हाई कोर्ट में नेहा बोरा का दावा: CJP प्रोटेस्ट से मेरा नाता नहीं
दिल्ली उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान एिसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन से खुद को पूरी तरह अलग किया।
- नेहा बोरा ने दिल्ली हाई कोर्ट में CJP प्रोटेस्ट से दूरी बनाई।
- कहा कि कनॉट प्लेस का प्रदर्शन किसी अन्य संगठन ने बुलाया था।
- पुलिस के शांति बॉन्ड नोटिस के खिलाफ याचिका पर सुनवाई जारी।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 22 अक्तूबर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विभिन्न प्रदर्शनों और उसके बाद उपजे कानूनी विवादों के बीच एक नया और दिलचस्प मोड़ सामने आया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में चल रही सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया है कि उनका कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था। अदालत में दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों और छात्र संगठनों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है, क्योंकि इसे विभिन्न आंदोलनों में आपसी एकजुटता के लिहाज से एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
पुलिस के शांति बॉन्ड नोटिस को दी गई है चुनौती
मामला उस समय का है जब 16 अक्टूबर को दिल्ली में विभिन्न मुद्दों के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। हिरासत से रिहाई के बाद दिल्ली पुलिस ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के माध्यम से नेहा बोरा को एक नोटिस जारी किया था, जिसमें उनसे 10,000 रुपये का व्यक्तिगत ‘शांति बॉन्ड’ (Peace Bond) भरने और भविष्य में शांति बनाए रखने की शर्त रखी गई थी।
इस नोटिस को अवैध बताते हुए और इसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से राहत पाने के लिए नेहा बोरा ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में उन्होंने पुलिस कार्रवाई और नोटिस को चुनौती दी है, जिस पर अदालत में लगातार सुनवाई चल रही है।
अदालत में वकीलों की दलील: “वह किसी अन्य आयोजन में व्यस्त थीं”
उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से पैरवी करते हुए उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि कनॉट प्लेस (Central Park) में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जो प्रदर्शन या आह्वान किया गया था, उसमें नेहा बोरा की कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं थी। वकीलों ने स्पष्ट किया कि सीजेपी का वह प्रोटेस्ट पूरी तरह से एक अलग संगठन द्वारा आयोजित किया गया था।
इसके विपरीत, नेहा बोरा उस दौरान मंडी हाउस क्षेत्र में अपने संगठन के तयशुदा और अलग कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही थीं। अदालत को यह भी बताया गया कि नेहा बोरा हमेशा शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में रहकर अपनी बात रखती आई हैं और उन्होंने कभी भी मंच से हिंसा या कानून व्यवस्था को तोड़ने के लिए किसी को नहीं उकसाया है। उनके वकीलों का तर्क था कि केवल संदेह या गलतफहमी के आधार पर उन्हें इस तरह के नोटिस जारी नहीं किए जाने चाहिए।
अभिजीत दीपके और CJP के लिए एक बड़ा झटका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अदालत में नेहा बोरा द्वारा इस तरह से CJP के प्रदर्शन से खुद को अलग करना कॉकरोच जनता पार्टी और उसके नेताओं (जैसे अभिजीत दीपके) के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों और सरकार विरोधी आंदोलनों के दौरान इन सभी संगठनों और नेताओं को अक्सर एक मंच पर समन्वय बनाते हुए देखा जाता था। ऐसे में, अदालत के आधिकारिक मंच से इस प्रकार की दूरी बनाए जाने की घोषणा ने इन गठबंधनों की एकजुटता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
दिल्ली उच्च न्यायालय में इस मामले पर लंबी और विस्तृत सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका पर अपना फैसला फिलहाल सुरक्षित रख लिया है। इस मामले में आगामी शाम तक अंतिम निर्णय आने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें यह तय होगा कि पुलिस द्वारा जारी किया गया शांति बॉन्ड का नोटिस रद्द होता है या इसे बरकरार रखा जाता है।
निष्कर्ष
नेहा बोरा द्वारा हाई कोर्ट में दिए गए इस स्पष्टीकरण ने राजधानी के राजनीतिक और विरोध-प्रदर्शन के परिदृश्य को एक नया आयाम दे दिया है। एक तरफ जहां पुलिस अपनी प्रशासनिक कार्रवाई और शांति व्यवस्था बनाए रखने के तर्कों पर कायम है, वहीं दूसरी तरफ छात्र नेता कानूनी दांवपेंच के जरिए राहत पाने की कोशिश कर रही हैं। इस पूरे प्रकरण पर अब अदालत के आने वाले फैसले की सभी को प्रतीक्षा है।