कृषि कानूनों पर नहीं बन रही बात, कोर्ट पहुंचे किसान

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 11 दिसंबर

कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार बीच लड़ाई जारी है। अब यह मसला सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर भी जा पहुंचा है। केंद्र सरकार से तीनों नए कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इन कानूनों के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन ने कोर्ट में याचिका दाखिल की है। किसान तीनों कानूनों को रद्द किए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। हालांकि सरकार कानून में संसोधन के लिए तैयार है, जिसके लिए लिखित प्रस्ताव भी किसानों को दिया गया। बावजूद किसान कानून वापसी पर अड़े हैं। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से किसान आंदोलन को लेकर गुरुवार को की गई मंत्रियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस सुनने की अपील की है।

भारतीय किसान यूनियन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि कृषि कानूनों को लेकर पुरानी याचिकाओं को सुनवाई हो। याचिका में कहा गया है कि नए कानूनों से कृषि क्षेत्र निजीकरण की ओर चला जाएगा। इन कानूनों को किसानों के चर्चा किए बगैर ही पास किया गया। याचिका में किसान यूनियन ने कहा कि कानून बन जाने के बाद सरकार चर्चा कर रही है, लेकिन उनमें भी कोई हल नहीं निकला है।

इससे पहले गुरुवार को किसान संगठनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ किया कि वो कानून वापस होने तक आंदोलन खत्म नहीं करेंगे और अपनी लड़ाई तेज करेंगे। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से अपना आंदोलन खत्म करने और संशोधन प्रस्ताव पर बात करने की मांग की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ट्वीट करते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा हाल ही में किसान आंदोलन के मामले में की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस का जिक्र किया और लोगों से उन्हें सुनने की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, ‘मंत्रिमंडल के मेरे दो सहयोगी नरेंद्र सिंह तोमर जी और पीयूष गोयल जी ने नए कृषि कानूनों और किसानों की मांगों को लेकर विस्तार से बात की है। इसे जरूर सुनें।’

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान लगभग दो सप्ताह से दिल्ली की सीमाओं सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और चिल्ला (दिल्ली-नोएडा) पर डटे हुए हैं। सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच वार्ता का अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है।

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