4 अक्टूबर दैनिक राशिफल पंचांग

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!

🐏मेष
कार्यस्थल पर नई चुनौतियां आ सकती हैं, धैर्य से काम लें। व्यापारिक लेनदेन में पारदर्शिता बनाए रखें। पारिवारिक मामलों में संयम से काम लेना हितकर होगा। खर्चों पर नियंत्रण रखें, बजट बिगड़ सकता है। सिरदर्द या थकान की समस्या हो सकती है।

🐂वृषभ
कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे, प्रभाव में वृद्धि होगी। व्यापार में साझेदारी से लाभ के योग बन रहे हैं। दांपत्य जीवन में मधुरता और विश्वास बढ़ेगा। वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, नया निवेश कर सकते हैं। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा, मानसिक रूप से शांत महसूस करेंगे।

👫मिथुन
प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त मिलेगी, कार्य समय पर पूरे होंगे। व्यापार में विवेकपूर्ण फैसले लाभ पहुंचाएंगे। मित्रों और परिवार का सहयोग बना रहेगा। अचानक आर्थिक लाभ की संभावना बन सकती है। ऊर्जावान रहेंगे, सेहत अच्छी रहेगी।

🦀कर्क
रचनात्मक कार्यों में मन लगेगा, नई सोच से लाभ होगा। व्यापार में जोखिम लेने से बचें, स्थितियां सामान्य हैं। संतान की प्रगति से मन प्रसन्न रहेगा। आय के स्रोतों में वृद्धि के संकेत हैं। स्वास्थ्य ठीक रहेगा, लेकिन खानपान नियमित रखें।

🐅सिंह
कार्यक्षेत्र में धैर्य रखें, वरिष्ठों से मतभेद से बचें। व्यापारिक सौदों में जल्दबाजी नुकसानदेह हो सकती है। घर का वातावरण शांतिपूर्ण बनाए रखने का प्रयास करें। अनावश्यक व्यय से बचें, बचत पर ध्यान दें। सीने में जकड़न या थकान महसूस हो सकती है।

🙎‍♀️कन्या
आपके संवाद कौशल से रुके हुए काम आसानी से बनेंगे। व्यापार में छोटी यात्राएं लाभदायक सिद्ध होंगी। भाई-बहनों का सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा। आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, आय बढ़ेगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, स्फूर्ति बनी रहेगी।

⚖️तुला
कार्यस्थल पर आपके सुझावों को महत्व दिया जाएगा। व्यापार में लाभ की प्राप्ति होगी, धन संचय होगा। परिवार में मांगलिक आयोजन की चर्चा हो सकती है। वित्तीय मामलों में दिन आपके पक्ष में रहेगा। दांत या गले से जुड़ी छोटी समस्या हो सकती है।

🦂वृश्चिक
आत्मविश्वास चरम पर रहेगा, बड़े निर्णय ले पाएंगे। व्यापार में नई शुरुआत करने के लिए अनुकूल दिन है। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता और विश्वास बढ़ेगा। धन लाभ के योग हैं, आर्थिक स्थिति सुधरेगी। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहेगा।

🏹धनु
कार्यक्षेत्र में सावधानी बरतें, कोई काम टालने से बचें। व्यापार में विदेशी संपर्कों से लाभ की संभावना है। पारिवारिक मामलों में बजट का ध्यान रखें। अनावश्यक खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है। आंखों की देखभाल करें, तनाव न लें।

🐊मकर
कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत का फल मिलेगा, प्रशंसा होगी। व्यापार में बड़े सौदे तय हो सकते हैं, मुनाफा होगा। मित्रों के साथ सुखद और मनोरंजक समय बीतेगा। आय में वृद्धि के मजबूत संकेत मिल रहे हैं। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा, दिन खुशनुमा रहेगा।

🍯कुंभ
करियर में बड़ी प्रगति संभव है, नए रास्ते खुलेंगे। व्यापारिक मामलों में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। परिवार में आपका सम्मान और महत्व बढ़ेगा। आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आ सकता है। ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहेगा, सेहत बढ़िया रहेगी।

