समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 25th अगस्त। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में केंद्र सरकार पर दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों के आरक्षण को खत्म करने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने सौंदर्य प्रतियोगिता मिस इंडिया की सूची में किसी भी “दलित और आदिवासी” उम्मीदवार के न होने की ओर इशारा किया और इसे सरकार की असंवेदनशीलता का उदाहरण बताया।
राहुल गांधी ने प्रयागराज में जाति जनगणना की मांग को लेकर आयोजित संविधान सम्मान सम्मेलन में कहा कि भारत की 90 प्रतिशत आबादी की भागीदारी के बिना कोई भी प्रणाली सही से काम नहीं कर सकती। उन्होंने मिस इंडिया प्रतियोगिता के संदर्भ में आरोप लगाया कि इसमें कोई दलित, आदिवासी या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिला नहीं है और यह दर्शाता है कि मीडिया और समाज के शीर्ष हिस्से में 90 प्रतिशत आबादी की कोई भागीदारी नहीं है।
राहुल गांधी ने कहा, “हम जानना चाहते हैं कि संस्थानों, कॉरपोरेट्स, बॉलीवुड और मिस इंडिया जैसे मंचों पर कितने लोग 90 प्रतिशत आबादी से हैं। इसकी जांच होनी चाहिए।”
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये टिप्पणियां केवल “बाल बुद्धि” से ही आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जो आदिवासी समुदाय से हैं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो ओबीसी समुदाय से हैं, इस बात के प्रमाण हैं कि केंद्र सरकार ने इन समुदायों के प्रतिनिधित्व को बढ़ावा दिया है।
रिजिजू ने आगे कहा, “राहुल गांधी को तथ्यों की जांच करनी चाहिए। मिस इंडिया प्रतियोगिता और फिल्मों में आरक्षण की मांग बचकानी है और यह उन लोगों द्वारा बढ़ावा दी जाती है जो इस विभाजनकारी रणनीति को समर्थन देते हैं।”
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकारें मिस इंडिया प्रतियोगिताओं या ओलंपिक के लिए एथलीटों का चयन नहीं करतीं और फिल्मों के लिए अभिनेताओं का चयन भी सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मुद्दे सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं और इन पर चर्चा करने से अधिक महत्वपूर्ण है कि वास्तविक समस्या पर ध्यान केंद्रित किया जाए।