Author: Smgrabharat

  • SCO समिट में राजनाथ सिंह का बड़ा फैसला, भारत की आतंकवाद नीति से नहीं किया समझौता

    SCO समिट में राजनाथ सिंह का बड़ा फैसला, भारत की आतंकवाद नीति से नहीं किया समझौता

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 26 जून: चीन के क़िंगदाओ में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपना कड़ा रुख़ स्पष्ट कर दिया है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उस संयुक्त दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, जिसमें आतंकवाद पर भारत के रुख़ को कमज़ोर करने की कोशिश की गई थी। इस दस्तावेज़ में कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले का ज़िक्र नहीं था, लेकिन इसमें बलूचिस्तान का उल्लेख किया गया था, जिसे भारत पर अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाने की एक कोशिश माना जा रहा है।

    पहलगाम हमले की अनदेखी

    रिपोर्ट्स के अनुसार, 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। यह हमला पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने किया था। भारत ने इस हमले का ज़ोरदार विरोध किया, लेकिन चीन की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन के दस्तावेज़ में इस घटना का कोई उल्लेख नहीं किया गया।

    चीन और पाकिस्तान का पैंतरा

    सूत्रों के मुताबिक, चीन और पाकिस्तान ने मिलकर आतंकवाद के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की। दस्तावेज़ में बलूचिस्तान का ज़िक्र करते हुए भारत पर पाकिस्तान में अशांति फैलाने का परोक्ष रूप से आरोप लगाया गया। भारत ने इस चाल को ख़ारिज कर दिया और साफ़ कर दिया कि वह आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं करेगा।

    ‘डबल स्टैंडर्ड’ पर राजनाथ सिंह का वार

    अपने संबोधन में, राजनाथ सिंह ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि कुछ देश आतंकवाद को अपनी नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं और आतंकवादियों को पनाह देते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आतंकवाद से लड़ने में ‘दोहरे मापदंड’ के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के गढ़ अब सुरक्षित नहीं हैं और भारत उन्हें निशाना बनाने में नहीं हिचकेगा। यह बयान भारत द्वारा पहलगाम हमले के बाद की गई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी कार्रवाई को दर्शाता है।

    कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हुआ

    भारत के मज़बूत रुख़ के कारण SCO की बैठक के बाद कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। यह दर्शाता है कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नीति स्पष्ट है और वह किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार आतंकवाद के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है और इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई का विरोध किया है।

  • उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान बस हादसा: 18 यात्री प्रभावित, 3 की मौत

    उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान बस हादसा: 18 यात्री प्रभावित, 3 की मौत

    समग्र समाचार सेवा
    देहरादून/उदयपुर, 24 जून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पर गए राजस्थान के श्रद्धालुओं के साथ एक बड़ा हादसा हो गया है। गुरुवार सुबह रुद्रप्रयाग-बदरीनाथ हाइवे पर धोलतीर इलाके में उदयपुर से आई एक टेंपो ट्रेवलर बस अनियंत्रित होकर अलकनंदा नदी की गहरी खाई में गिर गई। इस बस में कुल 18 लोग सवार थे, जिनमें से 10 को अब तक बाहर निकाला जा चुका है।

    हादसे का मंजर

    यह हादसा इतना भीषण था कि बस अलकनंदा नदी के तेज बहाव में बह गई। उत्तराखंड पुलिस के अनुसार, इस दुर्घटना में 3 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 5 अन्य यात्रियों की तलाश जारी है। नदी का बहाव तेज होने के कारण अभी तक बस का भी कोई पता नहीं चल पाया है। आशंका है कि बाकी लोग भी बस के साथ पानी में बह गए हैं।

    उदयपुर और गोगुंदा के यात्री

    हादसे का शिकार हुए सभी 18 यात्री राजस्थान के उदयपुर और गोगुंदा इलाके के रहने वाले थे, जो चारधाम यात्रा पर निकले थे। रुद्रप्रयाग पुलिस ने हादसे के तुरंत बाद प्रभावित यात्रियों के परिजनों से संपर्क किया है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दुर्घटना की खबर मिलते ही उदयपुर और गोगुंदा में शोक का माहौल है।

    राहत और बचाव कार्य

    दुर्घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ (SDRF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और युद्ध स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। बचाव दल नदी में लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने जताया दुख

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “जनपद रुद्रप्रयाग में एक टेंपो ट्रैवलर के नदी में गिरने का समाचार अत्यंत दुःखद है। SDRF सहित अन्य बचाव दलों द्वारा युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य किया जा रहा है। इस संबंध में निरंतर स्थानीय प्रशासन से संपर्क में हूं। ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं।”

  • आंध्र प्रदेश हत्या कांड: पत्नी, प्रेमी और सास की खौफनाक साजिश

    आंध्र प्रदेश हत्या कांड: पत्नी, प्रेमी और सास की खौफनाक साजिश

    समग्र समाचार सेवा
    कर्नूल, आंध्र प्रदेश 25 जून -तेलंगाना के गडवाल निवासी 26 वर्षीय तेजेश्वर की हत्या की सनसनीखेज साजिश ने पूरे आंध्र प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। यह मामला न सिर्फ भरोसे और रिश्तों की नींव पर सवाल उठाता है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे पढ़ी-लिखी नई पीढ़ी भावनात्मक नियंत्रण खोकर अपराध की ओर बढ़ रही है।

    तेजेश्वर की शादी महज एक महीने पहले, 18 मई को कर्नूल निवासी 23 वर्षीय ऐश्वर्या से हुई थी। परिवार वालों के अनुसार शादी के तुरंत बाद ही ऐश्वर्या के व्यवहार में बदलाव देखने को मिला। वह घंटों फोन पर बात करती और पति से भावनात्मक रूप से कटी-कटी रहती। पहले माना गया कि वह अपने परिवार से बात करती है, लेकिन बाद में शक गहराने लगा कि वह किसी गैर मर्द के साथ संबंध में है।

    खौफनाक साजिश का खुलासा
    पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ऐश्वर्या का प्रेम संबंध तिरुमल राव नामक एक विवाहित बैंक मैनेजर से था, जो उसी बैंक में काम करता था जहां ऐश्वर्या की मां सुजाता सफाईकर्मी थी। ऐश्वर्या कुछ समय के लिए अपनी मां की जगह बैंक में काम करने गई थी, वहीं से यह रिश्ता शुरू हुआ। हैरानी की बात यह है कि राव का शारीरिक संबंध ऐश्वर्या और उसकी मां दोनों से था।

