एस जयशंकर और कनाडाई एफएम अनीता आनंद की द्विपक्षीय बैठक

भारत और कनाडा के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर हुई व्यापक चर्चा, व्यापार और सुरक्षा पर जोर।

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  • विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात की।
  • व्यापार, निवेश, रक्षा, शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों पर हुई उच्च स्तरीय चर्चा।
  • दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर अपने विचार साझा किए।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 17 अक्तूबर: भारत और कनाडा के कूटनीतिक संबंधों में एक बार फिर सकारात्मक गतिशीलता देखने को मिल रही है। हाल ही में, भारत के विदेश मंत्री (EAM) डॉ. एस जयशंकर ने नई दिल्ली में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ एक महत्वपूर्ण और व्यापक द्विपक्षीय बैठक की। इस उच्चस्तरीय मुलाकात का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) को पुनर्जीवित करना और इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। दोनों नेताओं ने मौजूदा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा की, जिससे दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग का नया मार्ग प्रशस्त हुआ है।

व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग पर विशेष जोर

इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। भारत और कनाडा दोनों ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके बीच व्यापारिक संभावनाओं असीम हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर और कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद ने व्यापार और निवेश (Trade & Investment) को बढ़ावा देने के लिए चल रही कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने माना कि इस समझौते के जल्द निष्कर्ष से दोनों देशों के व्यवसायों, निवेशकों और श्रमिकों को अभूतपूर्व लाभ मिलेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

इसके अलावा, बैठक में एयरोस्पेस, क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा), टेक्नोलॉजी, लाइफ साइंसेज, एग्री-फूड और फॉरेस्ट्री जैसे क्षेत्रों में संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच निरंतर संवाद के माध्यम से आर्थिक संबंधों को और अधिक लचीला और लाभकारी बनाने का संकल्प लिया गया।

ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा सहयोग में विस्तार

ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सहयोग भारत-कनाडा संबंधों के दो अन्य अत्यंत महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। कनाडाई विदेश मंत्री की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को और अधिक गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) के द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना शामिल है। कनाडा की माइनिंग विशेषज्ञता और भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच सामंजस्य बिठाने पर विशेष जोर दिया गया।

सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा हुई। क्षेत्रीय स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई और हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में शांति बनाए रखने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा सहयोग को बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने पर सहमति बनी।

शिक्षा, विज्ञान और तकनीकी नवाचार में साझेदारी

शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क (People-to-People Ties) भारत और कनाडा के रिश्तों की असली ताकत हैं। दोनों मंत्रियों ने उच्च शिक्षा, अकादमिक अनुसंधान और तकनीकी विकास में सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर चर्चा की। भारत में कनाडाई शैक्षणिक संस्थानों की उपस्थिति बढ़ाने, उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा और फिनटेक में संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रस्तावों पर विचार किया गया।

छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही को सुगम बनाने तथा वीज़ा और गतिशीलता से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने की इच्छा जताई। कनाडा में एक बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय निवास करता है, जो दोनों देशों के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु के रूप में कार्य करता है।

क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर चर्चा

द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा, डॉ. एस जयशंकर और अनीता आनंद ने कई प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर अपने विचार साझा किए। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में मिडिल पावर्स (मध्य शक्तियों) की भूमिका पर चर्चा करते हुए, कनाडाई विदेश मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को परखने के इस दौर में समान विचारधारा वाले देशों को मिलकर काम करना चाहिए। इससे वैश्विक चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा।

यह मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कारने के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता के ठीक बाद हुई है, जिसमें दोनों शीर्ष नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गतिशीलता को बनाए रखने और ठोस परिणाम प्राप्त करने पर सहमति व्यक्त की थी। इसके साथ ही, आगामी महीनों में होने वाले उच्चस्तरीय दौरों और मुलाकातों के लिए भी जमीन तैयार की गई।

निष्कर्ष और भविष्य की दिशा

विदेश मंत्री एस जयशंकर और कनाडाई एफएम अनीता आनंद की यह द्विपक्षीय बैठक भारत-कनाडा संबंधों को पटरी पर लाने और भविष्य की चुनौतियों का मिलकर सामना करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हुई है। नेताओं ने निरंतर संवाद, कूटनीतिक खुलापन और उच्चस्तरीय जुड़ाव को बनाए रखने का संकल्प लिया है ताकि दोनों देशों के नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। यह बैठक यह स्पष्ट करती है कि आपसी सम्मान और समान हितों के आधार पर दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को एक नए और मजबूत भविष्य की ओर ले जाने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध हैं।

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