मेरठ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा

मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला अदालत ने आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

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  • नीला ड्रम हत्याकांड में फैसला: मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय ने मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या कर शव के टुकड़े नीले ड्रम में छिपाने के जुर्म में पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा दी है।
  • महाभारत के श्लोक का जिक्र: जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाते हुए महाभारत के प्रसंग का उल्लेख किया और कहा कि अपराधियों को उनके अपराध के अनुपात में सजा देना ही सच्चा धर्म है।
  • पीड़ित परिवार को मिला न्याय: सौरभ की मां और परिजनों ने अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे सख्त फैसलों से समाज में अपराध करने वालों के मन में खौफ पैदा होगा।

समग्र समाचार सेवा
मेरठ, 15 अक्तूबर: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के बहुचर्चित ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ (Blue Drum Murder Case) में अदालत का ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सामने आ गया है। मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायालय ने मर्चेंट नेवी में कार्यरत अधिकारी सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या करने, उनके शव के टुकड़े-टुकड़े कर नीले ड्रम में सीमेंट और कंक्रीट भरकर छिपाने के दोषी करार दिए गए पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी (फांसी की सजा/Death Penalty) सुना दी है। लगभग 19 महीने तक चले लंबे ट्रायल, 126 से अधिक सुनवाई और 22 गवाहों की गवाही के बाद अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में रखते हुए दोनों दोषियों को मौत की सजा से दंडित किया है।

दिल दहला देने वाली वारदात और खौफनाक साजिश

यह दिल दहला देने वाली घटना मार्च 2025 में सामने आई थी। विदेश (लंदन) में कार्यरत मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत अपनी पत्नी मुस्कान का जन्मदिन मनाने और परिवार के पास छुट्टियां बिताने मेरठ स्थित अपने घर लौटे थे। आरोप के अनुसार, पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर पहले सौरभ को नशीला पदार्थ दिया और फिर धारदार हथियारों से उसकी नृशंस हत्या कर दी।

हत्या के बाद दोनों ने अपराध के साक्ष्य मिटाने के लिए खौफनाक तरीका अपनाया। सौरभ के शव के कई टुकड़े किए गए और उन्हें बाजार से खरीदे गए एक बड़े नीले प्लास्टिक के ड्रम में डालकर ऊपर से बालू, सीमेंट व कंक्रीट भर दिया गया ताकि बदबू बाहर न आ सके। इस नृशंस वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश के कसौली व मनाली में छुट्टियां बिताने चले गए थे। घर से उठती बदबू और परिजनों की शिकायत के बाद जब पुलिस ने कार्रवाई की, तो ड्रम से शव बरामद हुआ और पूरी साजिश का भंडाफोड़ हुआ।

कोर्ट ने महाभारत का दिया संदर्भ: ‘दंड भी धर्म है’

सजा का ऐलान करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने फैसले में धर्म और न्यायशास्त्र के सिद्धांतों का विस्तार से उल्लेख किया। जज ने फैसले के दौरान महाभारत के एक श्लोक और प्रसंग का संदर्भ देते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था में पाप और अपराध के अनुरूप सजा देना ही धर्म है (“दंड भी धर्म है”)।

न्यायाधीश ने कहा कि अभियुक्तों द्वारा किया गया यह कृत्य अत्यंत क्रूर, अमानवीय और घृणित है। पवित्र वैवाहिक संबंध और मानवीय संवेदनाओं को जिस तरह से तार-तार किया गया है, उसके लिए केवल और केवल मृत्युदंड ही न्यायोचित सजा हो सकती है ताकि समाज में कोई अन्य व्यक्ति ऐसा कृत्य करने की हिम्मत न कर सके। फांसी की सजा के साथ-साथ कोर्ट ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया और न्याय की जीत

अदालत द्वारा दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मृतक सौरभ राजपूत की मां रेनू देवी और परिजनों के आंसुओं में न्याय मिलने का संतोष साफ दिखाई दिया। सौरभ की मां ने कहा, “हमने अपने बेटे को खो दिया है, उसकी जगह कोई नहीं ले सकता, लेकिन अदालत के इस फैसले से हमें और समाज को न्याय मिला है। अगर किसी दंपत्ति को साथ नहीं रहना है तो वे अलग हो जाएं, लेकिन किसी के बच्चे की इस तरह जान न लें। जब इन दोनों दोषियों को फंदे पर लटकाया जाएगा, तभी हमारे कलेजे को सही मायने में ठंडक मिलेगी।”

दिलचस्प बात यह रही कि मामले की सुनवाई के दौरान स्वयं मुस्कान रस्तोगी के परिजनों ने भी लिखित बयान देकर कोर्ट से अपनी बेटी के खिलाफ सख्त से सख्त सजा देने की मांग की थी।

कड़े साक्ष्यों और फोरेंसिक सबूतों से सजा तक का सफर

मेरठ पुलिस और तत्कालीन जांच अधिकारियों ने इस मामले में लगभग 1000 पन्नों की मजबूत चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। पुलिस ने ड्रम, सीमेंट खरीदने की रसीदों, हत्या में इस्तेमाल हथियार, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और फोरेंसिक सैंपल्स को अदालत में पुख्ता सबूत के तौर पर पेश किया था। इस ठोस पैरवी और अदालत के कड़े रुख के बाद अंततः दोनों आरोपियों को उनके किए की अंतिम सजा मिल गई।

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