राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा और EFTA प्रतिनिधिमंडल: संयोग या कोई कड़ी?

एक ही समय हनोई में मौजूदगी को लेकर उठे सवाल

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!

पूनम शर्मा 

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कथित वियतनाम यात्रा को लेकर सोशल मीडिया पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। चर्चा का मुख्य कारण यह है कि जिस समय राहुल गांधी के हनोई जाने की खबर सामने आई, उसी समय यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA के प्रतिनिधि भी वियतनाम की राजधानी हनोई में मौजूद थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी 18-19 अक्टूबर के आसपास विदेश यात्रा पर रवाना हुए और उनके हनोई जाने की खबर सामने आई। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस यात्रा का कोई विस्तृत आधिकारिक कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया था और कुछ रिपोर्टों में इसे निजी यात्रा बताया गया।

18 अक्टूबर को हनोई में EFTA-वियतनाम समझौता

इसी दौरान 18 अक्टूबर 2026 को हनोई में वियतनाम और European Free Trade Association (EFTA) के चार सदस्य देशों—स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन—के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर हुए। यह वार्ता वर्ष 2012 में शुरू हुई थी और जुलाई 2026 में बातचीत पूरी होने के बाद समझौते पर हनोई में हस्ताक्षर किए गए।

हस्ताक्षर समारोह में स्विट्जरलैंड, आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन और नॉर्वे के आधिकारिक प्रतिनिधि मौजूद थे। नॉर्वे की ओर से विदेश मंत्रालय की स्टेट सेक्रेटरी Astrid Bergmål ने भाग लिया।

नॉर्वे के विदेश मंत्री से पहले भी हुई थी मुलाकात

एक और तथ्य की ओर ध्यान देना आवश्यक  है। नॉर्वे के विदेश मंत्री Espen Barth Eide ने 19 मार्च 2025 को नई दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। यह मुलाकात 10 जनपथ पर हुई थी और नॉर्वे की भारत में राजदूत May-Elin Stener भी मौजूद थीं। इस मुलाकात का उल्लेख कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड में भी है।

इसी आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा और उसी अवधि में हनोई में EFTA से जुड़ी गतिविधियों के बीच क्या किसी प्रकार का संबंध था, या दोनों घटनाएं केवल समय का संयोग थीं।

सवाल महत्वपूर्ण 

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल एक ही शहर में लगभग एक ही समय मौजूद होने से किसी प्रकार के राजनीतिक समन्वय, गुप्त बैठक या समझौते का संदेह अवश्य होता है ।

उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी यह पुष्टि करती है कि 18 अक्टूबर को हनोई में EFTA-वियतनाम मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए, और राहुल गांधी के हनोई जाने की मीडिया रिपोर्ट भी सामने आई। साथ ही मार्च 2025 में उनकी नॉर्वे के विदेश मंत्री से मुलाकात भी दर्ज है। लेकिन इन घटनाओं को आपस में जोड़ने वाला कोई सार्वजनिक रूप से प्रमाणित दस्तावेज या आधिकारिक बयान फिलहाल सामने नहीं आया है।

इसलिए घटनाक्रम सवाल जरूर खड़े करता है, लेकिन किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए राहुल गांधी की यात्रा का आधिकारिक उद्देश्य, कार्यक्रम और संभावित बैठकों की जानकारी सामने आना आवश्यक होगा।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!
Leave A Reply

Your email address will not be published.