परिवहन और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी

केंद्र ने एकीकृत प्राधिकरण की स्थापना को दी मंजूरी

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  • केंद्र सरकार ने ITLA की स्थापना को मंजूरी दी।
  • सड़क, रेल और अन्य परिवहन प्रणालियों में बेहतर समन्वय पर जोर।
  • परियोजनाओं की योजना, निगरानी और प्रभाव मूल्यांकन को मजबूत किया जाएगा।
  • पीएम गतिशक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति जैसी पहलों को सहयोग मिलेगा।

समग्र समाचार सेवा

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर :देश में परिवहन और माल ढुलाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण संस्थागत निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 अक्टूबर को एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण (Integrated Transport & Logistics Authority–ITLA) की स्थापना को मंजूरी दी।

इस प्राधिकरण का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में अनुसंधान, योजना निर्माण, परियोजनाओं के मूल्यांकन, निगरानी और उनके वास्तविक प्रभाव के आकलन के लिए एक समन्वित संस्थागत व्यवस्था विकसित करना है।

अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की चुनौती

भारत में परिवहन व्यवस्था का संचालन विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सरकारी एजेंसियों के माध्यम से होता है।

कई बार अलग-अलग विभागों की योजनाओं और परियोजनाओं के बीच पर्याप्त तालमेल नहीं होने से संसाधनों का प्रभावी उपयोग चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

नया प्राधिकरण इस समस्या के समाधान के लिए समन्वित योजना निर्माण और परियोजना मूल्यांकन पर ध्यान देगा।

पीएम गतिशक्ति को संस्थागत सहयोग

सरकारी जानकारी के अनुसार, ITLA राष्ट्रीय परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स योजना, अनुसंधान, परियोजना मूल्यांकन और डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में एक शीर्ष संस्थागत व्यवस्था के रूप में कार्य करेगा।

यह पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति जैसी मौजूदा पहलों का पूरक होगा।

व्यापार और उद्योगों के लिए महत्व

किसी देश की आर्थिक प्रतिस्पर्धा में परिवहन और माल ढुलाई की दक्षता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराने, तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और निर्यात संबंधी गतिविधियों के लिए बेहतर परिवहन व्यवस्था आवश्यक है।

समन्वित परिवहन योजना से परियोजनाओं के बीच दोहराव कम करने, निवेश की उपयोगिता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने में सहायता मिल सकती है।

क्रियान्वयन पर रहेगी नजर

नए प्राधिकरण की प्रभावशीलता उसके संस्थागत अधिकारों, विभिन्न मंत्रालयों के सहयोग और परियोजनाओं के मूल्यांकन की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।

सरकार के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि यह व्यवस्था केवल एक अतिरिक्त प्रशासनिक संस्था बनकर न रह जाए, बल्कि परिवहन परियोजनाओं की योजना और निगरानी में वास्तविक सुधार ला सके।

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