गुवाहाटी : अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष पर भव्य आयोजन
संतों और प्रबुद्ध समाज की रही गरिमामयी उपस्थिति
समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 7 अक्टूबर : हिन्दू समाज के प्रखर संगठनकर्ता और विश्व हिन्दू परिषद के प्रमुख स्तंभ रहे अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को गुवाहाटी के पंजाबारी स्थित श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र के श्रीश्री दामोदरदेव अंतरराष्ट्रीय प्रेक्षागृह में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। शाम 4 बजे आरंभ हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, सत्राधिकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनसाधारण ने भाग लिया।
कार्यक्रम में उत्तर कमलाबाड़ी सत्र के सत्राधिकार श्रीश्री जनार्दन देव गोस्वामी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। असम सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल विशिष्ट अतिथि थे, जबकि विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय सह-संगठन मंत्री विनायक राव देशपांडे ने मुख्य वक्ता के रूप में कार्यक्रम को संबोधित किया।
अशोक सिंघल के जीवन और योगदान का स्मरण
कार्यक्रम में अशोक सिंघल के जीवन, उनके संगठनात्मक योगदान और हिन्दू समाज को एकजुट करने के उनके प्रयासों का स्मरण किया गया। वक्ताओं ने उन्हें श्रद्धा, समर्पण और संगठन शक्ति की प्रतिमूर्ति बताते हुए राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका को विशेष रूप से याद किया।
वक्ताओं ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पीछे दशकों तक चले सामाजिक और धार्मिक आंदोलन में अशोक सिंघल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनका जीवन संत समाज और सामान्य जनमानस के बीच संवाद तथा हिन्दू समाज में सामाजिक समरसता को मजबूत करने के प्रयासों के लिए भी याद किया जाता है।
सामाजिक समरसता का संदेश
कार्यक्रम की विशेषता विभिन्न संतों, महात्माओं, सत्राधिकारों और समाज के अलग-अलग वर्गों की एक मंच पर उपस्थिति रही। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन केवल जन्म शताब्दी समारोह नहीं, बल्कि अशोक सिंघल के विचारों और सामाजिक समरसता के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास भी था।
कार्यक्रम की सफलता में महानगर, प्रखंड और खंड स्तर के कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निमंत्रण से लेकर आयोजन स्थल की व्यवस्था और कार्यक्रम संचालन तक विभिन्न दायित्वों को कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से संभाला।
आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी कार्यकर्ताओं, भाई-बहनों और बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहयोग, परिश्रम और दायित्व-बोध के कारण ही जन्म शताब्दी वर्ष का यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।
कार्यक्रम का समापन श्रद्धा, सामाजिक एकता और “जय श्रीराम” के उद्घोष के साथ हुआ।