समग्र समाचार सेवा
किशनगंज, 23 सितंबर : बिहार के किशनगंज जिले की पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने एक बड़े फर्जी आधार कार्ड और जाली प्रमाणपत्र गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी स्वप्नमय अधिकारी (24) को पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्द्धमान से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरोह बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश तक फैला था और अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर व रिमोट एक्सेस तकनीक से फर्जीवाड़ा कर रहा था।
सॉफ्टवेयर और रिमोट एक्सेस से फर्जीवाड़ा
आरोपी स्वप्नमय अधिकारी ‘आधार नामांकन ग्राहक सॉफ्टवेयर’ की आईडी और पासवर्ड मुहैया कराता था। वह AnyDesk जैसे रिमोट डेस्कटॉप एप्स के जरिए बिहार के स्थानीय दुकानदारों तक यह सॉफ्टवेयर पहुंचाता, जिससे फर्जी आधार कार्ड तैयार किए जा रहे थे।
बिहार में ऐसे हुआ खुलासा
पुलिस को इस गिरोह के बारे में तब पता चला जब 2 अप्रैल 2026 को किशनगंज के टेढ़ागाछ थाना क्षेत्र की एक किराना दुकान पर छापा पड़ा। वहां से फर्जी दस्तावेज, कई सॉफ्टवेयर और क्लोन बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट के जरिए तैयार हो रहे आधार कार्ड बरामद किए गए।
अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा
जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क बिहार के अलावा पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के अपराधियों से भी लिंक्ड था। गिरोह का मास्टरमाइंड पश्चिम बंगाल में बैठकर पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
अब तक इस मामले में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। मुख्य आरोपी स्वप्नमय को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और सॉफ्टवेयर सप्लाई चैन की तलाश में जुटी है।
पुलिस ने आईपीसी, आईटी एक्ट और आधार एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से गिरोह के डिजिटल नेटवर्क और बैंकिंग ट्रांजैक्शंस की भी गहन जांच की जा रही है।
इस खुलासे ने राज्य में फर्जी दस्तावेज और साइबर क्राइम के खिलाफ सतर्कता और कार्रवाई की जरूरत को एक बार फिर रेखांकित किया है।