⛅ दिनांक 31 जनवरी 2021
⛅ दिन – रविवार
⛅ विक्रम संवत – 2077
⛅ शक संवत – 1942
⛅ अयन – उत्तरायण
⛅ ऋतु – शिशिर
⛅ मास – माघ (गुजरात एवं महाराष्ट्र अनुसार – पौष)
⛅ पक्ष – कृष्ण
⛅ तिथि – तृतीया रात्रि 08:24 तक तत्पश्चात चतुर्थी
⛅ नक्षत्र – पूर्वाफाल्गुनी 01 फरवरी रात्रि 01:18 तक तत्पश्चात उत्तराफाल्गुनी
⛅ योग – शोभन दोपहर 12:33 तक तत्पश्चात अतिगण्ड
⛅ राहुकाल – शाम 05:04 से शाम 06:28 तक
⛅ सूर्योदय – 07:17
⛅ सूर्यास्त – 18:27
⛅ दिशाशूल – पश्चिम दिशा में
⛅ व्रत पर्व विवरण – संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 09:05)
💥 विशेष – तृतीया को पर्वल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🌷 विघ्नों और मुसीबते दूर करने के लिए 🌷
👉 31 जनवरी 2021 रविवार को संकष्ट चतुर्थी (चन्द्रोदय रात्रि 09:05)
🙏🏻 शिव पुराण में आता हैं कि हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी ( पूनम के बाद की ) के दिन सुबह में गणपतिजी का पूजन करें और रात को चन्द्रमा में गणपतिजी की भावना करके अर्घ्य दें और ये मंत्र बोलें :
🌷 ॐ गं गणपते नमः ।
🌷 ॐ सोमाय नमः ।
🌞 ~ हिन्दू पंचांग ~ 🌞
🌷 चतुर्थी तिथि विशेष 🌷
🙏🏻 चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेशजी हैं।
📆 हिन्दू कैलेण्डर में प्रत्येक मास में दो चतुर्थी होती हैं।
🙏🏻 पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्ट चतुर्थी कहते हैं।अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।
🙏🏻 शिवपुराण के अनुसार “महागणपतेः पूजा चतुर्थ्यां कृष्णपक्षके। पक्षपापक्षयकरी पक्षभोगफलप्रदा ॥
➡ “ अर्थात प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा एक पक्ष के पापों का नाश करनेवाली और एक पक्षतक उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है ।