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गुरु-शिष्य परंपरा

शिक्षक : बदलते समय में बदलते अर्थ

डॉ. विनय कुमार वर्मा मनुष्य जब इस पृथ्वी पर आया, तब उसके पास न विद्यालय थे, न विश्वविद्यालय, न पाठ्यपुस्तकें और न ही डिग्रियाँ। फिर भी वह सीखता था। प्रकृति उसकी पहली पाठशाला थी, अनुभव उसकी पहली पुस्तक और जीवन उसका पहला शिक्षक। धीरे-धीरे…
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 “गुरु-शिष्य” परंपरा भारतीय सांस्कृतिक विरासत की नींव है: सत्य पाल जैन

समग्र समाचार सेवा चंडीगढ़, 14 जुलाई। युवा संकल्प फाउंडेशन और देवल्या पुजारी परिषद ने शहर के विभिन्न हिस्सों में "गुरु पूर्णिमा" और "व्यास पूजा" मनाया। बुधवार को पूरे चंडीगढ़ में 52 अलग-अलग जगहों और मंदिरों में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।…
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