क्यो भई ? मोदीशाह के अखंड साम्राज्य में वो हर बात होगी जो 70 साल में नहीं हुई । संसद में यदि सवाल नहीं होंगें उनके जबाब नहीं दिये जायेंगें तो फिर संसद के मायने क्या ?
सांसद को जनता ने सवाल के लिये ही चुना है , जब सवाल ही नहीं तो सांसद के वेतन भत्ते भी बंद होने चाहिए, बिना काम के बेतन क्यो ?
संसद में प्रश्नकाल नहीं होगा , क्योकि रूह कांपती है, अपने कुकर्मो को याद कर या उनका जिक्र भर हो जाने से, रंगीले बादशाह के रंग में भंग हो जाता है । प्रश्न काल क्यो नहीं होना चाहिए, क्योकि कोई ये ना पूछे कि लद्दाख का सच बताओ, पीएम केयर का सच बताओ, 8500 करोड के विमान की जरूरत बताओ, रेल से लेकर हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स बेचने की मजबूरी बताओ , ये बताओ कि जब समूचे देश की जीडीपी औधे मुंह गिर कर रसातल को चली गयी इसी दौर में मोदी के दोनों आकाओं की सम्पत्ति दिन दूनी रात चैगुनी रफ्तर से कैसे बढ़ गयी । ये सवाल न पूछा जाये कि जब देश डूब रहा हेै तब भाजपा के कार्यालयों की पंचसितारा सीरीज कैसे पनप रही है ।
ये न पूछा जाय कि लद्दाख में जब सेना चीन के खिलाफ पूरी तैयार है तब सेना के हाथ से बंदूक छीन कर माइक क्यों पकडया जा रहा है । विदेश और रक्षा मंत्री जिस दौर को सबसे कठिन कह रहे है प्रधानमंत्री उसको सबसे महफूज क्यों मान रहे है ।
संसद का प्रश्नकाल इसलिये न हो कि कोई ये न पूछे कि आप, अमेरिका के कार्पोरेट के साथ मिल कर भारत के गांवों का डिजिटल सर्वे कर गांव की आवासीय सम्मपति को टैक्स में लाने का कुचक्र रच कर किसानों ग्रामीणों को बंधक क्यों बनाना चाहते हैं, गांव के खेत खलिहानों को अमेरिका की शै पर गिरवी क्यो रखना चाहते है । आपने संसद के बिना ही आर्डिनेंस लाकर किसानों की कमर तोडने वाला फॉर्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स कानून क्यो बनाया और किसको पूछ कर बनाया ।
संसद में प्रश्नकाल इसलिये न हो कि, कोई ये न पूछ सके कि केन्द्र राज्यों का सारा जीएसटी ठग कर कहां लुटा आया , जबरन लूटे गये रिजर्व बैंक के रूपये गये तो कहां गये ।
कोई ये न पूछे कि 2 करोड रोजगार देने वाले ने 16 करोड लोगों के हाथ से रोटी क्यो छीन ली । 6 करोड लोग नौकरियों से क्यो निकाल दिये गये ।
कोई ये न पूछे कि विश्व गुरू के सपने दिखाने वाले ने देश को दुनिया के सबसे असुरक्षित देशों की सूची में कैसे डलवा दिया । जहां यूरोप अमेरिका को अपने नागरिकों को भारत न जाने की सलाह जारी करनी पड गयी ।
कोई ये न पूछे कि विश्वगुरू के देश में 30 करोड लोग आज भूखे क्यो सो रहे है । विश्व भुखमरी सूचकांक में भारत नेपाल बंग्लादेश पाकिस्तान से भी बदतर हालात में क्यो चला गया ।
इन सात सालों के कुप्रबंधन अय्याशी और अट्टाहास ने इतने सवाल खड़े कर दिये है कि उतनी तो जबाब देने वालों की उम्र भी शेष नहीं रही ।
सवाल ! लोकतंत्र का आधार है , सवाल ! लोकतंत्र का ईंधन है , सवाल ! लोकतंत्र का पहिया है और सवाल ही लोकतंत्र की आत्मा है ! तुम्हारी आत्मा तो मरी हुई ही है ये पूरा देश जानता है किन्तु देश की आत्मा को मारने का ये कुचक्र क्यो कर रहे हैं ।
संसद ! किसी राजनैतिक व्यक्ति या दल का प्रतिनिधित्व नहीं करती , संसद “हम भारत के लोगों” का प्रतिनिधित्व करती है , भारत के हजारों सवाल हैं , यदि प्रश्नकाल नहीं होगा तो भारत ने संसद चुनी क्यों ? इस सवाल का जबाब भी उनुत्तरित रह जायेगा ।
कम से कम इस एक सवाल के लिये तो प्रश्नकाल लाओ – सारे जबाब एक साथ मिल जायेंगें ।
हिटलर ने संसद को ही आग लगा दी थी ये कह कर कि सवाल जबाब से समय खराब होता है, क्या हम भी इतिहास के उस दृश्य को 2024 से पहले पहले देखने जा रहे है ।