    हत्या की योजना भी इन तीनों ने मिलकर बनाई। 18 जून को एक भूमि सर्वेक्षण के बहाने तेजेश्वर को कर्नूल बुलाया गया। वहां कार में बैठे तेजेश्वर का पहले गला रेत दिया गया और फिर पेट में चाकू घोंपा गया। हत्या के बाद उसका शव नहर में फेंक दिया गया और वीडियो कॉल पर शव को तिरुमल राव को दिखाया गया।

    डिजिटल सबूतों ने खोली पोल
    पुलिस ने ऐश्वर्या और तिरुमल राव के बीच फरवरी से जून के बीच 2000 से अधिक कॉल रिकॉर्ड किए। राव ने अपनी पत्नी को भी मारने की योजना बनाई थी और हत्या के बाद ऐश्वर्या के साथ लद्दाख भागने के लिए 20 लाख रुपये का कर्ज लिया था। लेकिन उसका पूरा प्लान सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल के कारण फेल हो गया।

    8 लोग गिरफ्तार, पूर्व पुलिसकर्मी भी शामिल
    पुलिस ने इस मामले में कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें ऐश्वर्या, उसकी मां सुजाता, तिरुमल राव और राव के सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी पिता शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक श्रीनिवास ने पुष्टि की कि हत्या कार के अंदर की गई थी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को पकड़ लिया गया है।

    यह मामला समाज को एक गंभीर संदेश देता है कि भावनाओं पर नियंत्रण न होने पर कैसे शिक्षित लोग भी हैवानियत की हद पार कर सकते हैं। विवाह जैसे पवित्र रिश्ते को छल और लालच से कलंकित करने वाले इस अपराध की हर स्तर पर निंदा की जा रही है।

  • भारत में संविधान सर्वोपरि है, संसद नहीं: मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई

    भारत में संविधान सर्वोपरि है, संसद नहीं: मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई

    समग्र समाचार सेवा
    अमरावती, 26 -जून भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनके अनुसार भारत में संविधान सर्वोपरि है, न कि संसद। उन्होंने यह विचार बुधवार को महाराष्ट्र के अमरावती शहर में अपने सम्मान समारोह के दौरान व्यक्त किए।

    मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, “लोगों में यह धारणा प्रचलित है कि संसद सर्वोच्च है, लेकिन मेरी राय में भारत का संविधान ही सर्वोपरि है। लोकतंत्र के तीनों स्तंभ — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका — संविधान के अधीन कार्य करते हैं।”

    उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिपादित ‘मूल संरचना सिद्धांत’ (Basic Structure Doctrine) का हवाला देते हुए कहा कि संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार है, लेकिन वह इसकी मूल संरचना को नहीं बदल सकती।

    न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सिर्फ सरकार के खिलाफ आदेश पारित करना किसी जज को स्वतंत्र नहीं बनाता। उन्होंने कहा, “हम केवल शक्तिशाली नहीं हैं, हम पर एक कर्तव्य भी है — नागरिकों के अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना।”

    मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि एक न्यायाधीश को इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि लोग उसके निर्णयों के बारे में क्या सोचेंगे। “निर्णय लेते समय हमें स्वतंत्र रूप से सोचना चाहिए। जनभावनाएं हमारी निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होनी चाहिए।”

    उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने फैसलों और काम के ज़रिए बोलते हैं और हमेशा संविधान में निहित मौलिक अधिकारों की रक्षा में खड़े रहे हैं।

    उन्होंने ‘बुलडोजर न्याय’ के खिलाफ दिए गए अपने फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि “रहने का अधिकार (Right to Shelter) सर्वोपरि है।”

    इस मौके पर उन्होंने अपने बचपन की यादें भी साझा कीं। उन्होंने कहा, “मैं बचपन में आर्किटेक्ट बनना चाहता था, लेकिन मेरे पिता की इच्छा थी कि मैं वकील बनूं। वे खुद स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के कारण वकालत नहीं कर पाए थे।”

    मुख्य न्यायाधीश गवई पिछले महीने भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण कर चुके हैं।

  • एयर इंडिया क्रैश’: भावनात्मक असंतुलन , शिक्षित युवाओं की तबाही का कारण

    एयर इंडिया क्रैश’: भावनात्मक असंतुलन , शिक्षित युवाओं की तबाही का कारण

    पूनम शर्मा
    “पढ़ाई तो हो गई, पर इंसान नहीं बने!
    आज हम उस दौर में जी रहे हैं जहाँ युवा पीढ़ी पहले से कहीं अधिक शिक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम और कॉर्पोरेट जगत में स्थापित है। लेकिन हालिया घटनाएँ  इस बात की गवाही दे रही हैं कि सिर्फ शिक्षा ही पर्याप्त नहीं, यदि उसके साथ संस्कार, संवेदनशीलता और भावनात्मक संतुलन नहीं हो, तो वही पढ़े-लिखे युवा समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं।

    हाल ही में एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद एक चौंकाने वाली खबर सामने आई — चेन्नई की एक युवा महिला इंजीनियर रेने जोशिल्दा को देशभर में बम धमकियों के पीछे गिरफ्तार किया गया। यह युवती कोई बेरोजगार या उपद्रवी नहीं थी, बल्कि एक मल्टीनेशनल कंपनी में रोबोटिक्स इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थी। उसने मई-जून 2025 के बीच 21 से अधिक धमकी भरे ईमेल देश के विभिन्न राज्यों को भेजे।

    प्यार में धोखा, और समाज को दी सज़ा?
    रेने के अनुसार, वह अपने सहकर्मी दिविज प्रभाकर से एकतरफा प्रेम करती थी। लेकिन जब दिविज ने किसी और से विवाह कर लिया, तो यह युवती उस ठेस को सहन नहीं कर पाई और उसने पूरे देश को अपनी पीड़ा का गवाह बनाने का फैसला कर लिया। उसने डार्क वेब, फर्जी ईमेल और VPN के माध्यम से अपनी पहचान छिपाकर बम धमकी जैसे घिनौने कृत्य किए।