🐟मीन
भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा, कार्य आसान होंगे। व्यापारिक विस्तार की योजनाएं धरातल पर आएंगी। धार्मिक यात्रा या मांगलिक कार्य के योग हैं। आर्थिक रूप से दिन बेहद लाभदायक रहेगा। मानसिक शांति महसूस होगी, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

दिनाँक:-04/10/2026,रविवार
नवमी, कृष्ण पक्ष,
आश्विन
“””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि——— नवमी 27:53:10. तक
पक्ष———————— कृष्ण
नक्षत्र——– पुनर्वसु 24:12:59
योग———– परिघ 12:31:23
करण‐——– तैतुल 16:50:49
करण—–‐—— गर 27:53:10
वार———————- रविवार
माह——————– आश्विन
चन्द्र राशि—- मिथुन 18:30:58
चन्द्र राशि—————— कर्क
सूर्य राशि—————— कन्या
रितु———————— शरद
आयन—————- दक्षिणायन
संवत्सर—————– पराभव
संवत्सर (उत्तर) —————-रौद्र
विक्रम संवत————- 2083
गुजराती संवत———— 2082
शक संवत—————- 1948
कलि संवत————— 5127

वृन्दावन
सूर्योदय————- 06:14:24
दिन काल———– 11:46:39
चंद्रास्त————– 13:58:22
सूर्यास्त————– 18:01:03
रात्री काल———– 12:13:51
चंद्रोदय————– 24:35:13

लग्न—-कन्या16°35′ 166°35′

सूर्य नक्षत्र—————— हस्त
चन्द्र नक्षत्र————— पुनर्वसु
नक्षत्र पाया—————- रजत

🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩

के—- पुनर्वसु 07:08:57

को—- पुनर्वसु 12:49:38

हा—- पुनर्वसु 18:30:58

ही—- पुनर्वसु 24:12:59

हु—- पुष्य 29:55:42

💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
============================
सूर्य= कन्या 16°30 , हस्त 2 ष
चन्द्र= मिथुन 22°30 , पुनर्वसु 1 के
बुध = तुला 10°52 ‘ स्वाति 2 रे
शु क्र= तुला 14°05, स्वाति 3 रो
मंगल= कर्क 09°17 पुष्य 2 हे
गुरु= कर्क 25°33 आश्लेषा , 3 डे
शनि=मीन 17°10 ‘ रेवती , 1 दे
राहू=(व) कुम्भ 03°24 धनिष्ठा , 4 गे
केतु= (व) सिंह 03°24 मघा 2 मी
============================

🚩💮🚩 शुभा$शुभ मुहूर्त 🚩💮🚩

राहू काल 16:33 – 18:01 अशुभ
यम घंटा 12:08 – 13:36 अशुभ
गुली काल 15:04 – 16:33 अशुभ
अभिजित 11:44 – 12:31 शुभ
दूर मुहूर्त 16:27 – 17:14 अशुभ
वर्ज्यम 12:51 – 14:22 अशुभ
प्रदोष 18:01 – 20:30 शुभ

🚩ब्रह्म मुहूर्त 28:37* – 29:26* शुभ

💮चोघडिया, दिन

उद्वेग 06:14 – 07:43 अशुभ
चर 07:43 09:11 शुभ
लाभ 09:11 10:39 शुभ
अमृत 10:39 – 12:08 शुभ
काल 12:08 13:36 अशुभ
शुभ 13:36 – 15:04 शुभ
रोग 15:04 – 16:33 अशुभ
उद्वेग 16:33 – 18:01 अशुभ

🚩चोघडिया, रात

शुभ 18:01 – 19:33 शुभ
अमृत 19:33 – 21:05 शुभ
चर 21:05 – 22:36 शुभ
रोग 22:36 – 24:08* अशुभ
काल 24:08*25:40* अशुभ
लाभ 25:40* – 27:11* शुभ
उद्वेग 27:11* – 28:43* अशुभ
शुभ 28:43* – 30:15* शुभ

