शुभ-अशुभ से पहले बदल जाता है कुंड के जल का रंग, ऐसी है माता खीरभवानी की महिमा

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19जून। भारत देश के लगभग सभी मंदिरों की अपनी कुछ मान्यताएँ और प्रथाएँ हैं। ऐसा ही एक मंदिर जम्मू-कश्मीर में स्थित है, जहाँ स्थापित है माँ दुर्गा की प्रतिमा। खीर भवानी माता के नाम से जाना जाने वाले इस मंदिर का रहस्य ही उसे सबसे अलग बनाता है और यह रहस्य है मंदिर में स्थित कुंड के जल के रंग बदलने का। इस कुंड का जल आज भी कश्मीर में आने वाली विपत्ति की सूचना देता है। तो आइए जानते हैं, क्या है मंदिर का इतिहास और कैसे लंका से यहाँ पहुँचीं खीर भवानी माता।

पौराणिक मान्यता
लंका नरेश रावण माता खीर भवानी का परम भक्त था। उसने अपनी तपस्या और साधना से माता को प्रसन्न किया था। हालाँकि जब रावण अपने अहंकारवश बुरे कामों में संलिप्त हो गया तब माता उससे नाराज रहने लगीं। लेकिन माता, रावण से तब पूरी तरह रुष्ट हो गईं जब उसने माता सीता का अपहरण कर लिया।

उसी दौरान माता सीता की तलाश में जब हनुमान जी लंका पहुँचे तब माता क्षीर भवानी ने हनुमान जी से कहा कि वो उन्हें किसी दूसरी जगह ले चलें। माता के आदेश का पालन करते हुए हनुमान जी माता की प्रतिमा को लंका से ले आए और उन्हें जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से 14 किमी दूर तुलमुल गाँव में स्थापित कर दिया।

गांदरबल जिले में स्थित इस खीर भवानी माता मंदिर में माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है। स्थानीय निवासी माता को राग्या देवी के नाम से भी जानते हैं। माता को खीर का प्रसाद चढ़ाया जाता है। कहा जाता है कि उन्हें खीर अत्यधिक प्रिय है। इसी कारण मंदिर में माँ दुर्गा को खीर भवानी के नाम से जाना जाता है। माता को खीर अर्पित करने के बाद उसे श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

खीर भवानी माता का मंदिर अपने रहस्यमयी कुंड के लिए भी प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी जम्मू-कश्मीर पर कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तब कुंड का जल अपना रंग बदल देता है। किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में कुंड का जल काला हो जाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि जम्मू-कश्मीर में कोई विपत्ति आने वाली है। 2014 की बाढ़ और कारगिल युद्ध के दौरान कुंड के जल का रंग क्रमशः काला और लाल हो गया था। हालाँकि यह कुंड घाटी की उन्नति का संकेत भी देता है। कहा जाता है कि जब अनुच्छेद-370 हटाया गया था तब कुंड का जल हरे रंग का हो गया था। जल का यह हरा रंग कश्मीर की उन्नति और खुशहाली का प्रतीक माना गया।

कैसे पहुँचे?
खीर भवानी माता मंदिर के सबसे निकटतम स्थित हवाईअड्डा श्रीनगर का है। यहाँ से लेह, जम्मू, दिल्ली, मुंबई और चंडीगढ़ जैसे शहरों के लिए फ्लाइट उपलब्ध रहती हैं। मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन भी श्रीनगर ही है। यह 119 किमी लंबे बारामूला-बनिहाल रेलवे लाइन पर स्थित है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी खीर भवानी माता मंदिर पहुँचना आसान है। मंदिर की श्रीनगर से दूरी लगभग 14 किमी ही है। राष्ट्रीय राजमार्ग 1A और 1D श्रीनगर से जुड़े हुए हैं। यहाँ से आसानी से मंदिर तक पहुँचने के लिए कई साधन उपलब्ध हैं।

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