भारतीय रेल का सुरक्षा कवच: दिल्ली-मुंबई मार्ग पर ‘कवच 4.0’ की स्थापना

'आत्मनिर्भर भारत' का बड़ा कदम: भारतीय रेलवे ने स्वदेशी तकनीक से बनाया सुरक्षा का 'कवच', अब ट्रेनों की होगी स्मार्ट निगरानी

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  • स्वदेशी रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ को दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग के मथुरा-कोटा खंड पर स्थापित किया गया है।
  • यह प्रणाली ट्रेनों की टक्कर रोकने और कम दृश्यता (कोहरे) में चालकों को मदद करने में सक्षम है।
  • रेलवे का लक्ष्य अगले 6 सालों में देशभर में विभिन्न रेल मार्गों पर कवच 4.0 को स्थापित करना है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 30 जुलाई, 2025: भारतीय रेल ने देश की सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण रेलमार्गों में से एक, दिल्ली-मुंबई रूट पर अपनी स्वदेशी रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच 4.0’ को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। यह प्रणाली मथुरा-कोटा रेलखंड पर चालू हो गई है। रेल मंत्रालय ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ दृष्टिकोण से प्रेरित एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस अत्याधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को विकसित करने और स्थापित करने में भारत ने कई विकसित देशों से भी कम समय लिया है।

क्या है कवच और कैसे करता है काम?

कवच एक स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (Automatic Train Protection) प्रणाली है, जिसे ट्रेनों की गति पर लगातार निगरानी रखने और किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे सुरक्षा का सर्वोच्च स्तर, सेफ्टी इंटिग्रिटी लेवल 4 (SIL-4) पर प्रमाणित किया गया है।

यह प्रणाली लोको पायलट (ट्रेन चालक) को कई तरह से मदद करती है:

टक्कर रोकथाम: यदि एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने-सामने आ जाती हैं, तो कवच स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देता है, जिससे टक्कर की संभावना खत्म हो जाती है।

सिग्नल प्रोटेक्शन: अगर चालक गलती से लाल सिग्नल को पार कर लेता है, तो कवच खुद-ब-खुद ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देता है।

कम दृश्यता में मदद: कोहरे या धुंध जैसी कम दृश्यता की स्थिति में, चालक को सिग्नल देखने के लिए बाहर नहीं देखना पड़ता। डैशबोर्ड पर लगी स्क्रीन पर सभी सिग्नल और गति संबंधी जानकारी उपलब्ध होती है।

यह प्रणाली रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग, दूरसंचार टावरों और लोको तथा स्टेशन पर स्थापित उपकरणों के माध्यम से लगातार संचार करती रहती है।

विकास की यात्रा: 2015 से अब तक

कवच का विकास 2015 में शुरू हुआ था और तीन वर्षों के गहन परीक्षण के बाद, इसे सबसे पहले दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) में स्थापित किया गया। 2018 में इसे पहला संचालन प्रमाणपत्र मिला। SCR में मिले अनुभवों के आधार पर, इसके उन्नत संस्करण ‘कवच 4.0’ को विकसित किया गया, जिसे मई 2025 में 160 किमी/घंटा तक की गति के लिए मंजूरी मिली। यह प्रणाली पूरी तरह से स्वदेशी है और इसके सभी उपकरण भारत में ही बनाए जा रहे हैं।

राष्ट्रव्यापी विस्तार और प्रशिक्षण

भारतीय रेलवे अब अगले 6 वर्षों के भीतर देशभर के विभिन्न महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर कवच 4.0 को स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। यह एक बहुत बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसमें हजारों किलोमीटर ट्रैक और सैकड़ों ट्रेनों को इस प्रणाली से जोड़ा जाएगा।

इस प्रणाली को लागू करने के लिए रेलवे ने बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। अब तक 30,000 से अधिक लोगों को कवच प्रणाली पर प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके अलावा, IRISET (भारतीय रेल सिग्नल इंजीनियरिंग एवं दूरसंचार संस्थान) ने AICTE से मान्यता प्राप्त 17 इंजीनियरिंग कॉलेजों, संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ समझौता किया है ताकि B.Tech पाठ्यक्रम में भी कवच को शामिल किया जा सके।

रेलवे हर साल सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करता है, और कवच इसी प्रतिबद्धता का एक जीता-जागता उदाहरण है। कवच की त्वरित प्रगति और इसकी व्यापक तैनाती का स्तर भारतीय रेलवे की सुरक्षा के प्रति गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 

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