समग्र समाचार सेवा
बिहार,26अक्टूबर।
बीजेपी ने अखबारों को चुनावी विज्ञापन दिए, इनमें बिहार की जनता से वोट की अपील की गई, लेकिन इन विज्ञापनों में नीतीश कुमार की तस्वीर को बाहर कर दिया गया। विज्ञापनों में सिर्फ पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर है। इससे बिहार में चर्चा है कि क्या बीजेपी को अंदाज़ा हो गया है कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता बिहार में कम हुई है।
उनके लिए लोगों में गुस्सा है। चर्चा ये भी है कि बीजेपी ने नीतीश की तस्वीर देना ज़रूरी नहीं समझा है तो इसके पीछे चिराग पासवान भी हैं. चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने बिहार चुनाव में अकेले चुनाव मैदान में उतरकर ऐसा सियासी दांव चला है, जिसमें भाजपा के सहयोगी जनता दल का खेल बिगाड़ कर रख दिया है. कल तक बिहार में ”बडे भाई” की भूमिका में दंभ भरने वाले जदयू की हालत ऐसी हो गई है कि भाजपा ने भी समाचार पत्रों में दिए गए विज्ञापनों में नीतीश कुमार की तस्वीर नहीं लगाई है।
बता दें कि लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने पार्टी की कमान संभालते ही अलग स्टैंड लिया, जिससे पार्टी को मजबूती से स्थापित किया जा सके. अब वे खुद को स्थापित करने की जद्दोजहद में हैं. यही वजह है कि कई मौकों पर उन्होंने अपना स्टैंड जदयू से अलग दिखाया. चुनाव के पहले से ही चिराग पासवान सरकार की कई योजनाओं के क्रियान्वयन व अफसरशाही पर सवाल उठाने से पीछे नहीं रहे. जब जदयू ने समय पर चुनाव कराने की बात की तो चिराग ने चुनाव आयोग को पत्र के जरिये कोरोना संक्रमण के चलते अभी चुनाव नहीं कराने की मांग कर दी. उस समय ही यह आशंका को बल मिल गया कि चिराग कोई बड़ा निर्णय लेंगे।
कहा जा रहा है कि लोजपा इस चुनाव में नरेंद्र मोदी की छवि का प्रचार करके कम से कम 10-15 सीटें जीतना चाहती है, ऐसे में अगर भाजपा और जदयू मिलकर 122 के सरल बहुमत आंकड़े को हासिल करने में पीछे रह जाते हैं तो लोजपा की भाजपा के सहयोगी के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. राजग की ओर से जदयू जहां 115 सीटों पर चुनाव लड़ रही है वहीं भाजपा 110 सीटों पर चुनाव मैदान में है. भाजपा ने अपने हिस्से की 11 सीटें राजग में शामिल विकासशील इंसान पार्टी को दी है जबकि जदयू अपने हिस्से की सात सीटें हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) को दी है।
इधर, भाजपा (BJP) द्वारा समाचार पत्रों में दिए गए विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर तो है, लेकिन नीतीश कुमार की तस्वीर को स्थान नहीं दिया गया है. हालांकि भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल कहते हैं कि भाजपा चुनावी मैदान में मुख्यमंत्री नीतीश के नेतृत्व में उतरी है, इसमें किसी को असमंजस में नहीं रहना चाहिए। इधर, जदयू के अजय आलोक कहते हैं कि कई ‘युवराज’ चुनावी मैदान में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए हैं, 10 नवंबर को सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।