    यह मामला दिखाता है कि एक असफल प्रेम संबंध कैसे एक शिक्षित और प्रतिष्ठित युवती को मानसिक असंतुलन की ओर धकेल सकता है, और जब उस असंतुलन को मार्गदर्शन या उपचार नहीं मिलता, तो वह समाज के लिए विनाशकारी बन जाता है।

    पढ़ाई का क्या लाभ जब भावनाएँ काबू में  न हों ?
    एक इंजीनियर जिसे तार्किक सोच, टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल और प्रोफेशनल एथिक्स सिखाए जाते हैं, जब वही युवती भावनात्मक रूप से इतना असंतुलित हो जाए कि आतंक फैलाने लगे, तो यह केवल एक व्यक्ति की विफलता नहीं बल्कि हमारे शिक्षा तंत्र और पारिवारिक मूल्यों की असफलता भी है।

    शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्रियां हासिल करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक, सहनशील व्यक्ति और संवेदनशील इंसान बनाना भी है। लेकिन क्या आज की शिक्षा प्रणाली यह सब सिखा पा रही है?

    काउंसलिंग क्यों नहीं, अपराध क्यों?
    रेने के पास कई विकल्प थे—वह चाहती तो काउंसलिंग, मनोचिकित्सा या पारिवारिक समर्थन का सहारा ले सकती थी। लेकिन उसने वह रास्ता चुना जो सबसे खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना था। इसका कारण यही है कि आज के युवाओं को भावनात्मक समझ और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में कोई शिक्षा नहीं दी जाती। वे यह नहीं सीखते कि असफलता से कैसे निपटा जाए, या अस्वीकार किए जाने की स्थिति में संतुलन कैसे बनाए रखें।

    यह सिर्फ रेने की कहानी नहीं है…
    ऐसे कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। इसी वर्ष कुछ माह पूर्व  मेरठ की मुस्कान नाम की युवती ने भी प्रेमी के साथ मिलकर  पति  हत्या की  थी और ताज़ातरीन घटना सोनम का जिसने विवाह के मात्र कुछ दिन बाद ही अपने पति की हत्या कर दी । ये घटनाएँ  एक नई प्रवृत्ति की ओर इशारा कर रही हैं — जब युवा अपनी निजी असफलताओं का बदला पूरे समाज से लेने लगे हैं।

    ये घटनाएँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हमारे युवा भावनात्मक रूप से इतने असहाय हो चुके हैं कि वे जीवन के सामान्य संघर्षों को भी झेल नहीं सकते और आपराधिक मनोवृत्ति कैसे उनपर  मानसिक रूप से हावी होती जा रही है ।

    माता-पिता की भी भूमिका 
    अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की शैक्षणिक सफलता को ही सब कुछ मान लेते हैं। वे उन्हें महँगे  स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और करियर काउंसलिंग में भेजते हैं, लेकिन भावनात्मक शिक्षा, आत्म-नियंत्रण, नैतिकता और करुणा जैसे मूल्यों की शिक्षा देना भूल जाते हैं वह कौन देगा ?

    जब कोई बच्चा जीवन की पहली हार या ठेस से जूझता है, तो यदि उसे घर से सही मार्गदर्शन न मिले, तो वह इंटरनेट, डार्क वेब, या आत्म-विनाश की राह पकड़ सकता है। यह माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों से केवल अपेक्षा न करें, बल्कि संवाद भी करें, सुनें, और उन्हें समझाएँ  कि जीवन में हार भी सीखने का एक चरण होती है।

    आधुनिक समाज में पुराने मूल्यों की आवश्यकता
    आज जबकि तकनीक और विज्ञान ने हमें चाँद  पर पहुँचा  दिया है, वहीं संवेदनशीलता, सहानुभूति और आत्म-संयम जैसे गुणों की अधिक आवश्यकता है। यदि एक इंजीनियर बम की धमकी देकर अपने निजी दर्द को व्यक्त करता है, तो यह संकेत है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था में एक गंभीर खामी है।

    हमें अपने शिक्षा तंत्र में मानवता, मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श, और नैतिकता को भी उतना ही महत्व देना होगा जितना कि मैथ्स, फिजिक्स और कोडिंग को देते हैं।

    क्या यह है “नए भारत ” की युवा सोच?
    नए भारत “” की परिकल्पना में यदि हमारे युवा इतना स्वार्थी, असंवेदनशील और आत्म-केंद्रित बनते जा रहे हैं कि वे दूसरों की जान से खेलते हुए अपने दुख को “जस्टिफाई” करते हैं, तो यह भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक है।

    हमें आज ही यह विचार करना होगा कि क्या हम केवल पेशेवरों की फौज तैयार कर रहे हैं या जिम्मेदार नागरिक भी गढ़ रहे हैं?

    रेने जोशिल्दा का मामला सिर्फ एक युवती की गलती नहीं, बल्कि पूरे समाज के आत्म-विश्लेषण की पुकार है। यह एक चेतावनी है कि अगर हमने समय रहते शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, संवाद और मानसिक स्वास्थ्य की तरफ ध्यान नहीं दिया, तो ऐसे “शिक्षित अपराधी” हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करते रहेंगे।

    यह वक्त है संभलने का — माता-पिता, शिक्षक, सरकार और समाज को मिलकर शिक्षा का सही अर्थ और उद्देश्य समझाने की ज़रूरत है। वरना तकनीक की ताकत और भावनाओं की कमजोरी मिलकर समाज के लिए विस्फोटक साबित होगी।

    “पढ़ाई का मतलब इंसान बनना है, सिर्फ प्रोफेशनल नहीं।”
    ― यही संदेश आज की हर घटना हमें दे रही है।

  • 26 जून दैनिक राशिफल एवं आज का पंचांग

    26 जून दैनिक राशिफल एवं आज का पंचांग

    मेष🐐 (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
    आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन पिछले कुछ दिनों से बेहतर रहेगा। कार्य क्षेत्र पर अतिरिक्त आय के साधन बनेंगे। रुके हुए कार्य पूर्ण होने से भी धन लाभ होगा। सामाजिक गतिविधियों में पूरा समय ना दे पाने से लोगो से किसी से नाराजगी रहेगी। संध्या का समय मनोरंजन वाला रहेगा। उत्तम भोजन के साथ गृहस्थ का सुख मिलेगा। सन्तानो के ऊपर खर्च करना पड़ेगा। किसी गुप्त चिंता के कारण बेचैनी भी रह सकती है। सेहत आज अच्छी बनी रहेगी।

