RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट बढ़कर 5.50% हुआ, महंगी होगी EMI
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे होम और कार लोन समेत सभी तरह के कर्ज महंगे होने तय हैं।
- रेपो रेट में बढ़ोतरी: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है।
- महंगी होगी ईएमआई: केंद्रीय बैंक के इस कड़े फैसले के बाद कमर्शियल बैंक भी लोन की ब्याज दरों में इजाफा करेंगे, जिससे आम जनता की मासिक किस्त (EMI) बढ़ जाएगी।
- महंगाई पर नियंत्रण का लक्ष्य: वैश्विक अनिश्चितताओं और खुदरा महंगाई के दबाव को देखते हुए आरबीआई ने नीतिगत रुख में बदलाव करते हुए यह सख्त कदम उठाया है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 07 अक्तूबर: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था और खुदरा महंगाई के मोर्चे पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नीतिगत दरों में इजाफा कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के परिणामों की घोषणा करते हुए गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मुख्य रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) बढ़ाकर 5.50% कर दिया गया है। इससे पहले यह दर 5.25% पर स्थिर थी। इस निर्णय के बाद देश के आम नागरिकों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है, क्योंकि बैंक अब लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेंगे।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में वैश्विक वित्तीय बाजारों के उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और घरेलू स्तर पर खुदरा महंगाई के आंकड़ों का बारीकी से आकलन किया गया। जानकारों के अनुसार, बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति के दबाव को काबू में रखने के लिए केंद्रीय बैंक के पास यह कदम उठाना आवश्यक हो गया था। आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक देश की आर्थिक स्थिरता और वित्तीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आगे भी जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
लोन लेने वालों की बढ़ी मुश्किलें, बढ़ेगी ईएमआई
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक (कमर्शियल बैंक) भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। जब इस दर में बढ़ोतरी की जाती है, तो बैंकों के लिए भी फंड की लागत बढ़ जाती है। परिणामस्वरूप, बैंक इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं। इस बढ़ोतरी के बाद होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और अन्य सभी प्रकार के कर्ज महंगे हो जाएंगे। जिन लोगों के लोन फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट पर चल रहे हैं, उनकी मासिक किस्त (EMI) या तो बढ़ जाएगी या फिर उनके लोन की अवधि लंबी हो जाएगी।
एफडी (FD) निवेशकों के लिए राहत की उम्मीद
एक तरफ जहां कर्ज लेने वालों के लिए यह बुरी खबर है, वहीं दूसरी तरफ फिक्सड डिपॉजिट (FD) या अन्य बचत योजनाओं में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए राहत की किरण नजर आ रही है। ब्याज दरों में हुई इस बढ़ोतरी के बाद देश के प्रमुख बैंक अपनी एफडी दरों में भी संशोधन कर सकते हैं, जिससे जमाकर्ताओं को पहले से बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ गई है। छोटे बचतकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों को इससे कुछ हद तक फायदा मिल सकता है।
आर्थिक वृद्धि और जीडीपी अनुमान
इस घोषणा के दौरान आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (GDP) वृद्धि के अनुमानों पर भी बात की। केंद्रीय बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत fondamentals का हवाला देते हुए विकास दर के पूर्वानुमान को सकारात्मक बनाए रखा है। हालांकि, मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के महंगे होने के प्रभावों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि देश की वित्तीय सेहत पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
कुल मिलाकर, आरबीआई का यह निर्णय देश के वित्तीय परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत है। आने वाले दिनों में बैंक किस प्रकार अपनी ब्याज दरों को संशोधित करते हैं और इसका बाजार तथा आम आदमी पर क्या असर पड़ता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।