समग्र समाचार सेवा
वाशिंगटन,28दिसंबर।
आखिर कोरोना वायरस की मार से निपटने के लिए अमेरिका में लाए गए 900 अरब डॉलर के राहत पैकेज को आखिरकार मंजूरी मिल गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को आखिरकार इस पर हस्ताक्षर कर दिए। बता दें कि इससे पहले उन्होंने इसका विरोध जताते हुए कहा था कि यह अमेरिकी नागरिकों के लिए अपमानजनक है और इससे रूस और चीन को फायदा होगा।
इस राशि का इस्तेमाल कोरोना वायरस महामारी के दौरान बुरी तरह प्रभावित हुए कारोबारियों एवं जरूरतमंद लोगों की मदद करने और वैक्सीन मुहैया कराने के अभियान में किया जाएगा। ट्रंप ने रविवार रात को इस संबंध में घोषणा की। इस पैकेज के तहत बेरोजगारों को हर हफ्ते 300 डॉलर और जरूरतमंद लोगों को 600 डॉलर की सहायता प्रदान की जाएगी। नए प्रावधानों के तहत सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले कारोबारों, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं की भी मदद की जाएगी। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यभार संभालने के बाद और राहत पैकेज दिए जाने का वादा किया है।
इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि इस विधेयक से विदेशों में बहुत अधिक धन पहुंचेगा, लेकिन अमेरिकियों को पर्याप्त राशि नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा था कि कुछ महीने पहले कांग्रेस ने अमेरिकी लोगों को तत्काल मदद पहुंचाने के लिए एक नए पैकेज पर बातचीत शुरू की थी। हालांकि, अब वे जिस विधेयक को मेरे पास भेजने की तैयारी कर रहे हैं, वह उम्मीद से काफी अलग है। यह वास्तव में एक अपमान है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कांग्रेस से फिजूलखर्ची कम करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि इस बिल में कई बेकार के खर्चें हैं। उन्होंने कहा था कि बहुत अधिक बेकार के खर्च के बावजूद 900 अरब डॉलर के पैकेज में मेहनतकश करदाताओं को प्रति नागरिक सिर्फ 600 डॉलर की राहत मिलेगी। साथ ही छोटे व्यवसायों और विशेष रूप से उन रेस्टोरेंट को पर्याप्त धन नहीं दिया गया है, जिनके मालिकों को अत्यधिक तकलीफ हुई है।