    वृष🐂 (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
    आज भी दिन का अधिकांश समय शांति से व्यतीत होगा। थोड़ी आर्थिक परेशानियां रह सकती है परंतु मानसिक रूप से दृढ़ रहेंगे। जिस भी कार्य को करने की ठानेंगे उसे हानि-लाभ की परवाह किये बिना पूर्ण करके छोड़ेंगे। कार्य क्षेत्र पर अन्य व्यक्ति अथवा भगीदारो की दखलंदाजी से थोड़ी परेशानी एवं बहस हो सकती है। किसी मांगलिक आयोजन में सम्मिलित होने का अवसर भी मिलेगा। बाहर की अपेक्षा घर में समय बिताना पसंद करेंगे। संध्या के समय धन लाभ हो सकता है।

    मिथुन👫 (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हा)
    आज के दिन आप कार्य क्षेत्र से कुछ समय निकालकर मित्र परिवार के साथ मनोरंजन में व्यतीत करेंगे परन्तु आज गलतफहमियों से दूर रहना अति आवश्यक है व्यर्थ के टकराव होने की संभावना है। परोपकार का शुभ फल भी मिलने से प्रसन्नता भी रहेगी। कार्य क्षेत्र पर कम समय देने के बाद भी संतोषजनक धन लाभ हो जाएगा। दाम्पत्य जीवन पहले से बेहतर रहेगा। सन्तानो की प्रगति की सूचना मिलेगी। स्वयं एवं परिजनों की सेहत का विशेष ध्यान रखें। आयवश्यक वस्तुओ पर ही खर्च करेंगे।

    कर्क🦀 (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
    आज आप अधिक लापरवाह रहने के कारण हानि उठा सकते है। प्रातः काल से ही यात्रा पर्यटन की योजना बनेगी परन्तु इसमें व्यवधान भी आएंगे। कार्य क्षेत्र पर अल्प लाभ से संतोष करना पड़ेगा। नौकरों के ऊपर ज्यादा विश्वास हानि का कारण बन सकता है। वाणी में कठोरता रहने से घर में कलह रहेगी। आर्थिक लेन-देन सोच समझ कर करें। पारिवारिक सदस्य अथवा अन्य भी अपने काम से ही बात करेंगे। संध्या के समय किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के बनने से प्रसन्न रहेंगे।

    सिंह🦁 (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
    आज का दिन मिला-जुला रहेगा। सेहत लगभग सामान्य रहेगी। आज किसी अनुबंध के आगे रुकने से धन लाभ की कामना अधूरी रहेगी। व्यवसाय के ऊपर अधिक ध्यान देने के बाद भी कार्य विलम्ब से पूर्ण होंगे लाभ के कई अवसर मिलेंगे परन्तु धनागम के लिए थोड़ी प्रतीक्षा करनी पड़ेगी। अधिकारी वर्ग भी गर्म हो सकते है। सफ़ेद वस्तुओ के कार्य से जुड़े जातको को आकस्मिक धन लाभ अथवा नए अनुबंध मिल सकते है। परिवार के लिए आप महत्त्वपूर्ण रहेंगे। व्यर्थ की यात्रा हो सकती है।

    कन्या👩 (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
    आज के दिन आप व्यापारिक गतिविधियों की व्यस्तता के चलते परिवार के लिए ज्यादा समय नहीं निकाल पाएंगे। वाणी एवं व्यवहार के बल पर कार्यो में थोड़े परिश्रम से अधिक सफलता मिल सकेगी। मनोबल भी आज बढ़ा हुआ रहेगा। परंतु आज आपको कोई ना कोई कमी भी अनुभव होगी। धन का आगमन होने से थकान भूल जाएंगे। संतानों पर ध्यान देंने की आवश्यकता है। स्त्री से सम्बन्ध भावनात्मक रहेंगे। सुख के साधनों पर खर्च करेंगे।

    तुला⚖️ (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
    आज का दिन आपको सुख शांति प्रदान करेगा। कुछ दिनों से चल रही मानसिक खींच तान कम होने से राहत अनुभव होगी। कार्य क्षेत्र पर केवल धन लाभ पाने के उद्देश्य से कार्य ना करे व्यवहार में कुशलता एवं मिठास रखने से अप्राप्त लक्ष्मी भी प्राप्त कर सकते है। पारिवारिक जीवन में आनंद रहेगा। मित्र रिश्तेदारो से घर में चहल पहल बनेगी कही घूमने की योजना बन सकती है। धन लाभ में विलम्ब होगा परन्तु कार्य रुकेंगे नहीं। सेहत में थोड़ा उतार-चढ़ाव लगा रहेगा।

    वृश्चिक🦂 (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
    आज का दिन मिश्रित फल देगा पूर्वार्ध में सेहत थोड़ी नरम रह सकती है जिसके कारण आलस्य भी रहेगा। काम बेमन से करने पड़ेंगे व्यवहार में भी रुखापन रहने से संबंधो में खटास रहेगी। धीरे धीरे स्थिति में सुधार होगा कार्य स्थल पर महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने से व्यस्तता बढ़ेगी। अधिकारी वर्ग आज आप पर ज्यादा भरोसा दिखाएँगे। व्यवसायी वर्ग आज चाह कर भी बेहतर सेवा नहीं दे पाएंगे जिस कारण आलोचना हो सकती है। पुराने कार्यो को पूर्ण करने के बाद ही नए कार्य हाथ लें। परिवार में तनाव रह सकता है।

    धनु🏹 (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
    व्यवसाय के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयास आज फलीभूत होने से आर्थिक समस्याओं का समाधान होगा। बेरोजगार व्यक्तियों को भी रोजगार मिलने की सम्भावना अधिक है। आपसे वाद-विवाद में कोई नहीं जीत पायेगा। बड़बोलेपन के कारण महिलाओं से मतभेद हो सकते है। दिन के उत्तरार्ध में कार्य भार बढ़ने से कमर अथवा अन्य अंगों में दर्द की शिकायत रहेगी। पारिवारिक वातावरण में उतार-चढ़ाव आएंगे फिर भी आनंद रहेगा। आकस्मिक लाभ होगा।

