समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 14नवंबर। दिवाली के बाद से ही देश की राजधानी दिल्ली में हवा जहरीली हो गई है और घुटन का सिलसिला जारी है। नवंबर की शुरुआत से लेकर अब तक सात दिन राजधानी दिल्ली में गंभीर स्तर का प्रदूषण और दो बार इमरजेंसी स्तर के हालात हो चुके हैं। सीपीसीबी ( के एयर बुलेटिन के अनुसार, राजधानी का एक्यूआई स्तर शनिवार को 437 रहा और रविवार की सुबह Air Quality Index (AQI) 386 है जो कि गंभीर श्रेणी में आता है. सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने आपात बैठक बुलाई और कई सख्त पाबंदियां लगा दी हैं।
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अभी लॉकडाउन नहीं लगाया गया है, लेकिन अगर हालात नहीं सुधरे तो उसपर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति और खराब होती है तो दिल्ली में पूरी तरह लॉकडाउन लगाया जा सकता है, इसे लेकर एक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
सोमवार से एक हफ्ते तक स्कूल ऑनलाइन चलेंगे. यानी स्टूडेंट्स को स्कूल नहीं जाना है।
14 नवंबर से 17 नवंबर तक सभी कंस्ट्रक्शन ऐक्टिविटीज पर रोक लगा दी गई है।
एक हफ्ते के लिए सभी सरकारी दफ्तरों के कर्मचारी पूरी तरह घर से काम (WFH) करेंगे।
पॉल्यूशन कंट्रोल को लेकर जो उपाय सुझाए गए हैं, उनमें मार्केट खोलने या बंद करने के बारे में कुछ नहीं कहा गया है।
बाजार में रोजमर्रा की चीजें पहली की तरह मिलेंगी, इनसे जुड़ी सभी दुकानें और व्यावसायिक संस्थान खुले रहेंगे।
दिल्ली में वायु प्रदूषण ने सभी को स्मोकर की कैटगरी में लाकर खड़ा कर दिया है। इस वक्त जो एक्यूआई है, उसके मुताबिक आप दिन में 20 से 24 सिगरेट के बराबर धुआं ले रहे हैं और जो लोग स्मोकिंग करते हैं, वह पहले से दोगुना स्मोकिंग का धुआं लंग्स में ले रहे हैं।
वायु प्रदूषण के दूरगामी असर जानलेवा हो सकते हैं, इसमें लंग्स कैंसर हो सकता है। लंग्स फाइब्रोसिस हो सकता है।
जब प्रदूषिण कण ब्लड में पहुंचेंगे तो ब्लड कैंसर का खतरा बढ़ सकता है और ‘न्यूमोकोनियोसिस’ हो सकता है, जो कि अमूमन कोयला खदान या किसी ऐसी फैक्ट्री में काम करने वालों को होता है. इसीलिए इससे खुद को बचाना जरूरी है।