दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर पैमाने पर 4.1 तीव्रता दर्ज
दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में महसूस हुए तेज झटके
- दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए।
- सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर 4.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र रोहतक, हरियाणा था।
- बारिश के बीच झटके महसूस होते ही लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 10 जुलाई: आज सुबह दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में उस वक्त हड़कंप मच गया जब भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। सुबह के 9 बजकर 3 मिनट पर आए इन झटकों की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 मापी गई, जिसने राजधानी और आसपास के इलाकों में लोगों को सहमा दिया। बारिश के मौसम में अचानक आए इस भूकंप ने लोगों को बिना देर किए अपने घरों और कार्यालयों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया।
भूकंप का केंद्र हरियाणा के रोहतक में था, जो दिल्ली से अधिक दूर नहीं है। यही कारण रहा कि दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इन झटकों को स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। लगभग 10 सेकंड तक धरती के कंपन से कई लोगों में घबराहट फैल गई। हालांकि, तत्काल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है, लेकिन अचानक आई इस आपदा ने एक बार फिर भूकंप सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सुबह का समय होने के कारण अधिकतर लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। स्कूली बच्चों से लेकर कार्यालय जाने वाले कर्मचारी तक सभी ने इन झटकों को महसूस किया। कई बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों ने बताया कि झटके इतने तेज थे कि फर्नीचर हिलने लगे और दीवारों में कंपन महसूस हुआ। सोशल मीडिया पर भी भूकंप को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं, जहां लोग अपने अनुभवों को साझा करते दिखे।
भारत का भूगर्भीय क्षेत्र भूकंप के प्रति संवेदनशील माना जाता है। खासकर दिल्ली-एनसीआर, जो सिस्मिक जोन IV में आता है, यहां छोटे-बड़े भूकंप के झटके अक्सर महसूस किए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह के भूकंप टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण आते हैं। हालांकि, 4.1 की तीव्रता का भूकंप आमतौर पर ज्यादा नुकसानदेह नहीं होता, लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों में यह लोगों में दहशत पैदा करने के लिए काफी है।
एनटीसी (राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र) और अन्य संबंधित एजेंसियों ने स्थिति पर नजर रखी हुई है। उन्होंने लोगों से शांत रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए इमारतों में भूकंपरोधी निर्माण और आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाओं का महत्व और बढ़ जाता है। लोगों को भूकंप के दौरान और बाद में सुरक्षित रहने के तरीकों के बारे में जागरूक करना भी उतना ही आवश्यक है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।