    मकर🐊 (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
    आज के दिन आप भावनाओ में बहकर अनुचित कदम उठा सकते है। लोगो के बहकावे में ना आये अन्यथा मान हानि कोर्ट-कचहरी की नौबत आ सकती है। प्रेम प्रसंगों से आज दूरी बनाना ही बेहतर रहेगा। आलसी प्रवृति का लाभ प्रतिस्पर्धी उठा सकते है सावधान रहें। धन लाभ के लिये आज विशेष परिश्रम करना पड़ेगा फिर भी संतोष जनक लाभ हो जाएगा। घर में भाई बंधू अथवा स्त्री से अनबन हो सकती है। सरकारी कार्यो में सफलता मिलेगी। जोड़ो सम्बन्धित समस्या रह सकती है।

    कुंभ🍯 (गू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
    आज के दिन ग्रह स्थिति में थोड़ा बदलाव आने से आपको घरेलु मामलो में सफलता मिलेगी। परन्तु आज कार्य क्षेत्र पर अन्य व्यक्ति आपकी कमजोरी का फायदा उठा सकता है। आज किसी के आगे समर्पण कर सकते है इसका फल शुभ ही रहेगा। बाहरी स्थान के कार्यो में सफलता की संभावना ज्यादा रहेगी। नए अनुबंध भी मिल सकते है। पत्नी अथवा किसी अन्य महिला के भाग्य से लाभ होगा। अविवाहितो कि लिए नए रिश्ते आएंगे। मानसिक रूप से संतोषी रहेंगे।

    मीन🐳 (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
    आज दिन के आरम्भ में बनते कार्यो में रुकावट आने से अधिक भाग-दौड़ करनी पड़ेगी। मध्यान तक थोड़े बहुत कार्य सफल होने से धन की आमद होगी परन्तु खर्च भी अधिक रहने से बचत नहीं कर पाएंगे। दोपहर के बाद से घर एवं बाहर सहयोगी वातावरण बनने से कार्यो में सरलता रहेगी। समय से पहले ही कार्यो को पूर्ण करने में जुट जाएँगे संध्या के समय तक अधिकांश कार्य पूर्ण होने से धन की आवक होने लगेगी। धार में शांति रहेगी सामाजिक क्षेत्र से प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

    🌺  श्री राम जानकी पञ्चाङ्ग 🌺

    🌺गुरुवार, २६ जून २०२५🌺

    सूर्योदय: 🌄 ०५:३९

    सूर्यास्त: 🌅 ०७:२०

    चन्द्रोदय: 🌝 ०५:४५

    चन्द्रास्त: 🌜२०:३८

    अयन 🌘 दक्षिणायणे (उत्तरगोलीय)

    ऋतु: ⛈️ वर्षा 

    शक सम्वत: 👉 १९४७ (विश्वावसु)

    विक्रम सम्वत: 👉 २०८२ (कालयुक्त)

    मास 👉 आषाढ 

    पक्ष 👉 शुक्ल 

    तिथि 👉 प्रतिपदा (१३:२४ से द्वितीया)

    नक्षत्र 👉 आर्द्रा (०८:४६ से पुनर्वसु)

    योग 👉 ध्रुव (२३:४० से व्याघात)

    प्रथम करण 👉 बव (१३:२४ तक)

    द्वितीय करण 👉 बालव (२४:१७ तक)

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    ॥ गोचर ग्रहा: ॥ 

    🌖🌗🌖🌗

    सूर्य   🌟 मिथुन 

    चंद्र    🌟 कर्क (२५:३९ से)

    मंगल 🌟 सिंह (उदित, पूर्व, मार्गी)

    बुध   🌟 कर्क (उदय, पश्चिम, मार्गी)

    गुरु   🌟 मिथुन (अस्त, पश्चिम, मार्गी)

    शुक्र  🌟 मेष (अस्त, पश्चिम, मार्गी)

    शनि  🌟 मीन (उदय, पूर्व, मार्गी)

    राहु   🌟 कुम्भ 

    केतु   🌟 सिंह

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    शुभाशुभ मुहूर्त विचार

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    अभिजित मुहूर्त 👉 ११:५२ से १२:४८

    अमृत काल 👉 २९:०६ से ०६:३६ 

    सर्वार्थ सिद्धि योग 👉 ०८:४६ से २९:१८

    विजय मुहूर्त 👉 १४:४१ से १५:३७

    गोधूलि मुहूर्त 👉 १९:२१ से १९:४१

    सायाह्न सन्ध्या 👉 १९:२२ से २०:२२

    निशिता मुहूर्त 👉 २४:०० से २४:४०

    राहुकाल 👉 १४:०५ से १५:५१

    राहुवास 👉 दक्षिण

    यमगण्ड 👉 ०५:१७ से ०७:०३

    दुर्मुहूर्त 👉 ०९:५९ से १०:५५

    होमाहुति 👉 सूर्य

    दिशा शूल 👉 दक्षिण

    अग्निवास 👉 पृथ्वी

    चन्द्र वास 👉 पश्चिम (उत्तर २५:३९ से)

    शिववास 👉 श्मशान में (१३:२४ से गौरी के साथ)

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    ☄चौघड़िया विचार☄

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    ॥ दिन का चौघड़िया ॥ 

    १ – शुभ      २ – रोग

    ३ – उद्वेग     ४ – चर

    ५ – लाभ     ६ – अमृत

    ७ – काल     ८ – शुभ

    ॥रात्रि का चौघड़िया॥ 

    १ – अमृत     २ – चर

    ३ – रोग        ४ – काल

    ५ – लाभ      ६ – उद्वेग

    ७ – शुभ       ८ – अमृत

    नोट👉 दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है। प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है। 

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    शुभ यात्रा दिशा

    🚌🚈🚗⛵🛫

    उत्तर-पश्चिम (दही का सेवन कर यात्रा करें)

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    तिथि विशेष

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    आषाढ शुक्ल पक्ष आरम्भ, गुप्त नवरात्रि आरम्भ, चन्द्र दर्शन, मनोरथ द्वितीया (बंगाल) आदि।

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    आज जन्मे शिशुओं का नामकरण 

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    आज ०८:४६ तक जन्मे शिशुओ का नाम आर्द्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (छ) नामाक्षर से तथा इसके बाद जन्मे शिशुओ का नाम पूनर्वसु नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ चरण अनुसार क्रमशः (के, को, ह, ही) नामाक्षर से रखना शास्त्र सम्मत है।

