कर्नाटक के हासन जिले में दिल के दौरे से 21 लोगों की मृत्यु
40 दिनों में 21 लोगों की मृत्यु, युवा वर्ग चिंतित
समग्र समाचार सेवा
बेंगलुरु/हासन 1 जुलाई — कर्नाटक के हासन जिले में दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मौतों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले 40 दिनों में 21 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जिनमें से बड़ी संख्या युवा लोगों की है।
सोमवार को ही तीन लोगों की मौत हुई — जेपी नगर बेलूर के 50 वर्षीय लेपाक्षी की अचानक थकान की शिकायत के बाद मौत हो गई, होलेनरसीपुरा के अंग्रेजी प्रोफेसर मुठैया (58) की चाय पीते वक्त हार्ट अटैक से जान चली गई, और चन्नरायपटना के 57 वर्षीय डी-ग्रुप कर्मचारी कुमार ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
युवाओं में बढ़ती हृदय संबंधी मौतें
21 मृतकों में से 5 की उम्र 19-25 वर्ष के बीच और 8 की उम्र 25-45 वर्ष के बीच थी। 45 वर्ष से कम आयु के लोगों में इतनी बड़ी संख्या में मौतों ने पूरे जिले को दहला दिया है। जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 507 दिल के दौरे के मामले दर्ज हुए, जिनमें 190 लोगों की मौत हुई — यानी लगभग 37% मृत्यु दर।
जयदेव अस्पताल में मरीजों की भीड़
बेंगलुरु स्थित जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज़ एंड रिसर्च में रोगियों की संख्या में 8% वृद्धि दर्ज की गई है। ओपीडी में अब क्षमता से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग हृदय परीक्षण कराने के लिए अस्पताल का रुख कर रहे हैं।
उच्च स्तरीय जाँच के आदेश
राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव हर्ष गुप्ता ने जयदेव अस्पताल के निदेशक डॉ. रविंद्रनाथ के नेतृत्व में जांच समिति गठित की है। यह समिति पहले कोविड के बाद हृदय संबंधी समस्याओं की जांच के लिए बनी थी, जिसे अब हासन जिले के सभी मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा करने और 10 दिनों में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है।
प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि 18 में से 9 मृतकों की उम्र 55 से अधिक थी और वे पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। वहीं 5 मृतक 20 वर्ष की उम्र के थे, जिनमें से चार की मृत्यु बेंगलुरु में हुई, लेकिन वे हासन के मूल निवासी थे।
हर्ष गुप्ता ने कहा, “हासन मेडिकल साइंसेज़ के विशेषज्ञ यह भी देख रहे हैं कि क्या कुछ लोगों में अनुवांशिक कारणों से हृदय की मांसपेशियों पर असर पड़ रहा है।”
समाज में डर का माहौल
लगातार हो रही युवा मौतों से पूरे जिले में भय का माहौल है। लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में हृदय रोग जांच केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं।
अब सबकी निगाहें जाँच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं जो बताएगी कि ये मौतें सिर्फ स्वास्थ्य समस्याओं का परिणाम हैं या इनमें कोविड के बाद के प्रभाव और जीवनशैली का भी योगदान है।