असम में राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा का राज्यव्यापी अभियान
13 से 31 अक्टूबर तक जिला मुख्यालयों में रैलियां
- असम भाजपा 13 से 31 अक्टूबर तक जिला मुख्यालयों में रैलियां आयोजित करेगी।
- मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राहुल गांधी के बयानों की आलोचना की।
- भाजपा ने निर्वाचन आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता का समर्थन किया।
- मुख्यमंत्री ने देशभर में हर पांच वर्ष पर SIR कराने का सुझाव दिया।
समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 13 अक्टूबर : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देश में जारी राजनीतिक विवाद अब असम में भी तेज हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने घोषणा की है कि भारतीय जनता पार्टी 13 से 31 अक्टूबर तक राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में शांतिपूर्ण रैलियां आयोजित करेगी।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, कांग्रेस निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठा रही है।
निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक विवाद
दिल्ली में इंडिया गठबंधन द्वारा निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची के पुनरीक्षण के विरोध में प्रदर्शन किए जाने के बाद असम में भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव परिणामों को अपने राजनीतिक हितों के अनुसार स्वीकार या अस्वीकार करती है।
उन्होंने राहुल गांधी के उस राजनीतिक अभियान की आलोचना की जिसमें निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
जिला मुख्यालयों में भाजपा का कार्यक्रम
मुख्यमंत्री के अनुसार, भाजपा 13 से 31 अक्टूबर तक सभी जिला मुख्यालयों में शांतिपूर्ण जनसभाएं और रैलियां आयोजित करेगी।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका और SIR के पक्ष में अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगी।
हालांकि, रैलियों में भागीदारी और उनके वास्तविक आयोजन का विवरण संबंधित जिलों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
हर पांच वर्ष पर SIR कराने का सुझाव
हिमंत बिस्व सरमा ने देशभर में नियमित अंतराल पर मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का समर्थन किया है।
उनका कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक है।
असम के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने अवैध घुसपैठ और मतदाता पात्रता संबंधी चिंताओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, किसी व्यक्ति की मतदाता पात्रता का निर्धारण निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव
कांग्रेस का तर्क है कि मतदाता सूचियों में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटाया जाना लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है।
भाजपा का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया को राजनीतिक आरोपों के आधार पर रोकना उचित नहीं होगा।
इस विवाद में दोनों पक्षों के दावों का मूल्यांकन निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड, कानूनी प्रक्रियाओं और न्यायिक निर्णयों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
असम में घोषित रैलियों के साथ SIR अब राज्य की प्रमुख राजनीतिक बहसों में शामिल हो गया है।