कमल किशोर शर्मा।
जेएनयू में ब्राह्मण – बनिया विरोधी नारों के विरोध में कल मुनिरका मेट्रो स्टेशन गेट नंबर 1से जेएनयू तक एक शांति मार्च का आयोजन किया गया था। (जो कि हमारे मौलिक अधिकारों की श्रेणी में आता है) जिसमें दिल्ली एनसीआर के सनातनी भाइयों और बहनों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया किंतु, हमें जेएनयू में प्रवेश नहीं करने दिया गया। सभी साथियों को गिरफ्तार करके सरोजिनी नगर पुलिस स्टेशन कुछ को वसंत कुंज पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जिससे हम अपना विरोध प्रदर्शन करने और मार्च निकालने में असफल रहे किंतु, हर्ष और संतुष्टि का विषय यह है कि इसके बावजूद कुछ साथी बहन निधि गुप्ता जी के साथ जेएनयू में अंदर घुसने में सफल रहे और उन्होंने लगभग 1 किलोमीटर लंबा मार्च भी निकाला,

हालांकि अभी तक जेएनयू प्रशासन के कान पर जूं भी नहीं रेंगी है! JNU प्रशासन ने अभी तक इन उपद्रवी, असामाजिक और उद्दंड छात्रों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की है, और JNU प्रशासन की तरफ से कोई FIR ना होने कारण पुलिस भी अब तक कोई एक्शन नहीं ले पाई है।
कभी भारत के टुकड़े करने के राष्ट्र विरोधी नारे लगाते हैं, कभी सेना को बलात्कारी कहते हैं, कभी भगवे का अपमान, कभी वीर सावरकर का अपमान, कभी विवेकानंद जी का अपमान और अब यह सनातन समाज को भी जातियों में बांटकर समाज को दुर्बल बना रहे हैं, और एक दुर्बल समाज कभी सशक्त राष्ट्र का निर्माण नहीं कर सकता।

दिल्ली एनसीआर के सभी सनातनी प्रदर्शनकारियों के आपसी विचार विमर्श के बाद यह तय हुआ है कि यदि, इस विषय पर तुरंत कार्यवाही नहीं हुई तो इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा, दिल्ली एनसीआर का सनातन समाज अब देश के करदाता के पसीने से कमाऐ हुए रुपए पर पलने वाले JNU के इन राष्ट्र विरोधी और हिंदू विरोधी छात्रों की राष्ट्र विरोधी और सनातन विरोधी गतिविधियों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा और जब तक शरारती छात्रों के विरुद्ध जेएनयू प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं की जाती तब तक इस के विरुद्ध आंदोलन जारी रहेगा।
आगे की रणनीति के लिए अगली बैठक में विचार विमर्श किया जाएगा।
कमल किशोर शर्मा