बिहार में निवेश की बहार: 644 फैक्ट्रियों को मंजूरी, 37 हजार करोड़ का निवेश, 55 हजार को मिलेगा रोजगार
पूनम शर्मा
पटना –बिहार में औद्योगिक क्रांति की एक नई सुबह दस्तक दे चुकी है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 644 नई फैक्ट्रियों को हरी झंडी मिल चुकी है, जिन पर कुल ₹37,202 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इससे सीधे तौर पर 55,000 युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है। यह कदम राज्य को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत आधार देने वाला है।
यह सब संभव हो पाया है बिहार सरकार की सक्रिय औद्योगिक नीति और विशेष रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा की सतत कोशिशों के कारण। सरकार का फोकस अब न सिर्फ कृषि बल्कि उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था की ओर मुड़ा है, जिसमें टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में व्यापक विस्तार की योजना है।
दो चरणों में मिली मंजूरी
उद्योग विभाग ने 644 में से 420 इकाइयों को स्टेज-1 और 244 इकाइयों को स्टेज-2 की मंजूरी दी है।
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स्टेज-1 में उत्पाद की प्रकृति, स्थान, रोजगार की संभावना, पर्यावरण मंजूरी (NOC) आदि का मूल्यांकन होता है।
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स्टेज-2 में वित्तीय मंजूरी और सरकारी सब्सिडी पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
स्टेज-1 की इकाइयों पर ₹34,460.48 करोड़ जबकि स्टेज-2 की इकाइयों पर ₹2,741.52 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इन इकाइयों के लिए भूमि आवंटन, पर्यावरणीय स्वीकृति और मार्केटिंग रणनीतियों पर तेजी से काम हो रहा है।
एमएसएमई और एक्सटेंशन सेंटर से मिलेगा बल
सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में पांच एक्सटेंशन सेंटर खोलने की योजना है।
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पटना में एक सेंटर पहले से कार्यरत है,
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अब मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, राजगीर और सारण में नए सेंटर खोले जाएँगे ।
ये सेंटर तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, उद्यमिता विकास और अन्य सुविधाएं प्रदान करेंगे ताकि स्थानीय युवाओं और महिलाओं को उद्योगों से जोड़ा जा सके।
पिछले वर्षों में भी दिखा निवेश का उत्साह
बिहार में औद्योगिक विकास की गति को समझने के लिए पिछले आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है:
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वित्तीय वर्ष 2023-24 में 2,154 यूनिट्स पर ₹11,552 करोड़ का निवेश हुआ।
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वहीं, 2024-25 की शुरुआत में अब तक 157 यूनिट्स पर ₹2,515 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।
इनमें जूता, बैग, मसाला, कागज की प्लेट, बिस्किट, चिप्स, कपड़ा और कृषि मशीनरी जैसे विविध उत्पाद शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय बायर-सेलर मीट बनी बदलाव की मिसाल
19-20 मई 2025 को पटना में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रिवर्स बायर-सेलर मीट में बिहार का औद्योगिक मिजाज दुनिया के सामने आया।
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20 देशों के 70 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदार और
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देश के 50 से ज्यादा उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सम्मेलन में पश्चिम अफ्रीका ने सत्तू, सिंगापुर ने लीची और आम, और यूएई के लुलु ग्रुप ने लीची के निर्यात को लेकर समझौते किए। साथ ही, एयरलाइंस और रेलवे कैटरिंग में बिहार के मखाना, चावल, दाल और मसालों की आपूर्ति पर सहमति बनी।
उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने बताया कि इस बिजनेस मीट में लगभग ₹1.80 लाख करोड़ के निवेश की संभावनाएं बनीं।
नामी कंपनियों का रुझान
2024-25 में अब तक 243 इकाइयों को ₹4,646.57 करोड़ की स्टेज-1 स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें जेके सीमेंट, ब्रिटानिया और पिनाक्ष स्टील जैसी दिग्गज कंपनियों के नाम भी शामिल हैं, जो अब बिहार को अपने उत्पादन हब के रूप में देख रही हैं।
टेक्सटाइल हब बनने की दिशा में तेज़ी
वैशाली जिले के गोरौल में प्रस्तावित टेक्सटाइल यूनिट से सैकड़ों महिलाओं को रोजगार मिलेगा। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने भी हाल ही में कहा कि बिहार बहुत जल्द देश का प्रमुख टेक्सटाइल हब बन सकता है।
इसके पीछे राज्य सरकार की नीतियां जैसे बिहार टेक्सटाइल और लेदर पॉलिसी 2022 अहम भूमिका निभा रही हैं।
हालांकि संभावनाएं अपार हैं, लेकिन चुनौतियाँ भी अपने स्थान पर मौजूद हैं।
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भूमि आवंटन की गति,
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पर्यावरण मंजूरी में देरी,
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स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सहयोग— ये सभी फैक्ट्रियों के समयबद्ध संचालन में अड़चन पैदा कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन प्रक्रियाओं को समयबद्ध और पारदर्शी बना दे, तो बिहार जल्द ही पूर्वी भारत का औद्योगिक केंद्र बन सकता है।बिहार अब महज श्रमिक राज्य नहीं, बल्कि उद्योगों की धरती बनता जा रहा है। निवेशकों का भरोसा बढ़ा है, रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और आर्थिक स्वावलंबन की ओर एक बड़ा कदम उठाया जा चुका है। यह सब वर्तमान सरकार की दूरदृष्टि और स्पष्ट नीति के चलते संभव हो पाया है। अब देखना यह है कि इन योजनाओं का धरातल पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है।