समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 2 दिसंबर।
सुप्रीम कोर्ट ने आज हाथरस पीड़ित की फोटो छापने पर सवाल उठाने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हम कानून पर कानून नहीं बना सकते हैं और याचिकाकर्ता को केंद्र के समक्ष एक प्रतिनिधित्व दायर करने को कहा है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की तस्वीर छपना दुर्भाग्यपूर्ण है। जस्टिस एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि इन मुद्दों का कानून से कोई लेना-देना नहीं है।
इस पीठ में जस्टिस सूर्यकांत और अनिरुद्ध बोस भी शामिल हैं। बेंच ने कहा- ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है. इसके लिए पर्याप्त कानून है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटनाएं होती हैं।’ शीर्ष अदालत ने आगे कहा- ‘हम कानून पर कानून नहीं बना सकते, कहा गया कि याचिकाकर्ता सरकार के पास जा सकता है।’ बता दें इस साल 19 सितंबर को हाथरस में चार लोगों द्वारा एक 19 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया था। उपचार के दौरान 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। वहीं सीबीआई और ईडी जांच चल रही है। बाजरा के खेत में 14 सितंबर की सुबह आखिर क्या हुआ था इसकी सच्चाई पता लगाने में सीबीआई लगातार जुटी है। पूछताछ जारी है।