💮होरा, दिन

सूर्य 06:14- 07:13
शुक्र 07:13- 08:12
बुध 08:12- 09:11
चन्द्र 09:11 -10:10
शनि 10:10- 11:09
बृहस्पति 11:09 -12:08
मंगल 12:08 -13:07
सूर्य 13:07- 14:06
शुक्र 14:06- 15:04
बुध 15:04 -16:03
चन्द्र 16:03- 17:02
शनि 17:02- 18:01

🚩होरा, रात

बृहस्पति 18:01 -19:02
मंगल 19:02- 20:03
सूर्य 20:03 21:05
शुक्र 21:05- 22:06
बुध 22:06 -23:07
चन्द्र 23:07- 24:08
शनि 24:08-25:09
बृहस्पति 25:09 -26:10
मंगल 26:10-27:11
सूर्य 27:11-28:13
शुक्र 28:13- 29:14
बुध 29:14-30:15

🚩उदयलग्न प्रवेशकाल 🚩

कन्या > 05:08 से 07:24 तक
तुला > 07:24 से 09:32 तक
वृश्चिक > 09:32 से 12:00 तक
धनु > 12:00 से 14:00 तक
मकर > 14:00 से 15:46 तक
कुम्भ > 15:46 से 17:24 तक
मीन > 17:24 से 19:24 तक
मेष > 19:24 से 20:28 तक
वृषभ > 20:28 से 22:18 तक
मिथुन > 22:18 से 00:30 तक
कर्क > 00:30 से 02:44 तक
सिंह > 02:44 से 05:04 तक
=======================

🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार

(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट

नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

💮दिशा शूल ज्ञान————- पश्चिम
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा चिरौंजी खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं।।
महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त,
राहुणां नित्यनैमित्यके कार्ये,
अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

15 + 9 + 1 + 1 = 26 ÷ 4 = 02 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है

राहु ग्रह मुखहुति

💮 शिव वास,फल एवं परिहार -:

श्रावणेऽधिकमासे च आर्द्रायाञ्च गते रवी।
शिवभेन्दुगते योगे, शुक्ले च व्यतिपातके ।।
हरानङ्गहरीणाञ्च तिथिषु करणे चतुष्पदे ।
सोमवारे शुभे ब्राह्मे प्रदोषाख्येऽभिजित्क्षणे ।।
शिवरात्र्यादि पर्वेषु उत्सवेषु निमित्तके ।
नित्याराधनकाले च शिववासं न चिन्तयेत् ।।

24 + 24 + 5 = 53 ÷ 7 = 4 शेष

सभायां =सन्ताप कारक

🚩भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

💮🚩 विशेष जानकारी 🚩💮

*नवमी श्राद्ध

*सौभाग्यवतीनां श्राद्ध

*सर्वार्थ सिद्धि योग 24:13

💮🚩💮 शुभ विचार 💮🚩💮

नास्ति मेघसमं तोयं नास्ति चात्मसमं बलम् ।
नास्तिचक्षुः समं तेजो नास्ति धान्यसमं प्रियम् ।।
।।चाoनीo।।

वर्षा के जल के समान कोई जल नहीं. खुदकी शक्ति के समान कोई शक्ति नहीं. नेत्र ज्योति के समान कोई प्रकाश नहीं. अन्न से बढ़कर कोई संपत्ति नहीं

🚩💮🚩 सुभाषितानि 🚩💮🚩

गीता -: विश्वरूपदर्शन योग अo-11

नभःस्पृशं दीप्तमनेकवर्णं
व्यात्ताननं दीप्तविशालनेत्रम्‌।
दृष्टवा हि त्वां प्रव्यथितान्तरात्मा
धृतिं न विन्दामि शमं च विष्णो॥

क्योंकि हे विष्णो! आकाश को स्पर्श करने वाले, दैदीप्यमान, अनेक वर्णों से युक्त तथा फैलाए हुए मुख और प्रकाशमान विशाल नेत्रों से युक्त आपको देखकर भयभीत अन्तःकरण वाला मैं धीरज और शान्ति नहीं पाता हूँ

आचार्य ज्योतिष सचिन पांडे ,

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.