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    उदय-लग्न मुहूर्त

    मिथुन – २८:३६ से ०६:५१

    कर्क – ०६:५१ से ०९:१२

    सिंह – ०९:१२ से ११:३१

    कन्या – ११:३१ से १३:४९

    तुला – १३:४९ से १६:१०

    वृश्चिक – १६:१० से १८:२९

    धनु – १८:२९ से २०:३३

    मकर – २०:३३ से २२:१४

    कुम्भ – २२:१४ से २३:४०

    मीन – २३:४० से २५:०३+

    मेष – २५:०३+ से २६:३७+

    वृषभ – २६:३७+ से २८:३२+

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    पञ्चक रहित मुहूर्त

    चोर पञ्चक – ०५:१७ से ०६:५१

    शुभ मुहूर्त – ०६:५१ से ०८:४६

    रोग पञ्चक – ०८:४६ से ०९:१२

    शुभ मुहूर्त – ०९:१२ से ११:३१

    मृत्यु पञ्चक – ११:३१ से १३:२४

    अग्नि पञ्चक – १३:२४ से १३:४९

    शुभ मुहूर्त – १३:४९ से १६:१०

    रज पञ्चक – १६:१० से १८:२९

    शुभ मुहूर्त – १८:२९ से २०:३३

    चोर पञ्चक – २०:३३ से २२:१४

    शुभ मुहूर्त – २२:१४ से २३:४०

    रोग पञ्चक – २३:४० से २५:०३+

    चोर पञ्चक – २५:०३+ से २६:३७+

    शुभ मुहूर्त – २६:३७+ से २८:३२+

    रोग पञ्चक – २८:३२+ से २९:१८+

    आचार्य पं. अशोक मिश्रा मुम्बई
    मो.9870190475

  • बिहार चुनाव 2025: वीआईपी, आरएलएम और जन सुराज को मिले चुनाव चिन्ह

    बिहार चुनाव 2025: वीआईपी, आरएलएम और जन सुराज को मिले चुनाव चिन्ह

    कुमार राकेश

    पटना, 26 जून:  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है और इसी के साथ पार्टियों को अपने चुनाव चिन्हों का आवंटन भी शुरू हो गया है। हाल ही में, चुनाव आयोग ने कुछ प्रमुख दलों के चुनाव चिन्हों की पुष्टि की है, जिससे उनकी चुनावी तैयारियों को नई गति मिली है।

    मुकेश सहनी की वीआईपी को ‘नाव’ वापस मिली

    विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के सुप्रीमो मुकेश सहनी के लिए यह एक बड़ी जीत है। उनकी पार्टी को एक बार फिर से ‘नाव’ का चुनाव चिन्ह मिल गया है। यह चिन्ह वीआईपी के लिए केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का विषय है। पार्टी इसे बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के संविधान की जीत मान रही है। मुकेश सहनी ने पहले ही घोषणा की है कि वीआईपी राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ महागठबंधन का हिस्सा बनकर चुनाव लड़ेगी।

    उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम को ‘गैस सिलेंडर’ मिला

    राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को स्थायी रूप से ‘गैस सिलेंडर’ का चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है। इस फैसले से आरएलएम कार्यकर्ताओं और नेताओं में खुशी की लहर है। यह चिन्ह पार्टी को अपनी पहचान स्थापित करने में मदद करेगा और मतदाताओं के बीच एक स्पष्ट संदेश देगा।

    प्रशांत किशोर के जन सुराज को ‘स्कूल बैग’ मिला

    जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को भी चुनाव आयोग से बड़ी राहत मिली है। उनकी पार्टी को ‘स्कूल बैग’ का चुनाव चिन्ह बरकरार रखने की अनुमति मिल गई है। यह चिन्ह जन सुराज के लिए एक मजबूत पहचान के रूप में काम करेगा।

    चुनाव चिन्हों का महत्व

    चुनाव चिन्ह किसी भी राजनीतिक दल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, खासकर भारतीय चुनावी प्रणाली में जहाँ साक्षरता दर और ग्रामीण मतदाताओं की संख्या अधिक है। एक विशिष्ट और यादगार चुनाव चिन्ह मतदाताओं को उम्मीदवार और पार्टी की पहचान करने में मदद करता है। इन स्थायी आवंटनों से अब ये पार्टियाँ बिना किसी भ्रम के अपनी चुनावी रणनीति बना सकेंगी और सभी निर्वाचन क्षेत्रों में एक ही चिन्ह का उपयोग कर सकेंगी। यह न केवल अभियान को सरल बनाएगा बल्कि मतदाताओं के लिए भी पहचान प्रक्रिया को आसान करेगा।

  • संघ की महत्वपूर्ण ‘प्रांत प्रचारक बैठक’ दिल्ली में: क्या होगा एजेंडा?

    संघ की महत्वपूर्ण ‘प्रांत प्रचारक बैठक’ दिल्ली में: क्या होगा एजेंडा?

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 26 जून:  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक 4, 5 और 6 जुलाई को दिल्ली में आयोजित होने जा रही है। यह संघ के संगठनात्मक कैलेंडर में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता है, जहाँ देश भर के प्रांत प्रचारक एकत्र होकर संघ के कार्यों, भविष्य की रणनीतियों और राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श करते हैं। यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि यह लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद हो रही है, और इसमें आने वाले समय के लिए संघ की दिशा तय की जा सकती है।

    बैठक का महत्व: क्यों है इतनी खास?

    आरएसएस, जिसे दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक माना जाता है, अपनी संगठनात्मक बैठकों के माध्यम से अपनी विचारधारा और कार्यक्रमों को देशभर में फैलाता है। प्रांत प्रचारक बैठक संघ की निर्णय लेने वाली प्रक्रियाओं में से एक है, जहाँ:

    कार्य समीक्षा: पिछले वर्ष के कार्यों की समीक्षा की जाती है, और विभिन्न प्रांतों में संघ की गतिविधियों का मूल्यांकन होता है।

    भविष्य की योजनाएं: आगामी वर्ष के लिए संघ की कार्ययोजनाओं पर चर्चा होती है, जिसमें समाज सेवा, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से संबंधित विभिन्न पहलुओं को शामिल किया जाता है।

    राष्ट्रीय मुद्दों पर मंथन: देश के सामने मौजूद सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों पर संघ का क्या रुख होना चाहिए, इस पर गहन विचार-विमर्श होता है।

