42 सेवानिवृत्त जजों ने चुनाव आयोग को कमजोर करने के खिलाफ दी चेतावनी
संवैधानिक संस्थाओं की साख पर लगातार सवाल उठाने और बिना सबूत के 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर 42 पूर्व न्यायमूर्तियों ने जारी किया खुला पत्र।
- 42 सेवानिवृत्त जजों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लगातार हमलों और उन्हें बदनाम करने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
- पूर्व जजों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को कानूनी रूप से पूरी तरह वैध और पारदर्शी प्रक्रिया बताया है।
- पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि आलोचना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन निराधार आरोपों से संस्थाओं की साख कमजोर होती है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 8 अक्तूबर: हाल ही में देश की राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े एक अहम घटनाक्रम में, 42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों ने चुनाव आयोग (ECI) और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई है। पूर्व न्यायमूर्तियों द्वारा जारी एक संयुक्त खुले पत्र में यह चेतावनी दी गई है कि बिना किसी ठोस सबूत के संवैधानिक प्राधिकरणों पर ‘वोट चोरी’ जैसे गंभीर आरोप लगाना और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करना देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने के लिए घातक साबित हो सकता है।
संस्थाओं की आलोचना बनाम हियाड़ना (Denigration)
अपने इस तीखे और स्पष्ट पत्र में पूर्व जजों ने इस बात पर जोर दिया है कि लोकतंत्र के अंतर्गत संस्थाओं की रचनात्मक आलोचना करना हर नागरिक और राजनीतिक दल का लोकतांत्रिक अधिकार है, परंतु संस्थाओं को सुनियोजित तरीके से नीचा दिखाना या उनकी साख को बट्टा लगाना स्वीकार्य नहीं है। पत्र में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि किस प्रकार संवैधानिक पदों पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को बिना किसी विधिक प्रमाण के सार्वजनिक मंचों और प्रेस कॉन्फ्रेंसों में निशाना बनाया जा रहा है।
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया का समर्थन
विपक्ष द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शनों और दिल्ली में चल रहे धरनों-प्रदर्शनों के बीच, पूर्व जजों ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह कानूनी और वैध ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनावी कानूनों के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाने का पूरा अधिकार है, और इस प्रकार के पुनरीक्षण कार्य समय-समय पर निष्पक्ष चुनावों को सुनिश्चित करने के लिए बेहद आवश्यक हैं।
लोकतंत्र और जनहित की रक्षा की अपील
पूर्व न्यायमूर्तियों ने अपने इस खुलासे में यह भी चेतावनी दी है कि यदि इसी प्रकार चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लगातार कमजोर करने की कोशिशें जारी रहीं, तो इससे जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था से भरोसा उठ सकता है, जो अंततः देश में अस्थिरता और अराजकता को बढ़ावा दे सकता है। पत्र के अंत में सभी पक्षों से लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों और संस्थागत स्वायत्तता का सम्मान करने की पुरजोर अपील की गई है।