मानसून सत्र 2025: सरकार लाएगी बड़े विधेयक

कर सुधार, समुद्री कानून, जनजातीय आरक्षण समेत कई अहम विधेयकों पर केंद्र सरकार की तैयारी

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 22 जुलाई :संसद का मानसून सत्र 2025 शनिवार, 21 जुलाई से शुरू हो चुका है और यह 21 अगस्त तक चलेगा। इस बार का सत्र सरकार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें कर सुधार, समुद्री कानूनों, जनजातीय प्रतिनिधित्व और डिजिटल डेटा सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में लाया जाएगा।

सरकार की प्राथमिकता इस सत्र के दौरान कई पुराने कानूनों को अपडेट कर उन्हें आधुनिक, पारदर्शी और डिजिटल युग के अनुकूल बनाने की है। साथ ही केंद्र की मोदी सरकार चाहती है कि इस सत्र के जरिए 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बने जनादेश को विधायी रूप से सशक्त किया जाए।

संसद के एजेंडे में क्या है खास?

1. प्रत्यक्ष कर संहिता (Direct Tax Code):
सरकार एक नया प्रत्यक्ष कर विधेयक लाने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और करदाताओं को राहत देना है। यह नया कानून पुरानी कर व्यवस्था की जटिलताओं को हटाकर एक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस फ्रेंडली वातावरण बनाएगा।

2. समुद्री क्षेत्र सुरक्षा और नौवहन कानून (Maritime Law Reforms):
देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और व्यापारिक नौवहन को नियंत्रित करने वाले पुराने कानूनों में संशोधन की तैयारी है। यह विधेयक समुद्री आतंकवाद, अवैध व्यापार और तटीय राज्यों की सुरक्षा से संबंधित अहम पहलुओं को कवर करेगा।

3. जनजातीय प्रतिनिधित्व और संवैधानिक आरक्षण:
सरकार अनुसूचित जनजातियों के राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के लिए आरक्षण से जुड़े नए संशोधन विधेयक ला सकती है। इसमें आदिवासी बहुल क्षेत्रों में संसदीय और विधानसभा सीटों के पुनर्गठन का प्रस्ताव भी शामिल हो सकता है।

4. डिजिटल डेटा संरक्षण विधेयक:
नए डिजिटल डेटा संरक्षण कानून के जरिए सरकार नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहती है। यह कानून वैश्विक डेटा प्रोटेक्शन मानकों के अनुरूप होगा और सोशल मीडिया तथा तकनीकी कंपनियों को जवाबदेह बनाएगा।

विपक्ष की रणनीति

विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे इस सत्र में सरकार को महंगाई, बेरोजगारी, मणिपुर हिंसा और किसानों की समस्याओं को लेकर घेरेंगे। कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने कहा है कि वे विधेयकों की समीक्षा तो करेंगे, लेकिन सरकार की “एकतरफा विधायी प्रक्रिया” का विरोध भी करेंगे।

मानसून सत्र 2025 भारत की संसद के लिए कई मायनों में निर्णायक साबित हो सकता है। एक ओर सरकार सुधारवादी और विकासोन्मुख विधानों को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष भी तीखी बहस और जवाबदेही की मांग के साथ तैयार बैठा है। अब देखना यह है कि क्या यह सत्र सार्थक बहसों का मंच बनेगा या सिर्फ राजनीतिक टकराव तक सिमट कर रह जाएगा।

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