005 में राजद के सहयोग से केवल 6% रह गया। 2010 में अकेले चुनाव लड़कर कांग्रेस 8.37% मत ही जुटा सकी। 1999-2014 के बीच लोकसभा चुनावों में बिहार में कांग्रेस का औसत मतप्रतिशत मात्र 8% था। इस अवधि में अधिकांश समय कांग्रेस की प्रत्यक्ष-परोक्ष समर्थन वाली सरकार थी। 2015 और 2020 में भी उसका मतप्रतिशत क्रमशः 6.7% और 9.48% ही था।

    कांग्रेस का क्षरण केवल बिहार तक सीमित नहीं है। स्वतंत्रता के बाद देश पर कांग्रेस का 50 वर्षों तक प्रत्यक्ष-परोक्ष शासन रहा। इस दौरान कांग्रेस तमिलनाडु (1967), पं. बंगाल (1977), उत्तर प्रदेश (1989), गुजरात (1990), महाराष्ट्र (1995), ओडिशा (2000), गोवा (2012) और दिल्ली (2013) में एक बार सत्ता से बाहर हुई, तो अपने दम पर अब तक लौट नहीं सकी। दिल्ली में 2015, 2020 और 2025 के चुनावों में वह खाता तक नहीं खोल सकी। महाराष्ट्र में उसका मतप्रतिशत 2009 में 21% से घटकर 2024 में मात्र 12% रह गया है। क्या यह सब भी राहुल के लिए ‘मैच फिक्सिंग’ है?

    वर्ष 2014 की ऐतिहासिक पराजय कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश था। पिछले चुनाव की तुलना में पार्टी की सीटें 206 से घटकर 44 और मतप्रतिशत 28.5% से 19.3% पर आ गया। इस दौर में दस वर्षों तक केंद्र में कांग्रेस नीत संप्रग गठबंधन की सरकार थी। तब चुनाव आयोग पर भाजपा के किसी तथाकथित प्रभाव होने का प्रश्न ही नहीं उठ सकता। क्या राहुल तब भी अपनी इस करारी के लिए किसी ‘मैच-फिक्सिंग’ का आरोप लगाएंगे?

    तब कांग्रेस की पराजय— अपार भ्रष्टाचार, नीतिगत पंगुता, बार-बार होते जिहादी हमले, मनगढ़ंत ‘भगवा आतंकवाद’ का नैरेटिव गढ़ने और बहुसंख्यक हिंदुओं के प्रति एकतरफा सांप्रदायिक दृष्टिकोण अपनाने का परिणाम था। इस असंतोष से 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को ऐतिहासिक विजय मिली। तीन दशक बाद किसी एक पार्टी को पहली बार स्पष्ट पूर्ण बहुमत मिला। भाजपा के प्रति जनसमर्थन 2019 में और प्रबल हुआ और उसने पहले से अधिक सीटों के साथ फिर बहुमत प्राप्त किया। सत्ता-विरोधी लहर, विपक्षी एकजुटता, भारत-विरोधी शक्तियों के प्रपंचों और नकारात्मक प्रचार के बावजूद 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार जनमत पाने में सफल रहे।

    कांग्रेस को यह समझने की आवश्यकता है कि भाजपा को मिल रहा जनसमर्थन न केवल प्रधानमंत्री मोदी की निर्णायक नेतृत्वशैली, बल्कि उनकी सरकार के पारदर्शी प्रशासन, जमीनी कार्य, नीतिगत प्रतिबद्धता और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के कारण है। यदि भाजपा से किसी को नाराजगी भी है, तो वह कांग्रेस के बजाय अन्य विकल्प खोजते है। कांग्रेस का पारंपरिक मतदाता आज ‘आप’ जैसे दलों की ओर मुख कर चुका है— दिल्ली और पंजाब इसका प्रमाण हैं। यही नहीं, कांग्रेस के अधिकांश सहयोगी दल— सपा, राजद, तृणमूल, द्रमुक, राकांपा आदि ने कांग्रेस की ही सियासी जमीन पर सेंधमारी करके अपनी जड़ें जमाई हैं।

    कांग्रेस 1971 से लगातार ‘गरीबी हटाओ’ का नारा देती रही, किंतु उस अवधि में देश में निर्धनों की संख्या निरंतर बढ़ती गई। इसका मूल कारण था— व्यवस्था में गहराई तक समाया भ्रष्टाचार, व्यापक कालाबाजारी और सरकार के शीर्ष स्तर पर जनकल्याणकारी योजनाओं हेतु आवंटित संसाधनों की बेशर्मी से की गई लूट-खसोट। इसके विपरीत, मोदी सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त जनकल्याणकारी योजनाएं— जनधन, उज्ज्वला, जल, आवास, आयुष्मान, निःशुल्क खाद्यान्न आदि का लाभ बिना जातिगत-मजहबी मतभेद के सीधा लाभार्थियों तक पहुंचा। विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट कहती है कि 2011-12 में जहां अत्यंत गरीबों की संख्या 27.1% थी, वह 2022-23 तक घटकर 5.3% रह गई। लगभग 27 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि नीति पारदर्शी, उद्देश्य-केंद्रित और भ्रष्टाचारमुक्त हो, तो समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी परिवर्तन संभव है।

    आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आतंरिक सुरक्षा के मोर्चे पर बीते 11 वर्षों में दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ। जम्मू-कश्मीर में धारा 370-35ए के उन्मूलन ने न केवल राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया, साथ ही आतंकवाद और सीमापार घुसपैठ में गिरावट भी लाई। नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चला है। भारतीय सेना अब किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ उत्तर देने को स्वतंत्र है। सर्जिकल स्ट्राइक और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। मोदी कार्यकाल में भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद भी पुनर्स्थापित हुआ है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक का पुनर्निर्माण और योग की वैश्विक मान्यता आदि— इसका जीवंत प्रमाण है।

    राहुल गांधी भारतीय राजनीति के लिए जैसे अनुपयुक्त प्रतीत होते हैं। उन्हें जो पद वर्षों से मिला है, वह न अनुभव का परिणाम है, न बुद्धिमत्ता का— बल्कि वंशवादी दंभ और स्वयं को ‘विशेष’ मानने के कारण है। 2013 में अपनी ही सरकार के अध्यादेश को सार्वजनिक रूप से खारिज करके राहुल ने अपरिपक्वता और अलोकतांत्रिक होने का प्रमाण दिया था। इसके चलते जब 2023 में मानहानि के मामले में दोषसिद्धि हुए, तो वे तुरंत अयोग्य ठहरा दिए गए। अपनी अनेकों गलतियों से राहुल नहीं सीखते। मोदी विरोध में वे कभी सैन्य कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लगाते हैं, तो कभी ऐसे वक्तव्य देते हैं, जिनका पाकिस्तान अपने भारत-विरोधी नैरेटिव में उपयोग करता है।

    सच तो यह है कि राहुल एक ऐसी छाया बन चुके हैं, जो कांग्रेस के अस्तित्व पर ही भारी पड़ती जा रही है। जब तक पार्टी उनके आभामंडल से बाहर नहीं निकलेगी, तब तक कांग्रेस का संकट समाप्त नहीं होगा।

    स्तंभकार ‘ट्रिस्ट विद अयोध्या: डिकॉलोनाइजेशन ऑफ इंडिया’ और ‘नैरेटिव का मायाजाल’ पुस्तक के लेखक है।
    संपर्क:- punjbalbir@gmail.com