समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,15 अक्टूबर।
अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने का हक अब बेटियों को भी है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले से इस पर मुहर लगा दी है। छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायलय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पुत्री अविवाहित हो या अविवाहित, वह पिता पर आश्रित होती है। उसके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने कोल इंडिया को आदेश दिया कि वो मृतक पिता की जगह पर विवाहित बेटी को उचित नौकरी दे।
बता दें कि देश में विभिन्न राज्य सरकारें केंद्र सरकार समय-समय पर अनुकंपा के आधार पर नौकरी के हकदार आश्रितों की परिभाषा अन्य कसौटियां तय करती रहती हैं। ताजा निर्देशों के अनुसार कुल नियुक्तियों की 5 प्रतिशत ही अनुकंपा के आधार पर हो सकती हैं। इस आधार पर ग्रुप सी डी में ही नियुक्तियां हो सकती हैं। विवाहित पुत्र तथा विवाहित पुत्री को आश्रित के दायरे से बाहर रखा गया है बता दें कि इससे पहले भी कई राज्यों की उच्च अदालतें विवाहित बेटियों के लिए अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने का समर्थन कर चुकी हैं।
बता दें कि इसी वर्ष अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बेटी जन्म के साथ ही पिता की संपत्ति में बराबर का हकददार हो जाती है। टिप्पणी में कहा था, ‘बेटियां हमेशा बेटियां रहती हैं। बेटे तो बस विवाह तक ही बेटे रहते हैं।’
2015 में मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर नौकरी रहते पिता की मौत हो जाए तो विवाहित बेटी भी अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने की अधिकारी होती है। हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि महिला को पिता की जगह नौकरी पाने के लिए अपने बहन-भाइयों से अनापत्ति प्रामण पत्र देना होगा।