यहां जानें दिवाली के दिन क्यों की जाती है मां लक्ष्मी की पूजा?

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,6नवंबर। हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि के दिन दिवाली का पर्व मनाया जाता है और इस साल यह तिथि 12 नवंबर 2023, रविवार के दिन पड़ रही है. हिंदुओं का सबसे बड़ा पर्व दिवाली देश के हर कोने में धूमधाम के साथ सेलिब्रेट किया जाता है. इस दिन घरों में घी के दीपक जलाए जाते हैं और हर तरफ रोशनी ही रोशनी होती है. दिवाली के दिन मां लक्ष्मी व भगवान गणेश का पूजन किया जाता है. कहते हैं कि इस दौरान यदि विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा की जाए तो घर में सुख-समृद्धि और धन-दौलत की कमी नहीं रहती है. लेकिन क्या आप जानते हैं दिवाली के दिन आखिर मां लक्ष्मी का पूजन क्यों किया जाता है?

दिवाली के दिन क्यों होती है मां लक्ष्मी की पूजा?
दिवाली के दिन लोग अपने घरों से दीपक से जगमग करते हैं. मान्यता है कि इस दिन घर में मां लक्ष्मी प्रवेश करती हैं और वास करती हैं. ऐसे में यदि वह प्रसन्न हो जाएं तो भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. ​दिवाली के दिन विधि-विधान से मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है और इसके पीछे धार्मिक महत्व जुड़ा हुआ है. कहते हैं कि जहां धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है वहां हमेशा सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है. इसे भी पढ़ें: Diwali 2023: भगवान राम ही नहीं, श्रीकृष्ण से भी है दिवाली का गहरा रिश्ता, जानें क्यों मनाते हैं यह पर्व?

पौराणिक कथाओं के अनुसार दिवाली के पांच दिवसीय महोत्सव के दौरान ही देवताओं और राक्षसों द्वारा किए गए सागर मंथन से मां लक्ष्मी उत्पन्न हुई थीं. इसलिए दिवाली को उनका जन्म दिवस भी माना जाता है. साथ ही यह भी मान्यता है कि दिवाली की रात को मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पति के रूप में चुना और उनसे विवाह किया. इस दौरान सभी देवी-देवता उनके विवाह में शामिल हुए. इसलिए दिवाली का त्योहार बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है और इस दिन विधि-विधान से मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है. मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं और जो लोग उस दिन उनकी पूजा करते है आने वाले दिनों में मानसिक, शारीरिक दुखों से दूर सुखी रहते हैं.

दिवाली से जुड़ी अन्य मान्यताएं
मान्यताओं के अनुसार भगवान राम द्वारा रावण को मारने और माता सीता को लंका से वापस लाने के 20 दिन बाद दिवाली मनाई गई थी. क्योंकि इसके बाद ही भगवान राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास काटकर वापस अयोध्या लौटे थे. उनके स्वागत के लिए पूरा अयोध्या शहर सजाया गया था. लोगों ने अपने राजा का स्वागत करने के लिए शहर को दीयों से सजाया. तब से दिवाली के दिन मिट्टी के दीयों से सजावट की जाती है और इस त्योहार को मनाया जाता है. इसके अलावा एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार दिवाली के दिन भगवान विष्णु की वैकुण्ठ में वापसी होती है और इस दौरान मां लक्ष्मी उनका स्वागत करती हैं.

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