    विचारधारा का प्रसार: संघ के स्वयंसेवकों और आम जनता तक संघ की विचारधारा को प्रभावी ढंग से कैसे पहुंचाया जाए, इस पर रणनीति बनाई जाती है।

    यह बैठक लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद हो रही है, ऐसे में चुनाव परिणामों का विश्लेषण और भविष्य की राजनीतिक एवं सामाजिक भूमिका पर भी चर्चा होने की संभावना है।

    किन मुद्दों पर हो सकता है विचार-विमर्श?
    इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है:

    लोकसभा चुनाव परिणाम का विश्लेषण: संघ, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का वैचारिक संरक्षक माना जाता है। लोकसभा चुनाव के नतीजों, जिसमें बीजेपी को अपेक्षित बहुमत नहीं मिला, का सूक्ष्म विश्लेषण किया जाएगा। संघ अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से जमीनी स्तर पर प्राप्त फीडबैक साझा करेगा।

    संगठनात्मक विस्तार और मजबूती: संघ लगातार अपने प्रभाव क्षेत्र और सदस्यता का विस्तार करने पर जोर देता है। बैठक में नए क्षेत्रों में संघ की गतिविधियों को बढ़ाने और मौजूदा शाखाओं को मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

    सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अभियान: संघ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को अपने प्रमुख उद्देश्यों में से एक मानता है। अस्पृश्यता उन्मूलन, गौ-संरक्षण, पर्यावरण चेतना और परिवार प्रबोधन जैसे विषयों पर अभियानों को तेज करने पर विचार हो सकता है।

    युवाओं को जोड़ना: नई पीढ़ी को संघ से जोड़ने और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।

    ज्ञानवापी और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे: राष्ट्रीय महत्व के संवेदनशील मुद्दों, जैसे ज्ञानवापी विवाद, मथुरा और काशी के अन्य मंदिर मुद्दे, या समान नागरिक संहिता (UCC) पर संघ की क्या भूमिका होनी चाहिए, इस पर भी विचार-विमर्श संभव है।

    दिल्ली में जुटेंगे प्रमुख पदाधिकारी

    इस बैठक में संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले सहित सभी सह-सरकार्यवाह और देश भर के सभी प्रांतों के प्रांत प्रचारक और अन्य प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। यह बैठक संघ के शीर्ष नेतृत्व और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच संवाद और समन्वय स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

    आगे की राह: संघ की नई दिशा

    यह तीन दिवसीय बैठक संघ की भविष्य की कार्यदिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। लोकसभा चुनाव के बाद के परिदृश्य में, संघ की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यह न केवल अपने वैचारिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाएगा, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बैठक से क्या नए दिशानिर्देश और अभियान सामने आते हैं।

  • भारत की जनता का समर्थन : वैश्विक न्याय और शांति की दिशा में एक संदेश

    भारत की जनता का समर्थन : वैश्विक न्याय और शांति की दिशा में एक संदेश

    पूनम शर्मा 
    इस्रायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य आक्रमण के विरोध में जिस तरह भारत की जनता और संस्थाओं ने ईरानी राष्ट्र के साथ एकजुटता दिखाई, वह न केवल मानवीय संवेदनाओं की सच्ची अभिव्यक्ति है, बल्कि यह वैश्विक न्याय, अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति की दिशा में एक स्पष्ट संदेश भी है। नई दिल्ली स्थित ईरान के दूतावास ने इस समर्थन के प्रति आभार जताते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है, जिसमें भारत के नागरिकों, राजनीतिक दलों, सांसदों, सामाजिक संगठनों, मीडिया, शिक्षाविदों, धार्मिक नेताओं और तमाम जनसामान्य के प्रति कृतज्ञता प्रकट की गई है।

    दूतावास ने इस बयान में कहा कि ईरानी राष्ट्र पर हुए इस सैन्य हमले के समय जब दुनिया के कई देश चुप्पी साधे बैठे थे, तब भारत के लोगों ने साहस के साथ ईरान के साथ अपनी नैतिक और भावनात्मक एकजुटता दिखाई। यह न केवल एक मित्र राष्ट्र के लिए समर्थन था, बल्कि यह युद्ध और आक्रामकता के खिलाफ खड़े होने वाली उस वैश्विक चेतना का प्रतीक है, जो आज के अस्थिर विश्व में शांति और न्याय की मांग कर रही है।

    बयान में यह भी कहा गया कि भारत से मिले समर्थन ने ईरानी जनता को अत्यंत प्रोत्साहित किया है, खासकर ऐसे समय में जब उनकी मातृभूमि पर ज़ायोनिस्ट शासन द्वारा निर्दयी बमबारी की गई। ईरानी दूतावास ने इस समर्थन को ‘जाग्रत अंतरात्मा की अभिव्यक्ति’ बताया और कहा कि यह दर्शाता है कि भारत जैसे राष्ट्र अभी भी अंतरराष्ट्रीय कानून, नैतिकता और मानवता के सिद्धांतों को महत्व देते हैं।

    ईरानी दूतावास के अनुसार, यह संघर्ष केवल ईरान की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा का नहीं था, बल्कि यह मानवता के खिलाफ हो रहे अन्याय, युद्धोन्माद और अंतरराष्ट्रीय संधियों के उल्लंघन के विरुद्ध एक प्रतिरोध का प्रतीक था। जब ज़ायोनिस्ट शासन और उसके समर्थकों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रखते हुए ईरान पर हमला किया, तब भारत की जनता और संस्थाओं की तरफ से आए समर्थन ने यह साबित कर दिया कि दुनिया के सचेत नागरिक अब अन्याय के खिलाफ खामोश नहीं रहने वाले।

    दूतावास ने कहा कि यह समर्थन केवल राजनीतिक नहीं था, बल्कि यह ‘वैश्विक न्याय’ और ‘नैतिक मूल्यों’ की पुष्टि है। भारत और ईरान के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्ते इस एकजुटता की पृष्ठभूमि में और अधिक मजबूत होकर उभरे हैं। ईरानी पक्ष ने आशा जताई कि भारत-ईरान संबंध आने वाले समय में और गहरे होंगे और ये दोनों राष्ट्र शांति और स्थिरता के मार्ग में साझेदार बने रहेंगे।

    बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस कठिन समय में भारत के विभिन्न हिस्सों में आयोजित शांति सभाओं, मोमबत्ती जलूसों, मीडिया विमर्शों और नागरिक संगठनों की ओर से जारी हुए समर्थन पत्रों ने न केवल ईरानी जनता का मनोबल बढ़ाया, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों को भी एक नैतिक दिशा दिखाई। दूतावास ने इस समर्थन को ‘अनमोल और वास्तविक’ बताते हुए कहा कि ऐसे समय में जब युद्ध की भाषा तेज हो रही है, भारत जैसे देश की जनता का यह शांतिपूर्ण समर्थन अत्यंत सराहनीय है।

    ईरानी दूतावास ने यह भी दोहराया कि ईरान हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और विस्तारवादी नीतियों का विरोध करता रहा है। उन्होंने कहा कि देशों की एकता और जनसमर्थन ही अन्याय, युद्ध और साम्राज्यवादी षड्यंत्रों के खिलाफ सबसे मजबूत ढाल है। भारत से मिले समर्थन ने इस विश्वास को और बल दिया है।

    बयान के अंत में ईरानी दूतावास ने भारत की जनता, नेताओं, शिक्षकों, धार्मिक गुरुओं, पत्रकारों और आम नागरिकों को उनके नैतिक समर्थन के लिए फिर से धन्यवाद दिया और आशा जताई कि यह एकजुटता न केवल वर्तमान संकट के समाधान में मदद करेगी, बल्कि आने वाले समय में एक शांतिपूर्ण और न्यायसंगत विश्व व्यवस्था की नींव रखेगी।

    भारत  द्वारा दिखाया गया यह नैतिक साहस एक मिसाल है, जो बताता है कि जब सत्ता और साम्राज्यवादी ताकतें अन्याय पर उतर आएं, तब भी दुनिया में ऐसे लोग और देश मौजूद हैं जो न्याय, मानवता और शांति की आवाज़ बुलंद करने का हौसला रखते हैं।

  • अंबुबाची महायोग के अवसर पर विश्व- हिंदू परिषद द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा शिविर का आयोजन

    अंबुबाची महायोग के अवसर पर विश्व- हिंदू परिषद द्वारा नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा शिविर का आयोजन

    समग्र समाचार सेवा
    गुवाहाटी 25 जून – “शक्ति चाहे भक्ति” के संदेश को ध्यान में रखते हुए, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की गुवाहाटी महानगर समिति की ओर से इस वर्ष भी अंबुबाची महायोग के पावन अवसर पर 21 जून 2025 से 25 जून 2025 तक नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवा शिविरों का आयोजन किया गया। ये शिविर कामाख्या मंदिर परिसर, कालीपुर तथा मालीगांव  ग्राम्यदेवता मंदिर परिसर में आयोजित किए गए।

    पहला शिविर 21 जून की शाम 7 बजे कामाख्या मंदिर प्रांगण  में प्रारंभ हुआ, जिसका उद्घाटन प्रागज्योतिष चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य व मुख्य अधीक्षक डॉ. बसंत कुमार बैश्य ने किया। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भक्ति करने के लिए अच्छे स्वास्थ्य का होना अनिवार्य है। स्वास्थ्य की रक्षा हेतु स्वच्छता के प्रति जागरूकता ज़रूरी है। उन्होंने इस स्वास्थ्य शिविर को तीर्थयात्रियों के लिए अत्यंत सराहनीय और आवश्यक पहल बताया।

    शिविर का उद्घाटन कार्यक्रम मंगल दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसे कामाख्या मंदिर के प्रधान डोली कबिंद्र प्रसाद शर्मादेव ने संपन्न किया। उन्होंने विहिप की महानगर समिति द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित इस सेवा कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि नीलाचल पर्वत केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि साधना और योग का केंद्र भी है। यही कारण है कि अब इसे ‘अंबुबाची मेला’ के स्थान पर ‘अंबुबाची महायोग’ कहा जाता है।

    कार्यक्रम में मंदिर संचालन समिति के सचिव ज्ञान शर्मादेव और कोषाध्यक्ष विभास शर्मा भी उपस्थित रहे। इस गंभीर और सजीव सभा का संचालन महानगर समिति के अध्यक्ष चबिन राजखोवा ने किया, जिसमें विहिप की क्षेत्रीय मातृशक्ति संयोजिका तारावती शर्मा, गुवाहाटी विभाग मंत्री चंदन राभा, तथा कई कार्यकर्ता भी शामिल रहे।

    दूसरा शिविर 22 जून को कालीपुर में आयोजित हुआ। इसे सुबह 10 बजे विहिप गुवाहाटी महानगर समिति के अध्यक्ष चबिन राजखोवा ने विधिवत रूप से शुभारंभ किया। इसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और श्रद्धालु उपस्थित थे।

    तीसरे शिविर का उद्घाटन 22 जून को शाम 7 बजे मालीगांव ग्राम्य देवता मंदिर परिसर में किया गया। इसे विहिप के उत्तर-पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. दिनेश तिवारी ने प्रारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने सनातन धर्म की निरंतर चलती परंपरा, आचार-विचार, और हिंदू व्यवस्था की महत्ता को उजागर किया। साथ ही बताया कि कामरूप कामाख्या के रूप में प्रसिद्ध यह स्थान विश्व को किस प्रकार आकर्षित करता है।

    कार्यक्रम के विशेष अतिथि पंडु महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो. डॉ. नीलमोहन राय ने कामाख्या देवी, शक्तिपीठ, और नरकासुर की कथा का विस्तृत विवरण दिया। वहीं ज़िला अध्यक्ष चबिन राजखोवा ने जीवात्मा और परमात्मा के संबंध पर प्रकाश डालते हुए मानव मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया।

    उल्लेखनीय है कि इस शिविर में गुवाहाटी की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थाएँ —नेमकेयर, मेडिसिटी, आयुर्वेदिक कॉलेज, मारवाड़ी मेटरनिटी अस्पताल और स्वागत हॉस्पिटल—के डॉक्टर, नर्स और चिकित्सा कर्मी सेवाएं दे रहे हैं। साथ ही कई औषधि कंपनियों ने नि:शुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई हैं। अब तक प्रतिदिन लगभग ढाई हजार श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य जाँच  की गई और उन्हें आवश्यक दवाएँ  प्रदान की गईं हैं।

    यह शिविर न केवल तीर्थयात्रियों की सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि यह भी प्रमाणित करता है कि आस्था और सेवा एक साथ चल सकती हैं।